कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से जुड़े वंदे मातरम विवाद को लेकर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सोनिया जी ने जो किया वह वंदे मातरम का अपमान नहीं था और बीजेपी कैसे इसे अपमान की श्रेणी में रख सकती है और अगर रख रही है तो इस बात को साबित करे कि यह अपमान है।

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा है कि मैं इसे अपमान नहीं मानता कि कोई वंदे मातरम गाते हुए चला जाए या फिर कोई हरकत कर दे ये अपमान की श्रेणी में नहीं हो सकता। साजिद रशीदी ने इस दौरान कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर ही राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भी अब हिंदू तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।

‘कांग्रेस को अगर मुसलमान का वोट चाहिए तो…’

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि बीजेपी ने अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए वंदे मातरम की 6 पंक्तियों को जोड़ दिया है और कांग्रेस ने भी अपने 1937 के प्रस्ताव के आधार पर ही इसे मानने से इनकार किया है तो वह भी वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। साजिद रशीदी ने आगे कहा कि कांग्रेस को अगर मुसलमान का वोट चाहिए तो उन्हें सख्ताई से इस बात को रखना चाहिए कि जो 6 पंक्तियां जोड़ी गई हैं वह गलत हैं और नहीं होनी चाहिए।

क्या है ये पूरा विवाद?

यह विवाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है। विवाद एक वायरल वीडियो के बाद शुरू हुआ, जिसमें वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के दौरान सोनिया गांधी को मल्लिकार्जुन खड़गे से बात करते और इशारा करते हुए देखा गया। इसको लेकर देशभर में नाराजगी देखी गई है। बीजेपी ने इसको लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

हालांकि, कांग्रेस ने कहा कि सोनिया गांधी के कामों का वेन्यू पर बजाए गए नेशनल सॉन्ग से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी ने कहा कि वह बस यह पक्का करने की कोशिश कर रही थीं कि इवेंट में वंदे मातरम ठीक से गाया जाए।

1937 में क्या हुआ था?

साल 1937 में वंदे मातरम के कुछ अंतरों पर मुस्लिम संगठनों ने धार्मिक आपत्ति जताई थी। इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने निर्णय लिया था कि सार्वजनिक आयोजनों में मुख्य रूप से पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगं। यही परंपरा लंबे समय से अधिकांश सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनाई जाती रही है, लेकिन अब बीजेपी की सरकार ने वंदे मातरम के 6 और अंतरों को उसमें जोड़ने वाला बिल पास करा दिया है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा।

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दिल्ली में 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा करने के संतों के ऐलान पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने रविवार को पलटवार किया है। उन्होंने संतों की कारसेवा को लेकर कहा, “आपको याद होगा कि यह वही कारसेवा है जिसके कारण 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराया गया था। वह पूरे देश के लिए एक काला दिन था। यहां पढ़ें पूरी खबर…