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छोटे भाई को सक्रिय राजनीति में लाना चाहती हैं महबूबा मुफ्ती

जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन में देरी का कारण कुछ हद तक पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को माना जा रहा है। पीडीपी अध्यक्ष की कोशिशें हैं कि सूबे की सत्ता के केंद्र में मुफ्ती परिवार बना रहे।

श्रीनगर | January 25, 2016 2:30 AM
भाई तसद्दुक हुसैन के साथ पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन में देरी का कारण कुछ हद तक पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को माना जा रहा है। पीडीपी अध्यक्ष की कोशिशें हैं कि सूबे की सत्ता के केंद्र में मुफ्ती परिवार बना रहे। हालांकि आधिकारिक तौर पर पीडीपी का कहना है कि वह भाजपा के साथ गठबंधन एजंडे के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रही है। मगर पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद बीते सप्ताह भर में महबूबा की पूरी कोशिश अपने छोटे भाई को सूबे की राजनीति में उतारने की है। पीडीपी अध्यक्ष चाहती हैं कि उनके भाई, चर्चित ‘ओंकारा’ फिल्म के सिनेमाटोग्राफर, तसद्दुक हुसैन अपने कंधों पर पार्टी प्रबंधन की कुछ जिम्मेदारियां लें। दिवंगत मुख्यमंत्री के 44 वर्षीय बेटे पिछले शनिवार पीडीपी के कोर ग्रुप की बैठक उपस्थित हुए थे, जहां महबूबा को राज्य में सरकार गठन के सिलसिले में अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया था।

एक वरिष्ठ पीडीपी नेता ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘जब मुफ्ती साहब जिंदा थे तब वह (तसद्दुक) राजनीतिक चर्चा करने में भी अनिच्छुक थे लेकिन इन दिनों उन्होंने सक्रिय राजनीति से जुड़ने में थोड़ा रुझान दिखाया है।’ जम्मू कश्मीर के कड़े दल-बदल विरोधी कानून के तहत पार्टी अध्यक्ष को प्राप्त शक्तियों को ध्यान में रखते हुए महबूबा अपने करीबी को पार्टी की कमान सौंपना चाहती हैं और तसद्दुक आदर्श पसंद के रूप में उभरे हैं।

2007 में पारित राज्य का दल-बदल विरोधी कानून दल बदलने की इजाजत नहीं देता, दल बदलनेवाले एक तिहाई या उससे अधिक विधायक ही क्यों न हो, जैसा कि राष्ट्रीय कानून में है। पूर्व महाधिवक्ता मोहम्मद इशाक कादरी महसूस करते हैं कि राज्य का दल बदल विरोधी कानून पार्टी अध्यक्ष को काफी शक्तिशाली बनाता है। उन्होंने कहा, ‘जब सदन का सत्र चल रहा हो तो विधायक पार्टी व्हिप का पालन करने के लिए बाध्य हैं अन्यथा उन्हें सदन की अयोग्यता का सामना करना पड़ेगा।’

वैसे तसद्दुक के राजनीतिक अखाड़े में उतरने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन हालात उन्हें राजनीति, कम से कम अपनी पार्टी के अंदर, में सक्रिय होने के लिए बाध्य कर सकते हैं। पीडीपी नेता ने कहा, ‘पीडीपी अध्यक्ष ने केवल अपने पिता और मागर्दशक को बल्कि अपने शक्ति स्तंभ को भी खोया है। राजनीतिक मोर्चे पर उनके मार्गदर्शन के लिए कई समर्थ नेता हैं लेकिन वह उन मामलों पर कुछ सलाह और परामर्श ले सकती हैं, जो पूरी तरह राजनीतिक न हो। ’

हालांकि तसद्दुक ने सईद के निधन के 15 वें दिन महबूबा के निवास पर पीडीपी नेताओं की अनौपचारिक बैठक को संबोधित कर सक्रिय राजनीति में शामिल होने की अटकलों को हवा दी थी। बैठक में मौजूद रहे एक पीडीपी विधायक ने कहा, ‘उन्होंने राजनीति की बात नहीं की। उनका भाषण पर्यावरण और उसके संरक्षण पर केंद्रित था।’

इन विधायक ने कहा कि यदि राज्य में कोई सरकार होगी तो वह पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार होगी, क्योंकि कोई समय से पहले चुनाव नहीं चाहता। कुछ मुद्दे हैं जिनका आगामी दिनों में हल हो जाएगा।

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