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मथुरा: श्री कृष्ण जन्मभूमि विराजमान की अपील कोर्ट ने की स्वीकार, 18 नवंबर को होगी सुनवाई

याचिकाकर्ताओं ने सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ की सहमति से कथित ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह की प्रबंधन समिति द्वारा इस पर "अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण और अधिरचना को हटाने" की मांग की थी।

Krishna Janmabhoomi, krishna temple, mathura krishna temple, krishna janmabhooomi, idgah masjid, idgah mosqueअधिवक्ता विष्णु जैन और हरिशंकर जैन द्वारा सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत में दायर यह याचिका 57 पेज की है। जिसमें उन्होंने अपनी सारी बातें रखी हैं।

उत्तर प्रदेश में मथुरा की एक अदालत ने शुक्रवार को शहर के भगवान कृष्ण मंदिर परिसर से सटे एक मस्जिद को हटाने के लिए दायर याचिका स्वीकार कर ली है। इस मामले में अगली सुनावाई अब 18 नवंबर 2020 को होगी। यह मामला पहली बार 26 सितंबर को सामने आया था, जब भक्तों के एक समूह ने सिविल कोर्ट का रुख किया, जिसमें ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई थी, उन्होंने आरोप लगाया था कि 17 वीं शताब्दी में मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर मंदिर के एक हिस्से को तबाह कर दिया गया था। सिविल जज, मथुरा के सामने दायर मुकदमों में, वादी ने कहा कि “हर इंच भूमि”, 13.37 एकड़ को मापने, “कटरा केशव देव (जैसा कि स्थान ऐतिहासिक रूप से ज्ञात है) भगवान श्रीकृष्ण और (क) हिंदू समुदाय के भक्तों के लिए पवित्र है।”

याचिकाकर्ताओं ने सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ की सहमति से कथित ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह की प्रबंधन समिति द्वारा इस पर “अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण और अधिरचना को हटाने” की मांग की थी। कटरा केशव देव केवट, मौजा मथुरा बाज़ार शहर में भगवान श्रीकृष्ण विरजमन के रूप में वर्णित वादी रंजना अग्निहोत्री और भगवान श्री कृष्ण के छह अन्य भक्तों के माध्यम से दीवानी मुकदमे को आगे बढ़ाया था। वकील हरि शंकर जैन और विष्णु जैन ने याचिका दायर की थी। हालांकि, 2 अक्टूबर को, मथुरा में सिविल कोर्ट ने मुकदमा खारिज कर दिया था। यह आदेश अतिरिक्त जिला न्यायाधीश छाया शर्मा ने पारित किया। अदालत ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के तहत मामले को स्वीकार करने पर बार का हवाला देते हुए संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।

याचिका के अनुसार, मुगल सम्राट औरंगजेब, ने 31 जुलाई, 1658 से 3 मार्च, 1707 ई. तक भारत पर शासन किया था। औरंगजेब ने “बड़ी संख्या में हिंदू धार्मिक स्थलों और मंदिरों के विध्वंस के आदेश जारी किए थे।” याचिका में कहा गया है कि “यह 1669-70 ई. में मथुरा के कटरा केशव देव, भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर था। औरंगजेब की सेना आंशिक रूप से केशव देव मंदिर को ध्वस्त करने में सफल रही और अपनी ताकत का इस्तेमाल करके ईदगाह मस्जिद को बनवा दिया।” अधिवक्ता विष्णु जैन और हरिशंकर जैन द्वारा सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत में दायर यह याचिका 57 पेज की है। जिसमें उन्होंने अपनी सारी बातें रखी हैं।

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