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नए नोटों के लिए सांसदों ने भी खाए धक्के

संसद भवन परिसर में स्थित भारतीय स्टेट बैंक से नोट बदलवाने पर उंगली पर काली स्याही लगाने से तमिलनाडु के एक सांसद नाराज हो गए।

Author नई दिल्ली | Updated: November 17, 2016 4:57 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर। (Photo: PTI)

हजार और पांच सौ के नोटबंदी को लेकर संसद भवन परिसर में सांसद, सुरक्षाकर्मी और पत्रकार दिन भर धक्के खाते रहे। संसद के कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और पत्रकार संसद भवन परिसर में एक एटीएम से दूसरे एटीएम दौड़ लगाते दिखे। संसद भवन परिसर में स्थित भारतीय स्टेट बैंक से नोट बदलवाने पर उंगली पर काली स्याही लगाने से तमिलनाडु के एक सांसद नाराज हो गए। उन्होंने अंग्रेजी में कहा कि अपने पैसे के लिए सांसद से ऐसा क्यों कराया जा रहा है।
संसद भवन में मौजूद भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में सांसदों और पूर्व सांसदों के पुराने नोट बदले गए और वे अपने खाते से पैसे निकाल पाए। नोट बदलने पर उंगली पर स्याही लगाने पर सांसद नाराज होते दिखे तो पत्रकार अपने नोट बदलवाने के लिए नेताओं से असफल प्रयास करते दिखे। इस काम में केवल पत्रकार या संसद के कर्मचारी ही नहीं लगे हुए थे, संसद और नेताओं की सुरक्षा में लगे अर्द्धसैनिक बलों के जवान भी पूरे समय एटीएम से रुपए निकालने की ताक में लगे हुए थे।

राज्यसभा में नोटबंदी को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। लोकसभा के दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि देने के लिए निचले सदन की कार्यवाही शुरू होने के पांच मिनट के दौरान ही स्थगित कर दी गई। उसके बाद पत्रकार संसद भवन परिसर में लगे एटीएम की ओर दौड़े पता चला कि किसी में रुपए नहीं हैं और संसदीय सौंध की एटीएम में लंबी लाइन लगी। फिर सभी ने पहली मंजिल पर स्टेट बैंक की शाखा की लॉज में घुसने का प्रयास किया। तब बताया गया कि वे केवल सासदों और पूर्व सांसदों को ही पैसा देंगें। उस समय जो नेता बैंक आए उनके पीछे पत्रकार और दूसरे कर्मचारी लग जाते। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने बैंक मैनेजर को दूसरों को भी सुविधा देने को कहा तो मैनेजर ने दो बजे के बाद का समय दिया लेकिन लोग परेशान ही होते रहे। अपना पैसा बदलवाने या नया नोट लेने आए कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, जद (एकी) के वशिष्ट नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री विजय गोयल आदि से भी पत्रकार यही आग्रह करते रहे।

तमिलनाडु के एक सांसद के नोट बदलवाने पर उनकी उंगली पर स्याही लगाने पर वे नाराज होते दिखे। वे अंग्रेजी में कहते जा रहे थे कि अपने पैसे के लिए सांसद से ऐसा क्यों कराया जा रहा है। इतने में संसद परिसर के पुस्तकालय के पास के एटीएम में पैसा डलने का खबर आई, फिर तो सभी सारा कुछ छोड़ कर वहीं दौड़े। मिनटों में लंबी लाइन लग गई। जो पत्रकार और कर्मचारी संसद के सेंट्रल हाल के पास थे, उनका नंबर पहले आ गया। वे दो हजार रुपए निकाल कर इस तरह से बाहर आ रहे थे, जैसे उन्होंने कोई युद्ध जीत लिया हो। यह कह कर लोगों की धड़कन बढ़ा दी गई कि कुल दो लाख रुपए ही एक बार में डाले जा सकते हैं। यानि पीछे खड़े लोगों की नंबर नहीं आने वाला है।

आमतौर पर लोकसभा की कार्यवाही न चलने पर कुछ ही समय में संसद परिसर में सन्नाटा पसरने लगता है लेकिन बुधवार शाम तक लोग नोट बदलने और एटीएम से रुपया निकलवाने के चक्कर में परिसर में ही सक्रिय दिख रहे थे। बड़े नोट बंद होने पर देश की संसद में यह हाल है तो छोटे शहर और गांवों में क्या हाल होंगे, इसकी कल्पना करना कठिन नहीं है। अपने पैसे बैंक से निकालने के लिए लोगों को दर-दर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। अपना पैसा अपने पास होने के बाद भी उसका उपयोग नहीं करने की त्रासदी पूरा समाज भुगत रहा है।

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