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श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद: शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग करने वाले मुकदमे को मथुरा कोर्ट ने दी अनुमति

गौरतलब है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता हरिशंकर जैन और उनके बेटे विष्णु जैन ने ही मथुरा की सिविल जज की अदालत में पहला वाद दायर किया था।

Mathura Case, Krishna Janmbhoomi
मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि ईदगाह मस्जिद विवाद पर अदालत ने सूट चलाने की इजाजत दी(फोटो सोर्स: ANI)।

काशी में ज्ञानवापी मामले की हलचल के बीच मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मामले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बता दें कि मुथरा कोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग को लेकर दायर किये मुकदमे को अनुमति दे दी है। इसके बाद ईदगाह मस्जिद को हटाने की याचिका पर अब अदालती कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि मथुरा में शाही मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटी हुई है।

गौरतलब है कि यह मुकदमा हिंदू संगठनों द्वारा दायर किया गया है। याचिका में भगवान कृष्ण विराजमान की ओर से श्री कृष्ण जन्म स्थान की 13.37 एकड़ जमीन वापस दिलाने की अदालत से गुहार लगाई गई है। दावा किया गया है कि इसके बड़े हिस्से पर करीब चार सौ साल पहले औरंगजेब के आदेश से मंदिर ढहाकर केशवदेव टीले और भूमि पर अवैध कब्जा किया गया था और शाही ईदगाह मस्जिद बनाई गई।

याचिका में कहा गया कि शाही ईदगाह मस्जिद 1669-70 में मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर कृष्ण जन्मभूमि के पास बनाया गया था। रंजना अग्निहोत्री, हरिशंकर जैन व विष्णु जैन इस याचिका के याचिकाकर्ता हैं।

श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को लेकर अधिवक्ता मुकेश खंडेलवाल ने बताया, “वादी ने निचली अदालत में मुकदमा दायर किया था और देखा था कि वादी को मुकदमा करने का अधिकार नहीं है। जिसके बाद मथुरा जिला अदालत के समक्ष एक पुनरीक्षण दायर किया गया था। कोर्ट ने अब निचली अदालत के आदेश को गलत बताया और इस पर रोक लगा दी।”

गौरतलब है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता हरिशंकर जैन और उनके बेटे विष्णु जैन ने ही मथुरा की सिविल जज की अदालत में पहला वाद दायर किया था। हालांकि उनकी उस याचिका को न्यायालय ने 30 सितंबर 2020 को खारिज कर दिया था।

इसके बाद याचिकाकर्ताओ ने जिला जज की अदालत में बतौर रिवीजन पिटीशन दायर किया। जिस पर 2020 से अबतक लंबी बहस चली। इस याचिका पर आज जिला जज की अदालत ने फैसला सुनाया है।

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