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मुफ्ती सरकार बर्खास्त हो, नए सिरे से हों चुनाव

जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई का मुद्दा लगातार दूसरे दिन संसद में उठा। इस दौरान प्रदेश की मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार को बर्खास्त करने और राज्य में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की गई। अन्नाद्रमुक के पी वेणुगोपाल ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए […]

मसर्रत की रिहाई पर आक्रोश

जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई का मुद्दा लगातार दूसरे दिन संसद में उठा। इस दौरान प्रदेश की मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार को बर्खास्त करने और राज्य में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की गई।

अन्नाद्रमुक के पी वेणुगोपाल ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का अलगाववादी नेता को रिहा करना और ऐसे ही अन्य दर्जनभर नेताओं की रिहाई का ऐलान करने संबंधी बयान राष्ट्रविरोधी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सोमवार को सदन में दिए गए जवाब से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने जानना चाहा कि केंद्र ने राज्य सरकार से किस प्रकार का स्पष्टीकरण मांगा है। मोदी ने सोमवार को सदन में आलम की रिहाई को अस्वीकार्य बताया था और राजनाथ ंिसह ने कहा था कि केंद्र ने राज्य सरकार से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राष्ट्रीय हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि भाजपा प्रदेश सरकार से हट जाए और जम्मू कश्मीर में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराए जाएं। उन्होंने साथ ही कहा कि प्रदेश में अलगाववादियों को जेलों से रिहा करने के ऐलान को लेकर पीडीपी पर प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान के बावजूद मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने ऐसे करीब और दर्जनभर अलगाववादी नेताओं व राजनीतिक कैदियों को जेल से रिहा किए जाने का ऐलान किया है। इसी पार्टी के अनवर रजा ने सईद के बयान को गैर जिम्मेदाराना और राष्ट्रविरोधी करार देते हुए मुख्यमंत्री को पद से हटाए जाने की मांग की।

उधर राज्यसभा में भी मंगलवार को विपक्ष ने जम्मू कश्मीर सरकार की 800 से ज्यादा अलगाववादियों को छोड़े जाने की योजना संबंधी रिपोर्टों पर सरकार को घेरते हुए इसे राष्ट्र की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ बताया और जानना चाहा कि क्या राज्य सरकार ने इस बारे में उसे अवगत कराया है। उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सपा के नरेश अग्रवाल ने यह मुद्दा उठाया और सवाल किया कि क्या जम्मू कश्मीर के राज्यपाल की ओर से इस संबंध में कोई रिपोर्ट केंद्र को मिली है। उन्होंने सरकार से यह आश्वासन मांगा कि अब और किसी अलगाववादी को नहीं छोड़ा जाएगा।

कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने जानना चाहा कि आलम की रिहाई के आदेश पर राज्यपाल ने हस्ताक्षर किए थे या संबंधित मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर थे। अन्नाद्रमुक सदस्यों ने दावा किया कि जम्मू कश्मीर में 10 हजार अलगाववादी कैदियों को रिहा किया जाएगा।

सदन के नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस टिप्पणी पर गंभीर आपत्ति जताई कि 10 हजार कैदियों को रिहा किया जा रहा है। उन्होंने कहा-क्या आप दुनिया को यह बता रहे हैं कि हमने 10 हजार राजनीतिक कैदियों को बंद कर रखा है। उन्होंने कहा कि अगर कोई विशिष्ट मामला लाया जाता है तो सरकार तथ्यों का पता लगाएगी और जवाब देगी।

उन्होंने कहा कि सोमवार को भी इस मुद्दे पर सदन में चर्चा हुई और गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि एक अलगवावादी की रिहाई के संबंध में राज्य सरकार से मिली रिपोर्ट पर केंद्र को कुछ आपत्ति है व उसने इस बारे में और जानकारी मांगी है।

 

 

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