Mayawati on Election Commission: चुनाव आयोग को लेकर हाल में सामने आई इंडियन एक्सप्रेस की इनवेंस्टिगेशन रिपोर्ट के बीच बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती ने अहम टिप्पणी की है। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मायावती ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की नगीना सुरक्षित लोकसभा सीट पर बीजेपी ने ईवीएम में धांधली की साजिश रचकर आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी को जिताने में मदद की। बसपा प्रमुख के अनुसार, यह पूरा कदम बसपा के कैडर वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने और दलित राजनीति को कमजोर करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
वोट की पारदर्शिता पर सवाल
मायावती ने अपने वक्तव्य में कहा, “किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहली शर्त यह है कि मतदाता के मन में अपने वोट को लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए। यदि किसी नागरिक को यह लगता है कि उसका वोट उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य उम्मीदवार के खाते में जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या के समान है। देश में लगभग पांच दशकों तक बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए चुनाव कराए जाते थे, जिससे जनता को अपनी वोटिंग प्रक्रिया पर पूरा भरोसा था, लेकिन बाद में चुनाव आयोग ने इसकी जगह ईवीएम प्रणाली लागू कर दी।”
ईवीएम का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा, “जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी ने ही ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। उस समय BJP का कहना था कि कांग्रेस मशीनों का दुरुपयोग कर चुनाव जीत रही है। हालांकि, केंद्र की सत्ता में आने के बाद भाजपा ने इस व्यवस्था को बदलने के बजाय ईवीएम से ही वोटिंग और काउंटिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जारी रखा, जो कि विरोधाभासी है।”
नगीना सीट का उदाहरण, चंद्रशेखर पर हमला
नगीना सीट के चुनाव नतीजों का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि स्थानीय जनता के अनुसार वहां जीतने वाले सांसद का क्षेत्र में कोई वास्तविक जनाधार नहीं था। इसके बावजूद बसपा के वोट बैंक को काटने और पार्टी को नुकसान पहुंचाने की योजना के तहत साजिश रचकर उन्हें जीत दिलाई गई। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद अब ये नेता सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहे हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर राजनीति चमका रहे हैं।
मायावती ने आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का नाम लिए बिना उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब भी कहीं दलितों पर अत्याचार या अन्याय की खबर आती है, तो ये नेता पीड़ितों को वास्तविक न्याय दिलाने के लिए प्रशासन से गंभीर वार्ता करने के बजाय वहां धरना-प्रदर्शन शुरू कर देते हैं। इस तरह की राजनीति से जमीनी स्तर पर कोई ठोस समाधान निकलने के बजाय स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है।
दलित युवाओं को दी सावधान रहने की सलाह
बसपा सुप्रीमो ने विशेष रूप से दलित समाज के युवाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदर्शनों के दौरान युवाओं को आगे कर दिया जाता है, जिससे पुलिस उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में आपराधिक मामले दर्ज कर लेती है। एक बार मामला दर्ज हो जाने के बाद ये युवा वर्षों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने को मजबूर हो जाते हैं। कानूनी मुकदमों में फंसने के कारण उन्हें सरकारी नौकरियों के अवसरों से हाथ धोना पड़ता है और उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
उन्होंने दलित समाज से आह्वान किया कि वे इस तरह के छलावे और रणनीतियों से पूरी तरह सावधान रहें। मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा हमेशा से शोषितों, गरीबों, अशिक्षितों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती आई है। जब इन वर्गों को लगता है कि ईवीएम में हेरफेर के कारण उनका वोट सही जगह नहीं पहुंच रहा है, तो वे पूरी लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया से ही हतोत्साहित होने लगते हैं।
VVPAT और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर क्या कहा?
ईवीएम की कानूनी और तकनीकी खामियों पर बात करते हुए मायावती ने बताया कि जब उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बसपा ने इस व्यवस्था को देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में चुनौती दी थी। अदालत ने ईवीएम को बंद करने के बजाय इसके साथ वीवीपीएटी (VVPAT) मशीन लगाने का निर्देश दिया। हालांकि, मायावती के अनुसार, वीवीपीएटी की शुरुआत भी पूरी तरह निष्प्रभावी साबित हुई क्योंकि गिनती के समय सभी वीवीपीएटी पर्चियों का ईवीएम के वोटों के साथ शत-प्रतिशत मिलान नहीं किया जाता है।
मायावती ने अंत में तकनीकी पहलू पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया भर में यह तथ्य सर्वविदित है कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को रिमोटली हैक या रिग किया जा सकता है। ऐसे में जब तक पारदर्शी तरीके से मतदान और शत-प्रतिशत पर्चियों की सही गिनती सुनिश्चित नहीं होती, तब तक किसी भी मतदाता को यह गारंटी नहीं दी जा सकती कि उसका वोट उसी उम्मीदवार को मिला है जिसे उसने चुना था।
बहुजन वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले मायावती का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है। हालिया लोकसभा चुनावों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आजाद समाज पार्टी के बढ़ते प्रभाव और नगीना सीट पर मिली जीत के बाद बसपा अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को बिखरने से बचाने की कोशिश में जुटी है। मायावती का यह आक्रामक रुख न केवल ईवीएम पर राष्ट्रीय बहस को हवा देता है, बल्कि बहुजन समाज के युवाओं को संदेश देकर पार्टी के कैडर को पुनः एकजुट करने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
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