राज्यपाल से मिलीं महबूबा मुफ्ती, भाजपा से गठबंधन के दिए संकेत

पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने आज जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने चुनावी जनादेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक ‘अवसर’ बताकर और अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करके ये संकेत दिए कि उनकी पार्टी भाजपा से हाथ मिलाने के खिलाफ नहीं है। वोहरा के साथ […]

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महबूबा मुफ्ती (File Photo)

पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने आज जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने चुनावी जनादेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक ‘अवसर’ बताकर और अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करके ये संकेत दिए कि उनकी पार्टी भाजपा से हाथ मिलाने के खिलाफ नहीं है।

वोहरा के साथ की गई चर्चा की विस्तृत जानकारी दिए बिना महबूबा ने कहा कि राज्यपाल के साथ उनकी भेंट हालिया विधानसभा चुनावों में आए ‘‘निर्णायक लेकिन खंडित जनादेश’’ की पृष्ठभूमि में एक ‘‘अनौपचारिक’’ मुलाकात थी।

सरकार के गठन के मुद्दे से जुड़े सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि ‘‘पीडीपी की प्राथमिकता सरकार गठन के लिए बहुमत जुटाने में जल्दबाजी न करने की है।’’

उन्होंने कहा कि जो भी गठन होता है, उसे जनता के जनादेश का सम्मान करना चाहिए और यह गठन ‘‘मेल मिलाप’’ के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। इसके साथ ही महबूबा ने कहा, ‘‘जब तक इसे (मेल-मिलाप के सिद्धांत) को साथ लेकर नहीं चला जाता, तब तक किसी भी सरकार का गठन बेकार होगा।’’

महबूबा की पार्टी ने राज्य की 87 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटें जीती हैं। उन्होंने कहा कि जनादेश राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए एक ‘‘चुनौती और अवसर’’ (दोनों) है, फिर चाहे वह राजग हो या कांग्रेस।

महबूबा ने कहा, ‘‘राजग सरकार के लिए यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, मोदी के लिए यह एक बड़ी जिम्मेदारी है। नेहरू से लेकर आज तक जम्मू-कश्मीर किसी भी प्रधानमंत्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा है।’’

प्रधानमंत्री मोदी के विकास के ‘‘सपने’’ का संदर्भ देते हुए और बेरोजगारी की समस्या का उल्लेख करते हुए पीडीपी नेता ने कहा कि ‘‘जब तक जमीनी स्तर पर शांति कायम नहीं होती, तब तक विकास नहीं हो सकता।’’

इस संदर्भ में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘यह तब तक संभव नहीं है, जब तक वाजपेयी जी की राजनैतिक प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाता।’’

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए, वाजपेयी ने ‘‘एक राजनैतिक प्रक्रिया शुरू की थी। वाजपेयी जी ने हुर्रियत के साथ बातचीत शुरू की थी, उन्होंने उस समय पाकिस्तान से बातचीत शुरू की थी, जब लालकृष्ण आडवाणी उप प्रधानमंत्री थे। हमें उदार आर्थिक पैकेज मिला। संप्रग ने इसे कुछ समय तक जारी रखा और फिर रोक दिया।’’

पीडीपी प्रमुख ने कहा, ‘‘सवाल भाजपा, नेशनल कॉन्फ्रेंस या कांग्रेस का नहीं बल्कि सवाल पीडीपी के मेल-मिलाप वाले एजेंडे का है। यदि नेतृत्व इस अवसर के अनुरूप चलता है और जनादेश को स्वीकार करता है, तो सरकार का गठन 15 मिनट की बात है।’’

महबूबा ने इस बात पर जोर दिया कि पीडीपी को कश्मीर घाटी में ‘बहुमत’ मिला है जबकि भाजपा को जम्मू क्षेत्र में ‘बहुमत’ मिला है और जनता के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ‘अवसर’ का उपयोग किया जाए, तो जम्मू-कश्मीर एक ‘मॉडल’ बन सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के उस कथन को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह राज्य दुनिया के लिए एक ‘मिसाल’ बन सकता है।

सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने मीडिया में आई उन खबरों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया था कि पीडीपी के पास 55 से ज्यादा विधायकों का समर्थन है।

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