सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। वहीं केंद्र और राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम केवल संवैधानिकता और वैधता के आधार पर इसकी जांच कर रहे हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बसपा सुप्रीमो मायावती ने समर्थन किया है। मायावती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित है।
मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
मायावती ने X पर एक पोस्ट में कहा, “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किए गए है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित है। जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।”
सुप्रीम कोर्ट ने रोक कई याचिकाओं के बाद लगाई गई, जिनमें कहा गया था कि कमीशन ने जाति-आधारित भेदभाव की एक गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर रखा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और UGC को नोटिस जारी किए। नए रेगुलेशन, जिनमें सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को भेदभाव की शिकायतों को देखने और समानता को बढ़ावा देने के लिए ‘इक्विटी कमेटियां’ बनाने का आदेश दिया गया था, वह 13 जनवरी को नोटिफाई किए गए थे।
यूजीसी के नए नियमों को लेकर गुरुवार को लखनऊ में कई छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने यूजीसी से आग्रह किया कि वह नियमों की समीक्षा करें और इसमें से भेदभाव वाले हिस्से को हटाएं।
पहले मायावती ने क्या कहा था?
वहीं UGC के नए रेगुलेशन को लेकर मायावती ने 28 जनवरी को कहा था, “देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है। पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिए। साथ ही ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी कतई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आए दिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।” पढ़ें UGC क्या है और इसके नए रेगुलेशन को लेकर क्यों मचा है विवाद?
