मेघालय: पशु बैन पर नये कानून से नाराज 5 हजार बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ी - Meghalaya: 5 Thousand BJP workers quit party over new government rule on sale of animal for slaughters - Jansatta
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मेघालय: पशु बैन पर नये कानून से नाराज 5 हजार बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ी

मेघालय में बीजेपी के दो वरिष्ठ नेता बाचू मराक और बर्नाड मराक ने भी इसी मुद्दे पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में जड़ें जमाने की कोशिश कर रही बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है। उत्तर पूर्व के मेघालय में 5 हजार बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी के ये कार्यकर्ता वध के लिए जानवरों की खरीद पर रोक लगाये जाने से बेहद नाराज थे। इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे अपनी संस्कृति और स्थानीय लोगों की भावनाओं से किसी किस्म की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। मेघालय में बीजेपी के दो वरिष्ठ नेता बाचू मराक और बर्नाड मराक ने भी इसी मुद्दे पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। टूरा जिले के बीजेपी यूथ विंग के अध्यक्ष विल्वर ग्रेहम डैंगो ने कहा कि ये एनडीए सरकार की उन कोशिशों का विरोध है जिनके तहत ये सरकार आदिवासी और दूसरे कई समूहों को दबाने की कोशिश कर रही है जो गोमांस खाते हैं। विल्वर ग्रेहम डैंगो भी केन्द्र के फैसले के विरोध में पार्टी छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि पांच बीजेपी मंडलों का विलय कर दिया गया है और 5 हजार से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया है। डैंगो कहते हैं कि हम अपने ही लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते हैं, ये लोग हम पर विश्वास करते हैं। डैंगो के मुताबिक बीजेपी धर्म और राजनीति का घालमेल कर रही है, लेकिन हम ऐसा होते हुए नहीं देख सकते हैं।

पिछली 28 मई को केन्द्र की बीजेपी सरकार ने वध के लिए पशु मंडियों से जानवरों की खरीद और बिक्री पर रोक लगा दी है। इस बावत केन्द्र ने अधिसूचना जारी की है, हालांकि मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने केन्द्र के इस फैसले पर रोक लगा दी थी। लेकिन केन्द्र अपने रुख पर कायम है और इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। केन्द्र के इस फैसले का उत्तर पूर्व, तमिलनाडू, चेन्नई, पश्चिम बंगाल में विरोध हो रहा है।

मेघालय के बीजेपी नेताओं ने कहा कि कोई भी पार्टी या शख्स जो हमारे लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचाएगा वो हमारे खिलाफ है, हमलोग अपने आदिवासी जमीन और हितों की रक्षा करेंगे। अभी कई दूसरे पार्टी नेताओं ने भी बीजेपी की इस नीति का विरोध किया है और इस कानून को निरस्त ना किये जाने की स्थिति में पार्टी छोड़ने की धमकी दी है।

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