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मशरत आलम की रिहाई पर केंद्र ने मांगी रिपोर्ट

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर सरकार से उन परिस्थितियों के बारे में रिपोर्ट मांगी है जिनके तहत कट्टरपंथी अलगाववादी नेता मशरत आलम को रिहा किया गया। आलम के खिलाफ 15 से अधिक मामले लंबित हैं। रविवार होने के बाद भी गृह मंत्रालय में कश्मीर डिविजन के अधिकारियों ने काम किया ताकि इस मुद्दे पर […]

Author March 9, 2015 9:09 AM
सरकार बदलने का यह मतलब नहीं है कि जमीनी स्तर पर हकीकत बदल जाएगी: मशरत आलम

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर सरकार से उन परिस्थितियों के बारे में रिपोर्ट मांगी है जिनके तहत कट्टरपंथी अलगाववादी नेता मशरत आलम को रिहा किया गया। आलम के खिलाफ 15 से अधिक मामले लंबित हैं।

रविवार होने के बाद भी गृह मंत्रालय में कश्मीर डिविजन के अधिकारियों ने काम किया ताकि इस मुद्दे पर राज्य सरकार से सभी तथ्य एकत्र किए जा सकें। इस मुद्दे को लेकर पीडीपी-भाजपा गठबंधन में विवाद पैदा हो गया है। मंत्रालय ने उन वजहों के बारे में जानकारी मांगी है जिनके तहत 2010 के विरोध प्रदर्शन के अगुआ 44 वर्षीय आलम को शनिवार रात बारामूला जेल से रिहा किया गया।

सूत्रों ने बताया कि आलम के खिलाफ करीब 15 मामले लंबित हैं। इनमें दंड संहिता की धारा 120 और 121 (देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और गैरकानूनी गतिविधियां निवारण कानून के तहत दर्ज मामले शामिल हैं।


केंद्र सरकार को आशंका है कि जब होली के अवकाश के बाद संसद की बैठक सोमवार को फिर शुरू होगी तो नए घटनाक्रम को लेकर व्यवधान पैदा हो सकता है। संभावना जताई जा रही है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह राजनीतिक तूफान खड़ा कर देने वाले इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट कर सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव एलसी गोयल ने जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक के राजेंद्र से भी बातचीत की है ताकि रिहाई के कारणों का पता लग सके। पुलिस ने 2010 के विरोध प्रदर्शन के लिए आलम के खिलाफ आपराधिक साजिश का भी मामला दर्ज किया है। उस आंदोलन के दौरान करीब 120 लोगों की मौत हो गई थी। जम्मू में, पुलिस प्रमुख ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के साथ बैठक की।

अक्तूबर 2010 में जब आलम को श्रीनगर शहर के बाहरी हिस्से में हरवान इलाके से गिरफ्तार किया गया था तो छह पुलिसकर्मियों को प्रोन्नति दी गई थी और पुलिसकर्मियों व मुखबिरों को 10 लाख रुपए का नकद इनाम भी दिया गया था। आलम के संबंध में जानकारी देने पर 10 लाख रुपए के इनाम की घोषणा की गई थी।

उधर इस मुद्दे पर महज हफ्ते भर पुराने पीडीपी-भाजपा गठबंधन में तनाव बढ़ता दिख रहा है। भगवा पार्टी ने रविवार को ‘एकतरफा’ फैसले की आलोचना की और चेतावनी दी है कि ऐसी चीजें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

भाजपा ने कहा कि यह फैसला साझा न्यूनतम कार्यक्रम (सीएमपी) के आधार पर नहीं है जिस पर जम्मू कश्मीर में गठबंधन सरकार चल रही है। लेकिन पीडीपी ने कहा है कि यह सीएमपी के अनुरूप ही है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश भाजपा प्रमुख व सांसद जुगल किशोर शर्मा ने बताया कि यह फैसला करने से पहले उनकी पार्टी से विचार विमर्श नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि मुद्दे पर चर्चा के लिए राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेताओं की रविवार को यहां बैठक हुई और उनकी पार्टी अपनी नाराजगी से पीडीपी नेतृत्व को अवगत कराएगी और उससे गठबंधन धर्म का पालन करने को कहेगी।

शर्मा ने संवाददाताओं को बताया, ‘हमें उनकी रिहाई से पहले सूचना या जानकारी नहीं दी गई। हम ऐसे किसी बयान को या ऐसे किसी फैसले को बर्दाश्त नहीं करने जा रहे हैं जो साझा न्यूनतम कार्यक्रम के अनुरूप नहीं है, जिस पर हम सहमत हुए थे। हमने अपने साझेदार को अपनी नाराजगी जाहिर करने का फैसला किया है ताकि ऐसी चीजें भविष्य में न हों।’ प्रदेश भाजपा प्रमुख ने कहा कि यह मुद्दा साझा न्यूनतम कार्यक्रम में नहीं है।

