Baramati Plane Crash News: महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार को वीएसआर वेंचर्स का लेयरजेट 45 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई। इसमें कैप्टन सुमित कपूर और फर्स्ट ऑफिसर शम्भावी पाठक भी शामिल थी। 20 किलोमीटर की दूरी पर बसे दो परिवार गुरुवार को पूरी तरह से टूट गए। सुमित कपूर और शम्भावी पाठक को उनका परिवार और दोस्त अंतिम विदाई देने के लिए इकट्ठा हुए।

सुमित कपूर के 20 साल के करियर में 20000 से ज्यादा फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। वहीं पाठक के पास 1500 घंटे का एक्सपीरियंस था। पंजाबी बाग के श्मशान घाट में कपूर के अंतिम संस्कार के लिए सौ से ज्यादा शुभचिंतक, रिश्तेदार और दोस्त इकट्ठा हुए। उनके परिवार में उनके पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। मौजूद लोगों में उनके बचपन के दोस्त नरेश तनेजा और जीएस ग्रोवर भी शामिल थे, जिन्होंने कपूर के बारामती जाने से पहले उनसे हुई आखिरी बातचीत को याद किया।

तनेजा और कपूर के बीच हंसी-मजाक से भरी छोटी-सी टेक्स्ट मैसेज की बातचीत हुई। उन्होंने कहा, “यह उन बातचीत में से एक थी, आप जानते हैं, बस मजाक-मस्ती फिर मैंने खबर देखी और तुरंत उनके परिवार को फोन किया क्योंकि उन्होंने मुझे बताया था कि वह बारामती जा रहे हैं। उन्हें अभी-अभी खबर मिली थी। उस समय आप उन्हें क्या बताते?” तनेजा ने कहा, “हम पड़ोसी के रूप में बड़े हुए हैं। हमारी दोस्ती 50 साल से भी ज्यादा पुरानी है।”

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ग्रोवर ने बताया कि खबर मिलने के बाद से उन्हें नींद नहीं आई है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मैंने उनसे आखिरी बार दो-तीन दिन पहले बात की थी। उन्होंने मेरी तरफ देखकर कहा कि मेरा वजन बढ़ गया है। वे बहुत ही खुशमिजाज इंसान थे। जब भी वे हमें देखते, हमें चाय पीने के लिए बुला लेते थे।” कपूर के सहकर्मियों ने बताया कि शुरुआत में बारामती फ्लाइट के लिए उन्हें पायलट के रूप में नियुक्त नहीं किया गया था। वीएसआर एविएशन के उनके सहकर्मी कैप्टन मलिक ने कहा, “चार्टर्ड उड़ानें ऐसी ही होती हैं। जब कोई पायलट स्टैंडबाय पर होता है, तो उसे किसी भी समय बुलावा आ सकता है। आखिरी समय में ड्यूटी रोस्टर में बदलाव होना न तो कोई नई बात है और न ही आश्चर्यजनक।”

सुमित बेहद हंसमुख थे- पूर्व सहकर्मी

एक पूर्व सहकर्मी ने कहा कि कपूर उद्योग जगत के सर्वश्रेष्ठ लोगों में से एक थे। उन्होंने कहा, “सुमित बेहद हंसमुख थे, हमेशा मजाक करने के लिए तैयार रहते थे और शम्भावी। वह तो बिल्कुल नन्ही बच्ची थीं। मैं उनके पिता को भी जानता था। वह मेरी बेटी से ज्यादा बड़ी नहीं थीं। मैं उनसे मजाक करता था और पूछता था कि उनकी शादी की शहनाई कब बजेगी।”

उन्होंने आगे बताया कि पाठक को एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस मिलने में बस कुछ ही महीने बाकी थे, जिससे वह कमर्शियस एयर ट्रांसपोर्ट की कप्तान बनने के योग्य हो जातीं। उन्होंने कहा, “उनकी सारी कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी थी। मुझे पूरा यकीन है कि उन्हें लाइसेंस मिल जाता। वह बहुत होशियार थीं।”

वह पिता के नक्शेकदम पर चलना चाहती थी- शांभवी की दोस्त

लोधी गार्डन श्मशान घाट पर, वायुसेना के सदस्यों, पाठक के स्कूल के जूनियर, दोस्तों और परिवार के सदस्यों ने उनके अंतिम संस्कार में भाग लिया। स्कूल में उसकी एक जूनियर ने कहा, “वह बहुत ही हंसमुख थी।” स्कूल की एक बचपन की दोस्त ने कहा, “वह सबसे खुशमिजाज इंसान थी जिसे आप जानते होंगे। वह हमेशा पायलट बनना चाहती थी। उसके पिता वायु सेना में थे, इसलिए यह स्वाभाविक था कि वह उनके नक्शेकदम पर चलना चाहती थी।”

परिजनों ने बताया कि वायु सेना बाल भारती स्कूल में शिक्षिका पाठक की मां का शोक थम सा गया है। उनके पिता, जो एक रिटायर्ड पायलट हैं और दुर्घटना की खबर मिलते ही पुणे पहुंचे थे, अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली लौट आए हैं। पंजाबी बाग में वापस आकर, कपूर के छोटे भाई वरुण ने कुछ शब्द कहे। उन्होंने कहा, “मैं बस इतना ही कहूंगा कि मैं अगले जन्म में भी उनसे भाई के रूप में मिलना चाहता हूं।”

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