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वकील का दावा-सरकार मेहुल चौकसी को भारत नहीं ला पाएगी

मेहुल के वकील का कहना है कि वह अब भारत का नागरिक नहीं और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में व्यक्ति को उसके उस देश को प्रत्यर्पित किया जाता है, जहां का वह नागरिक होता है।

डोमनिका की पुलिस हिरासत के दौरान मेहुल चोकसी। (फोटोः Antigua News Room/ANI)

सरकार चाहे जो भी तमाशा कर ले, वह मेहुल चौकसी को भारत नहीं ला पाएगी। ऐसा कहना है भारत में मेहुल के वकील रहे विजय अग्रवाल का। अग्रवाल अभी भी भारत में रह कर डॉमिनिका के वकीलों से मिलकर मेहुल के केस में मदद कर रहे हैं। विजय का कहना है कि मेहुल अब भारत के नागरिक नहीं और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में व्यक्ति को उसके उस देश को प्रत्यर्पित किया जाता है, जहां का वह नागरिक होता है। नियमों के मुताबिक मेहुल की भारतीय नागरिकता उसी क्षण समाप्त हो गई थी, जब वे एंटीगा के नागरिक बने थे।

वकील मेहुल के गर्लफ्रेंड वाली बात को बिल्कुल गलत बताते हैं। उनका सवाल है कि वह गर्लफ्रेंड आखिर गायब कहां हो गई। उनके मुताबिक एंटीगा में जहां मेहुल रहते हैं, कुछ दिन पहले उसी कॉम्प्लेक्स में एक महिला रहने लगी थी। पड़ोसी के नाते थोड़ा-उठना हो ही जाता है। ईवनिंग वॉक पर भी कभी-कभी साथ हो जाता था। थोड़े दिन बाद महिला ने पास में ही एक दूसरा घर ले लिया।  एक दिन उसने मेहुल को बुलाया। मेहुल जैसे ही वहां गए तो ढेर सारे लोग मौजूद थे। इन लोगों ने उन्हें अगवा कर लिया और मारते-पीटते हुए पास के देश डॉमिनिका ले गए। वहां के सागर तट पर कोस्ट गॉर्ड और डॉमिनिका पुलिस पहले से मौजूद थी। जाते ही उनको गिरफ्तार कर लिया गया।

वकील का कहना है कि गर्लफ्रेंड के साथ जाने की बात झूठ है। यह भी झूठ है कि मेहुल अपनी मर्जी से डॉमिनिका गए या डॉमिनिका से आगे कहीं और भागना चाहते थे। सवाल यह है कि जब कोई भागता है तो कम से कम अपना पासपोर्ट तो साथ लेकर चलता है। वह पासपोर्ट आज भी मेहुल के एंटीगा वाले घर में रखा है।

वकील कहते हैं कि यह सब एक ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत हुआ है, जिसमें कई देश लगे हो सकते हैं। वे याद दिलाते हैं कि भारत ने डॉमिनिका और ऐसे ही कुछ छोटे देशों को कोविड की वैक्सीन दी थी। इसे इस तरह भी समझा जा सकता है।

वकील के मुताबिक मेहुल को रास्ते में भी पीटा गया और डॉमिनिका पहुंचने के बाद भी। उन्हें बिजली के झटके तक दिए गए। वे इस आरोप का खंडन करते हैं कि मेहुल ने केस बनाने के लिए खुद को घायल कर लिया। उनका तर्क है कोई भी आदमी जब खुद को चोट पहुंचाता है तो अपने चेहरे पर कभी चोट नहीं करता। वकील कहते हैं कि मेहुल की आंखों में तो खून टपक रहा है।

वकील एक और तर्क देते हैं कि मेहुल को डॉमिनिका या कहीं जाने जरूरत ही नहीं थी। वे तो एंटीगा में बिना किसी परेशानी के थे, जहां उनको नागरिक होने के नाते लीगल प्रोटेक्शन प्राप्त था। जरूरत तो यहां के लोगों को थी कि जबरन लाया जाए। एंटीगा से ला नहीं सकते थे तो यह सब करवाया गया।

अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने डॉमिनिका में मेहुल के वकीलों को कागजात भेज दिए हैं। वे भारत में भगोड़े नहीं हैं क्योंकि इस मामले में कोर्ट ने स्टे दे दिया था। फैसला डॉमिनिका कोर्ट को करना है कि वह उनको बेल दे या एंटीगा भेजे। बहरहाल, उनके भारत भेजे जाने की कोई संभावना नहीं है।

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