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बीफ बैन पर बीजेपी को अपनों से मिली चुनौती, नेताओं ने कहा- पशु वध से जुड़े कानून को नहीं लिया वापस तो दे देंगे पार्टी से इस्तीफा

मेघालय भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जॉन एंटोनियस लिंगदोह ने कहा कि पार्टी के अधिकतर नेता नए नियम से खुश नहीं है, क्योंकि यह लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा।

Author May 30, 2017 9:59 PM
केंद्र सरकार ने पशु बाजार में बूचड़खानों के लिए जानवरों को खरीदने और बेचने पर रोक लगा दी है, जिसके बाद केरल में इसका विरोध शुरू हो गया था। (File Photo)

मेघालय में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने मंगलवार को केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि पशुओं की खरीद-फरोख्त पर नए नियम वापस नहीं लिए गए तो वे पार्टी से इस्तीफा दे देंगे। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जॉन एंटोनियस लिंगदोह ने आईएएनएस से कहा, “मेघालय में पार्टी के अधिकतर नेता नए नियम से खुश नहीं है, क्योंकि यह लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा।”लिंगदोह ने कहा कि पार्टी सदस्यों ने मामले पर सोमवार को गहन विचार-विमर्श किया।पूर्व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लिंगदोह ने कहा, “हम पशुओं की खरीद-फरोख्त और उनके वध को लेकर जारी किए गए नए आदेश को स्वीकार नहीं कर सकते। हम अपनी खाने-पीने की आदतों के खिलाफ नहीं जा सकते और न ही पशु खरीद-फरोख्त और पशु वध के कारोबार से जुड़े लोगों के आर्थिक हितों को अधर में डाल सकते है।”

उन्होंने कहा, “पार्टी प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार करना बेहद मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि मतदाता ऐसी पार्टी का समर्थन नहीं करेंगे, जो जनहित के खिलाफ हो।”प्रदेश पार्टी अध्यक्ष शिबुन लिंगदोह ने हालांकि उपाध्यक्ष की चेतावनी खारिज कर दी है।उन्होंने कहा, “मैं नए नियम पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि यह एक कानूनी मामला है। जो पार्टी छोड़कर जाना चाहते हैं, जा सकते हैं।” सोमवार को भाजपा नेता बर्नार्ड मरक ने कहा था कि उनकी पार्टी गोमांस पर प्रतिबंध नहीं लगाएगी, बल्कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है तो बूचड़खानों को कानून-व्यवस्था के अनुरूप बनाएगी। मरक ने कहा था, “मेघालय में अधिकतर भाजपा नेता गोमांस खाते हैं। मेघालय जैसे राज्य में गोमांस पर प्रतिबंध लगाने का सवाल ही नहीं उठता।”

बता दें कि केन्द्र सरकार ने गौमांस पर रोक लगाने के लिए बाजार से गौवध के लिए गाय खरीदने पर रोक लगा दी है। इस नये नियम के दायरे में गाय के अलावे गोवंश के दूसरे पशु भी हैं। लेकिन सीपीएम, टीएमसी, जेडीयू, कांग्रेस समेत कई दलों ने केन्द्र सरकार के इस नये नियम का विरोध किया है। हालांकि मंगलवार (30 मई) को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने केन्द्र की इस अधिसूचना पर लोक लगा दी है और केन्द्र सरकार से इस मुद्दे पर 4 हफ़्तों में जवाब मांगा है।

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