BRICS Meeting: ब्रिक्स के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की दिल्ली में आयोजित एक बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की राजनयिक गतिविधियों में तेजी आने की बात कही। इसके अलावा भारतीय विदेश मंत्री ने एकतरफा प्रतिबंध लगाने की और अनुचित उपायों के जरिए संवाद को आगे बढ़ाने की नीतियों की आलोचना की। इस बयान के जरिए वे सांकेतिक तौर पर अमेरिका को निशाना बना रहे थे।
दरअसल, भारतीय आयात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापक शुल्क 25 प्रतिशत और फिर रूसी तेल के लिए अतिरिक्त टैरिफ के चलते भारत पर ट्रेड डील करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। विदेश मंत्री ने ब्रिक्स की बैठक में इस मुद्दे को उठाया और बताया कि कैसे इस वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर पड़ रहे दबाव भी पड़ रहा है।
दबाव वाली कूटनीति का किया विरोध
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के साथ असंगत ऐसे एकतरफा जबरदस्ती के उपायों और प्रतिबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन कदमों का विकासशील देशों पर असमान रूप से प्रभाव पड़ता है और उन्होंने जोर देकर कहा कि ये अनुचित उपाय संवाद का विकल्प नहीं बन सकते, न ही दबाव वाली कूटनीति की जगह ले सकता है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था वर्तमान में सशस्त्र संघर्षों, जलवायु परिवर्तन और महामारी के दीर्घकालिक प्रभावों के बोझ तले दब रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं ब्रिक्स समूह को एक आवश्यक स्थिरकारी शक्ति के रूप में देख रही हैं। उनके मुताबिक, शांति और सुरक्षा वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में बनी हुई है, और हाल की शत्रुता ने राजनयिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को और भी तीव्र कर दिया है।
विभिन्न संकटों का किया उल्लेख
वैश्विक भावना का जिक्र करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि उभरते बाजारों और विकासशील देशों से यह उम्मीद बढ़ रही है कि ब्रिक्स एक रचनात्मक और स्थिर भूमिका निभाएगा। मंत्री ने चेतावनी दी कि क्षेत्रीय अस्थिरता की लहरें बहुत दूर तक फैलती हैं। ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर संकट भी खड़े होते हैं।
इन दबावों का सबसे अधिक प्रभाव उभरते बाजारों में देखा जा रहा है, जहां आर्थिक स्थिरता अक्सर कमजोर होती है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने होर्मुज जलमार्ग और लाल सागर जैसी महत्वपूर्ण धमनियों के माध्यम से “बाधारहित और सुरक्षित समुद्री प्रवाह” की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिए अपरिहार्य हैं।
मानवीय परिदृश्य को संबोधित करते हुए जयशंकर ने फिलिस्तीनी मुद्दे के लिए दो-राज्य समाधान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और गाजा पट्टी में निरंतर युद्धविराम और निर्बाध सहायता पहुंच का आह्वान किया।
पश्चिम एशिया में भारत का ‘मिशन एनर्जी’, जानिए युद्धविराम के बीच जयशंकर और हरदीप पुरी का मास्टरप्लान
पाकिस्तान इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। दिल्ली ने होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने के मुद्दे पर क्षेत्र के प्रमुख भागीदारों ओमान से लेकर यूएई और सऊदी अरब से लेकर कतर तक सभी से संपर्क करना शुरू कर दिया है। पढ़िए पूरी खबर…
