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मानसून सत्र में फिर हो सकती है टीम मोदी की हार? विपक्षी एका के लिए कांग्रेस कुर्बानी को तैयार

उम्मीद है कि एनडीए से अलग हुए चंद्रबाबू नायडू बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ टीएमसी उम्मीदवार को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, तमिलनाडु की सत्ताधारी एआईएडीएमके बीजेपी का साथ देगी। एनडीए पहले की अपेक्षा और कमजोर हुआ है।

कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचा विपक्ष (फोटो सोर्स- पीटीआई)

विपक्षी एकता के बैनर तले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को परास्त करने के लिए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस कोई भी कुर्बानी देने को तैयार है। माना जा रहा है कि कर्नाटक और कैराना में बीजेपी को पटखनी देने के बाद कांग्रेस संसद के मानसून सत्र में फिर से बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी दलों से बातचीत कर रही है। इस बार मामला राज्य सभा के उप सभापति पद का है। मौजूदा उप सभापति पी जे कूरियन का कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है। लिहाजा, नए उप सभापति का चुनाव मानसून सत्र में तय माना जा रहा है।

इस पद के लिए बीजेपी भी जोर आजमाइश करेगी। हालांकि, राज्यसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है लेकिन एनडीए में बिखराव की वजह से सदन में उसके पास अब बहुमत नहीं रहा। इसलिए कांग्रेस इस पद की कुर्बानी देकर किसी भी क्षेत्रीय दल के उम्मीदवार को जिताना चाहेगी। माना जा रहा है कि टीएमसी को साधने के लिए कांग्रेस यह पद उसे ऑफर कर सकती है। इस सियासी खेल में दो बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां ओडिशा की बीजू जनता दल और आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी अहम रोल निभा सकती है। कांग्रेस खेमे की तरफ से लामबंदी करने की जिम्मेदारी टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि दीदी ने बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक से इस बारे में बात की है।

उधर, उम्मीद है कि एनडीए से अलग हुए चंद्रबाबू नायडू बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ टीएमसी उम्मीदवार को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, तमिलनाडु की सत्ताधारी एआईएडीएमके बीजेपी का साथ देगी। एनडीए पहले की अपेक्षा और कमजोर हुआ है। उसकी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी शिवसेना भी अब उसका विरोध करेगी। ममता बनर्जी के नाम पर शरद पवार की एनसीपी भी साथ हो सकती है। बता दें कि इस वक्त राज्य सभा में कुल सांसदों की संख्या 246 है। इनमें से बीजेपी के 69 सांसद हैं जबकि एआईएडीएमके के कुल 13 सांसद हैं। इनके अलावा सहयोगी जेडीयू के 6, पीडीपी के 2 सांसद हैं। बीजेपी से संबंध रखने वाले चार सांसद नामांकित सदस्य हैं। यानी चाहकर भी बीजेपी महुमत का जुगाड़ नहीं कर पाएगी, जब तक कि टीडीपी या बीजेडी को निष्क्रिय या अपने पाले में न कर ले। सदन में बीजेडी के 9 और टीडीपी के 6 सांसद हैं।

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