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वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद भी जरूरी है मास्क, जानें कैसे अलग है अमेरिका से भारत की स्थिति

आम आदमी को फिलहाल सीडीसी के विचार को दिमाग से दूर कर देना चाहिए। वैसे भी जो कुछ कहा गया है, अमेरिकियों से कहा गया है। और, उसके लिए भी शर्ते हैं। मसलन, शिक्षकों और छात्रों के लिए स्कूल के भीतर मास्क लगाना अनिवार्य रखा गया है।

टीवी डिबेट में आप प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि भारत सरकार ने वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को उचित ऑर्डर नहीं दिया है जिससे टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। (फोटो – पीटीआई)

पिछले दिनों अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने यह कहकर वैज्ञानिकों समेत कई लोगों को भौंचक्का कर दिया कि जिन लोगों का पूरा वैक्सीनेशन हो गया है वे अपना मास्क उतार सकते हैं। सीडीसी को अमेरिका में वही दर्जा प्राप्त है जो भारत में आइसीएमआर को हासिल है। अंमेरिका में पूरी तरह वैक्सीनेटेड उन्हें माना जाता है जिन्हों ने निर्धारित डोज़ ले लिए हों और आखिरी डोज के दो हफ्ते बीत चुके हों।

भारतीय वैज्ञानिकों ने बहरहाल, चेताया है कि अमेरिकी एजेंसी के चक्कर में पड़कर मास्क उतारने की गलती कोई न करे। अमेरिकी एजेंसी सीडीसी ने कहा कि कुछ सुबूत मिलने के बाद ही मास्क उतारने की गाइडलान जारी की गई है। उसने कहा कि कुछ अध्ययनों से पता लगा कि वैक्सीन का पूरा कोर्स करने के दो हफ्ते बाद दसरों को संक्रमति करने की या खुद संक्रमति होने की आशंका न के बराबर रह जाती है। लेकिन, लोगों को इस बात पर यकीन नहीं हो रहा। वैज्ञानिकों को भी नहीं। उल्लेखनीय है कि अमेरिका की इस एजेंसी यानी सीडीसी पर सारी दुनिया के वैज्ञानिक बहुत श्रद्धा रखते हैं।

आम आदमी को फिलहाल सीडीसी के विचार को दिमाग से दूर कर देना चाहिए। वैसे भी जो कुछ कहा गया है, अमेरिकियों से कहा गया है। और, उसके लिए भी शर्ते हैं। मसलन, शिक्षकों और छात्रों के लिए स्कूल के भीतर मास्क लगाना अनिवार्य रखा गया है। जो लोग वैक्सीन ले चुके हैं उनसे भी कहा गया हैकि वे भीड़भाड़ में, फ्लाइट्स में और स्वास्थ्य केंद्रों में मास्क लगा के ही जाएं।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका कुछ महीनों से दैनिक संक्रमणों और मौतों की संख्या में कमी आई है। इस वक्त वहां हर दिन औसतन 30 हजार केस आ रहे हैं दैनिक मृतक संख्या छह सौ के आसपास है। इस गिरावट का मुख्य कारण है वैक्सीनें तेजी से लगाना। पिछले हफ्ते तक अमेरिका ने एक तिहाई से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेट कर लिया था।

अमेरिका में फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना और जॉनसन एण्ड जॉनसन की सिंगिल डोज वैक्सीन लगाई जा रही हैं। अध्ययन से मालूम चलता है कि इन डबल और सिंगिल डोज़ लेने के दो महीने बाद रोग ग्रहण करने और रोग फैलाने की क्षमता नगण्य हो जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सीडीसी की इस सलाह से बड़ा कनफ्यूजन होगा क्योंकि सीडीसी की बातों को कई देशों के वैज्ञानिक ब्रह्म वाक्य मान लेते हैं। एक सवाल और पूछा जा रहा है कि आखिर बिना मास्क के घूम रहे कितने लोगों से पूछा जा सकता है कि उन्होंने वैक्सीन का पूरा कोर्स किया है या नहीं।

सीडीसी की सलाह भारत की स्थिति में बेमानी है। बस इतना हो सकता है कि कुछ लोग यह सोच कर बहक जाएं कि ‘अमेरिका-में-तो-ऐसा-हो-रहा-है।’ बहरहाल, भारतीय वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने अमेरिकी सलाह के साथ असहमति जताई है और लोगों से कहा है कि वे इसकी तरफ ध्यान ही न दें।

भारत में वैसे भी हालत अलग हैं। दूसरी लहर अपने प्रचंड रूप में अब भी कायम है। अमेरिका में एक तिहाई वैक्सीनेशन के जवाब मे भारत में तो अभी बमुश्किल तीन परसेंट वैक्सीनेशन हो सका है। तिस पर यहां इस्तेमाल हो रही वैक्सीनें भी अलग हैं। एक वैज्ञानिक ने कहा कि मास्क उतारने की बात वैक्सीन के लिए ललचाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। बहरहाल, भारत के लिए यह सलाह अर्थहीन ही नहीं, बहुत घातक भी है।

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