Mekedatu Project: कर्नाटक सरकार राज्य में पीने के पानी की आवश्यकता और बिजली उत्पादन के दोहरे उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कावेरी नदी पर मेकेदातु में एक संतुलन बांध बनाने की प्लानिंग कर रहा है। इसको लेकर तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मेकेदातु बांध के निर्माण का विरोध किया है।
दरअसल, मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे मेकेदातु प्रोजेक्ट के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा तैयार किए गए DPR को खारिज करें। सीएम विजय ने कहा है कि कर्नाटक सरकार को प्रधानमंत्री मोदी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन न करने की सलाह दें।
सीएम विजय ने दिया था अधिकारियों को आदेश
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने कहा, “मेकेदातु प्रोजेक्ट के लिए ‘भूमि पूजन’ की घोषणा SC के फैसले और कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल के अंतिम फैसले का उल्लंघन है।” हाल ही में इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री विजय ने मंत्रियों, कानूनी विशेषज्ञों के साथ अहम बैठक की थी। इस बैठक में विजय ने वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य सभी लोगों को निर्देश दिया कि कर्नाटक की मेकेदातु बांध योजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया।
इन परामर्शों में सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों की समीक्षा की गई जिनमें तमिलनाडु की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था और केंद्रीय जल आयोग को पिछले फैसलों के अनुपालन का आकलन करने का जिम्मा सौंपा गया था। सीएम विजय ने तमिलनाडु के कावेरी जल अधिकारों और डेल्टा क्षेत्र के किसानों की आजीविका की रक्षा पर जोर दिया, जिससे राजनीतिक संवेदनशीलता के बावजूद एक दृढ़ रुख का संकेत मिला।
मेकेदातु प्रोजेक्ट क्या है?
मेकेदातु प्रोजेक्ट की बात करें तो यह कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार द्वारा प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय परियोजना है। यह परियोजना कर्नाटक के रामनगर ज़िले में कनकपुरा के पास के लिए प्रस्तावित है।
यह कावेरी और उसकी सहायक अर्कवती नदी के संगम के पास स्थित है। मेकेदातु प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बेंगलुरु शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए पेयजल उपलब्ध कराना और 400 मेगावाट बिजली का उत्पादन करना है।
क्यों है इस परियोजना को लेकर विवाद?
मेकेदातु परियोजना को लेकर विवाद की बात करें तो तमिलनाडु का तर्क है कि इस बांध के निर्माण से निचले इलाकों (कावेरी डेल्टा) में पानी के प्राकृतिक प्रवाह में भारी कमी आएगी। इससे राज्य के किसानों और सामान्य आबादी को मिलने वाले पानी के हक पर असर पड़ेगा।
दूसरी ओर कर्नाटक सरकार का मानना है कि इस बांध से बारिश के मौसम में समुद्र में बेकार बह जाने वाले अतिरिक्त पानी को रोका जा सकेगा, जिससे बेंगलुरु के निवासियों की प्यास बुझेगी, और विद्युत निर्माण की क्षमता में भी विस्तार होगा, जिसका सीधा फायदा शहर के लोगों को होगा।
डीएमके ने भी किया विरोध
विपक्षी पार्टी डीएमके ने रविवार को मेकेदातु बांध मुद्दे पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर जमकर हमला बोला और आरोप लगाया कि उन्होंने यह दावा करके अहंकारी रवैया दिखाया कि तमिलनाडु को कावेरी नदी पर बनी इस परियोजना पर आपत्ति उठाने का कोई अधिकार नहीं है।
डीएमके के वरिष्ठ नेता केएन नेहरू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, निचले तटवर्ती राज्यों की पूर्व अनुमति के बिना मेकेदातु में कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। डीएमके के प्रधान सचिव ने दावा किया कि शिवकुमार ने कहा है कि तमिलनाडु को बांध पर आपत्ति जताने का कोई अधिकार नहीं है “और यह उनके अहंकारी रवैये को दर्शाता है।
सीएम सी जोसेफ विजय और डीएमके का बयान संकेत दे रहा है कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच नए सिरे से कावेरी का जल विवाद की वजह बन सकता है, जो कि अदालतों की सुनवाई तक जा सकता है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय क्यों आ रहे दिल्ली? JNU जाने का भी है कार्यक्रम
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय बुधवार को राजधानी दिल्ली आ सकते हैं। एएनआई द्वारा सूत्रों के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय का दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने का कार्यक्रम है। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री विजय बुधवार सुबह चेन्नई से राजधानी नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला दिल्ली दौरा होगा। चेन्नई से उनके साथ तमिलनाडु के होम सक्रेटरी भी दिल्ली आएंगे। पढ़िए पूरी खबर…
