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विदेश मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग के जवाब से बचने के लिए एक साल में वकीलों पर खर्च किये 1.83 लाख रूपये

विदेश मंत्रालय ने साल 2015-16 में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में जानकारी देने से इनकार की स्थिति के बचाव के लिये वकीलों पर 1.83 लाख रूपये खर्च किये।

(Express Photo)

विदेश मंत्रालय ने साल 2015-16 में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में जानकारी देने से इनकार की स्थिति के बचाव के लिये वकीलों पर 1.83 लाख रूपये खर्च किये। अधिकतर मामलों में, आयोग में विरोधी पक्ष आम लोग होते हैं जिन्होंने आरटीआई आवेदन दिया होता है लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं सका। सेवानिवृत्त कामोडोर लोकेश बत्रा द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में बताया गया कि साल 2016-17 में विदेश मंत्रालय के आरटीआई प्रकोष्ठ द्वार 31 मार्च तक वकीलों पर 61,200 रूपये खर्च किये गये। साल 2015-16 में यह आंकड़ा 1.83 लाख रूपये से ज्यादा था।

मंत्रालय ने वकीलों को व्यक्तिगत रूप से किये गये भुगतान का विवरण देने से इनकार करते हुये कहा कि उसे आरटीआई अधिनियम की ‘व्यक्तिगत सूचना’ के उपनियम से छूट हासिल है। बत्रा को दिये गये अपने आरटीआई जवाब में मंत्रालय ने कहा कि वह वकीलों का चयन अपने पैनम में से करता है।

बता दें हाल ही खबर आई थी, जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने कहा था कि दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को दो महीने के अंदर जनता को भ्रष्टाचार की शिकायतों के निवारण के संदर्भ में अपने अधिकारों, क्षेत्राधिकार और प्रक्रिया को स्पष्ट करना चाहिए क्योंकि वर्तमान अस्पष्टता लोगों को भ्रष्टाचार से लड़ने में हतोत्साहित करेगी। आरटीआइ कार्यकर्ता विवेक गर्ग के मामले की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने कहा कि दिल्ली सरकार और केंद्र के अधिकारों की सीमा के संबंध में अस्पष्टता व भ्रम के मद्देनजर वाकई में स्पष्टता की जरूरत है क्योंकि वैसे भी दोनों इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई में उलझे हैं।

गर्ग ने दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की शक्तियों के बारे में जानना चाहा है। आचार्युलू ने कहा कि जब जीएनसीटीडी और केंद्र भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के अपने अधिकार की सीमा या दायरे के बारे में जानने के न्याययापालिका के सामने खडेÞ हैं तब वकील-आवेदक आरटीआइ के तहत दस रुपए देकर आवेदन के माध्यम से पीआइओ या जन प्राधिकार प्रमुख से व्याख्या या फैसले के रूप में सूचना की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर उनके तीन आवेदनों में उठाए गए सवालों पर गौर करने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि दिल्ली के लोगों के दिमाग में इन सवाालों को लेकर ढेरों भ्रम हैं और गर्ग खुद एक वकील हैं और वे इस मुद्दे से अच्छी तरह वाकिफ हैं।

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