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MCD Elections 2017: मनोज तिवारी ने कहा- केजरीवाल के हाउस टैक्स माफी वाले एलान पर कार्रवाई करे चुनाव आयोग

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के गृहकर माफी वाले बयान पर दिल्ली चुनाव आयोग से स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है।

Author नई दिल्ली | March 28, 2017 11:30 AM
दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के गृहकर माफी वाले बयान पर दिल्ली चुनाव आयोग से स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है।

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के गृहकर माफी वाले बयान पर दिल्ली चुनाव आयोग से स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग की है। केजरीवाल ने शनिवार को घोषणा की थी कि अगर आम आदमी पार्टी (आप) नगर निगम की सत्ता में आती है तो वह सभी रिहायशी संपत्तियों को गृहकर के दायरे से बाहर कर देगी और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी नियमित कर देगी। एक संवाददाता सम्मेलन में मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनकी सरकार एवं पार्टी झूठों का समूह है, जिन्होंने लोगों को अपने झूठों से गुमराह करने की कला में निपुणता हासिल कर ली है। उनकी शनिवार को नगर निगम से जुड़ों मुद्दों पर की गई घोषणा इसी खेल का भाग है। तिवारी ने दिल्ली सरकार के तीनों नगर निगमों के आयुक्तों को भेजे दो पत्रों की प्रति जारी की जिसमें केजरीवाल सरकार ने म्युनिसिपल वैल्युएशन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर बढ़ा हुआ गृहकर वसूले करने और दिल्ली की सभी संपत्तियों से पूरा कर वसूलने का निर्देश दिया था।

केजरीवाल सरकार ने अपने पत्रों में गृहकर वृद्धि के साथ ही नगर निगमों को अस्थायी सफाई एवं अन्य कर्मियों को हटाने की चेतावनी भी दी है। तिवारी ने कहा कि दिल्ली की जनता को अब केजरीवाल के शब्दों पर विश्वास नहीं है क्योंकि उन्होंने 2015 के चुनाव से पहले उनके वादों का हश्र देख लिया है। बस मार्शल, सस्ते बस टिकट, महिला सुरक्षा आदि वादे भुला दिए गए हैं। दिल्ली की जनता केजरीवाल के झूठे से गुमराह होने का नतीजा आज भुगत रही है। उन्होंने दिल्ली की जनता से पानी मुफ्त करने का वादा किया था, लोगों को उसका लाभ तो नहीं मिला पर पानी के बिलों में एक नया सर्विस चार्ज जुड़ गया। इसी तरह केजरीवाल ने चुनाव पूर्व बिजली दरों में 50 फीसद की कटौती का वादा किया था पर चुनाव के बाद जो सब्सिडी लाभ सभी उपभोक्ताओं को पहले से मिलता था, उसे वापस ले लिया और अब उपभोक्ताओं के एक छोटे से भाग को मात्र 200 यूनिट तक की खपत पर सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।

तिवारी ने कहा कि केजरीवाल की शनिवार के संवाददाता सम्मेलन से यह स्पष्ट होता है कि उन्हें मालूम है कि निगम कर्मचारियों को वेतन समय पर नहीं मिलता है। इसके बावजूद दो सालों से वह लगातार निगमों को आर्थिक संसाधन देने में विलम्ब करते रहे जिसके चलते कर्मचारियों के वेतन भुगतान में असमान्य देरी हुई। केजरीवाल आज चुनाव की संध्या पर गृहकर से रिहायशी संपत्तियों को छूट देने की जो बात कर रहे हैं, उसे तो पूर्वी एवं उत्तरी नगर निगम पहले ही सोच चुके हैं। इस संदर्भ में दोनों निगमों के सदन में छोटी संपत्तियों को लाभ देने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। आज केजरीवाल गृहकर की बकाया राशि को माफ करने की बात कर रहे हैं पर गत वर्ष उन्होंने नगर निगमों को ऐसे कोई छूट देने के विरुद्ध चेतावनी दी थी। केजरीवाल सरकार ने चौथे वेतन आयोग कि सिफारिशों के अनुसार नगर निगमों के आर्थिक संसाधन देने में जो कोताही की है, उसके चलते नगर निगमों के सामने कर्मचारियों के वेतन भुगतान में विलम्ब, कर्मचारी नियमितिकरण में रुकावट और समाज कल्याण दायित्वों की पूर्ति में बाधा जैसी समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।

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