विदेश मंत्रालय ने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल के अमेरिका जाने की बात खारिज कर दिया है। साथ ही ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को निराधार बता दिया है।

एक दिन पहले ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत-अमेरिका तनाव के बीच सितंबर 2025 में अजित डोभाल अमेरिका गए थे और वहां अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस रिपोर्ट को निराधार बताया। विदेश सचिव रणधीर जयसवाल ने एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, “ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट का कोई आधार नहीं है। ऐसी कोई बैठक या यात्रा नहीं हुई है।” दरअसल उनसे प्रेस ब्रीफ्रिंग के दौरान एक पत्रकार ने रिपोर्ट को लेकर सवाल किया था, जिस पर विदेश मंत्रालय ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में क्या किया गया दावा?

ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि 2025 के सितंबर महीने में भारत के एनएए अजित डोभाल और मार्को रुबियो के बीच एक गुप्त मीटिंग हुई, जिसमें भारत ने कड़ा रूख अपनाया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, अजित डोभाल ने कहा कि भारत सरकार अमेरिकी के दबाव में नहीं आएगा, अगर उसे ट्रेड डील समझौते के लिए ट्रंप के कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करना पड़े तो वह कर लेगा। साथ ही यह भी दावा किया गया था कि भारत चाहता है कि ट्रंप और उनके सहयोगी भारत की सार्वजनिक आलोचना करना कम करें, इससे दोनों देशों के संबंध फिर से पटरी पर लौट सकें।

ट्रंप ने किया था ये दावा

यह दावा ऐसे समय में आया था जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत के साथ एक ट्रेड डील समझौते की घोषणा की और रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल के जरिए यह घोषणा की थी।

ट्रंप ने यह भी पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करना उनके लिए सम्मान की बात थी, वे उनके सबसे अच्छे दोस्त हैं और अपने देश के शक्तिशाली और सम्मानित नेता है। हमने ट्रेड डील, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने समेत कई जरूरी मुद्दों पर चर्चा की, वे रूस से तेल खरीदने बंद करेंगे और अमेरिका और संभवत: वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर भी सहमत हुए हैं। आगे पढ़िए ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अजित डोभाल और मार्को रुबियो की सीक्रेट मीटिंग क्या किया था दावा