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ट्रेन में फर्श पर सोने को मजबूर दिव्यांग एथलीट की मांग- मेरे मामले की जांच नहीं, हर किसी के लिए स्थायी समाधान चाहिए

व्हीलचेयर पर बैठने वाली 34 साल की एथलीट नागपुर-निजामुद्दीन गरीब रथ एक्सप्रेस में सफर कर रही थी।

34 साल की एथलीट को मजबूरन फ्लोर पर सोना पड़ा (Photo: ANI)

पदक विजेता पैरा-एथलीट स्वर्ण राज को ट्रेन में मजबूरन फ्लोर पर सोने की घटना के एक दिन बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। व्हीलचेयर पर बैठने वाली 34 साल की एथलीट नागपुर-निजामुद्दीन गरीब रथ एक्सप्रेस में सफर कर रही थी। स्वर्ण राज के मुताबिक, उन्हें ट्रेन में अपर बर्थ दी गई थी। काफी कोशिश के बाद भी लोअर बर्थ ना मिल पाने के कारण उन्हें फ्लोर पर सोना पड़ा। स्वर्ण राज ने एएनआई को बताया, “मुझे ये समझ नहीं आया कि जब मैं अपर बर्थ पर नहीं चढ़ सकती तो मुझे विकलांग कोटे की सीट में अपर बर्थ क्यों दिया गया। नीचे बैठे यात्रियों से टीटी और मैने रिक्वेस्ट की लेकिन उन्होंने सीट नहीं बदली। आखिरकार हमें फ्लोर पर सोना पड़ा।”

एथलीट ने यह भी बताया कि रेलवे ने कंबल भी ऐसा दिया जिसपर किसी ने उल्टी की हुई थी। उन्होंने कहा, “रेलवे में सिर्फ एक दिक्कत नहीं है। हम ऑनलाइन बुकिंग करें तब दिक्कत होती है, विंडो बुकिंग करें तब हमें दिक्कत। उसके अलावा विकलांग कोच कभी आगे दे दिया जाता है कभी बिलकुल पीछे दे दिया जाता है।” एथलीट ने कहा कि वो रेलमंत्री सुरेश प्रभु से मिलना चाहती हैं और रेलवे में ऑनलाइन से लेकर वॉशरुम तक जितनी भी कमिया हैं वो बताना चाहती हैं।

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने एएनआई के ट्वीट के रिप्लाई में मामले में जांच के आदेश दिए हैं। सुरेश प्रभु ने लिखा, “Have ordered enquiry in the issue.We are serious about ensuring smooth travel for Divyangs” (मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। हम दिव्यांगों को सुविधाजनक सफर देने के प्रति गंभीर हैं।) हालांकि इससे जवाब में रेलमंत्री से एथलीट ने कहा, “मुझे मामले की जांच नहीं चाहिए। मुझे सभी दिव्यांगों के लिए स्थायी समाधान चाहिए।”

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