वहीं दूसरी ओर, पीडीपी प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा कि फैसला सीएमपी के अनुरूप है जो जम्मू कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए सभी साझेदारों को शामिल करने का जिक्र करता है। अख्तर ने बताया, ‘इसे (आलम की रिहाई) उपयुक्त संदर्भ में देखना होगा। सुलह और शांति के लिए राज्य में और सीमा पार के सभी भागीदारों को शामिल करना हमारे साझा न्यूनतम कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है।’

उन्होंने कहा, ‘यदि आप भागीदारों के साथ वार्ता करना चाहते हैं, जिनमें ये नेता शामिल हैं, तो आप बगैर ठोस कारण के उन्हें जेल में रख कर उनसे बात नहीं कर सकते।’

आलम की रिहाई पर भाजपा के विरोध के बारे में पूछे जाने पर पीडीपी प्रवक्ता ने कहा कि वह इस पर सार्वजनिक बहस में नहीं कूदना चाहते। ‘उनके अपने विचार हैं लेकिन मैं इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा में शामिल नहीं होना चाहता। यह हमारी सीएमपी का हिस्सा है।’ एक अन्य पीडीपी नेता और विज्ञान व प्रौद्योगिकी व युवा सेवा और खेल मंत्री इमरान अंसारी ने दावा किया कि आलम की रिहाई के आदेश को लागू करने में भाजपा पीडीपी के साथ थी।

उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि भाजपा को कोई ऐतराज है। वे हमारे साथ हैं। हमारी गठबंधन सरकार है। मुझे नहीं लगता कि उसे मुद्दा बनाना सही चीज है। अदालतों ने उन्हें रिहा किया और गृह मंत्रालय ने आदेश को तामील किया।’ वहीं, दूसरी ओर जुगल किशोर शर्मा ने जोर देते हुए कहा, ‘इस कदम पर भाजपा की सहमति नहीं थी। न ही ऐसा फैसला किए जाने से पहले भाजपा से संपर्क किया गया।’

वर्ष 2010 में कश्मीर में व्यापक प्रदर्शनों के सिलसिले में साढ़े चार साल की हिरासत के बाद आलम को शनिवार को रिहा किया जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए थे।

भाजपा नेता ने कहा, ‘ऐसे लोगों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे सिर्फ भारत विरोधी जहर उगलेंगे। यदि आप ऐसे लोगों को बगैर किसी शर्त के छोड़ते हैं तो हमेशा ही ऐसे (अलगाववादी) नारे लगाएंगे।’ उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर भाजपा के अंदर चर्चा होगी।

यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा सरकार से निकल जाएगी, उन्होंने कहा, ‘ऐसी स्थिति नहीं आई है। हम अपने साझेदार के साथ बैठेंगे और एक फैसला (ऐसे मुद्दे के बारे में) करेंगे ताकि भविष्य में ऐसे कदम नहीं उठाए जाएं।’ भाजपा विधायक रविंद्र रैना ने कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्र के अपमान को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। ‘मुशर्रत आलम एक दुर्दांत आतंकवादी है और हम राष्ट्र के गौरव के लिए ऐसी हजार सरकारें कुर्बान करने को तैयार हैं।’’

हालांकि आलम को फिर से गिरफ्तार करने को मुख्यमंत्री को कहे जाने के सवालों से बचते हुए शर्मा ने कहा, ‘‘हमारे वरिष्ठ नेता और उप मुख्यमंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्री श्रीनगर में हैं। हम उनके लौटने पर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।’’

यह पूछे जाने पर कि भविष्य में इस तरह के फैसले लिए जाने पर क्या उनकी पार्टी सरकार से हट जाएगी, उन्होंने कहा, ‘फिलहाल हमारा समर्थन वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।’ जम्मू कश्मीर के पार्टी प्रभारी और सांसद अविनाश राय खन्ना ने कहा, ‘यह सरकार सीएमपी पर बनी है और सरकार को सीएमपी का पालन करना चाहिए।

नौशेरा से विधायक रैना ने कहा कि भाजपा आलम की रिहाई के खिलाफ प्रदर्शन करेगी। वह एक आतंकवादी है। वह सीमा पार कर पाकिस्तान गया और कश्मीर में सुरक्षा बलों के कई शिविरों पर हमले की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया।

 

 

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