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स्टिंग में दावा- जवाहर बाग में पहले भी हो चुकी थी पुलिस की पिटाई, लोकल इंटेलिजेंस ने कई बार भेजी थी रिपोर्ट

तीन एसओ और एक सीओ साहब वहां जैसे ही अंदर गए उसने (रामवृक्ष) कुछ नहीं पूछा और मोटे डंडे से धुनाई कर दी। मैं भी वहां मौजूद था। ऐसा एक बार नहीं तीन चार बार हुआ था।

Author नई दिल्ली | June 9, 2016 8:57 PM
पुलिस कार्रवाई के बाद मथुरा के जवाहर बाग का दृश्य। (Express photo by Oinam Anand. 03 May 2016)

एक न्यूज चैनल के स्टिंग में दावा किया गया है कि लोकल इंटेलिजेंस ने कई बार जवाहर बाग को लेकर कई बार रिपोर्ट भेजी थी लेकिन उसपर कोई कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही यह बात भी सामने आई है कि जवाहर बाग में पहले भी पुलिस की पिटाई हो चुकी थी।

आज तक का स्टिंग शुरू होता है एलआईयू के इंस्पेक्टर मुन्नी लाल गौर से। मुन्नी लाल बताते है कि, “मैंने 80 बार इस संबंध में प्रशासन को रिपोर्ट भेजी थी। करीब 250-300 पन्नों की रिपोर्ट थी हमारी। लेकिन किसी ने इसकी ओर ध्यान नहीं दिया।” मुन्नी लाल आगे कहते हैं कि, “मैंने अपनी रिपोर्ट में रामवृक्ष के पास अवैध हथियार होने की बात कही थी। मैंने यह भी कहा था कि अगर पर्याप्त बल के बिना कार्रवाई की गई तो कोई अप्रिय घटना हो सकती है।” मुन्नी लाल ने यह चेतावनी डेढ़ साल पहले ही दे दी थी। पुलिस संघर्ष से एक दिन पहले भी उन्होंने अपनी रिपोर्ट में सरकार को चेताया था। एसएसीपी, एसपी सीटी , डीएम और अपर नगर प्रशासन सबको इस बारे में पहले ही बताया जा चुका था।

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इसके बाद दूसरा स्टिंग सुनील कुमार तोमर (जावाहर बाग में तैनात सब इंस्पेक्टर) का होता है। वो कहते हैं, “जब हमको पता है क्रिमनल अंदर बैठे हैं लेकिन हमें गिरफ्तारी की इजाजत ही नहीं थी। हमारे हाथ बांध दिए गए थे। हमें कुछ करने नहीं दे रहे थे। अगर ये केस कोर्ट में नहीं जाता तो ये 280 एकड़ जमीन रामवृक्ष को 1 रुपए पट्टे पर दिए जाने का पूरा कार्यक्रम बना लिया था।” इसके बाद नारायण सिंह (जावाहर बाग में सब्जी और फल पहुंचाने वाला) कैमरे पर बताते हैं कि वहां पर कई तरह के लोग आते थे, वो कहते हैं “बढ़िया भी आते थे गंदे भी आते थे ..गुंड़े भी आते थे बदमाश भी आते थे और नेता भी आते थे।”

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चौथा स्टिंग कॉन्स्टेबल मनोज यादव का होता है। मनोज जावाहर बाग में तैनात रह चुके हैं। वो बताते हैं, “जनवरी 2014 में एक बार पुलिस टीम वहां गई थी। तीन एसओ और एक सीओ साहब वहां जैसे ही अंदर गए उसने (रामवृक्ष) कुछ नहीं पूछा और मोटे डंडे से धुनाई कर दी। मैं भी वहां मौजूद था। ऐसा एक बार नहीं तीन चार बार हुआ था।”

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