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शहीद दिवसः पांच बार पहले भी हो चुकी थी महात्मा गांधी की हत्या की कोशिश, जानें क्या थे आखिरी शब्द

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर 1934 में पहली बार जानलेवा हमला हुआ था, इसके बाद 1944 में दो बार और 1946 और 1948 में हमले किए गए।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी। (फोटो- Wikimedia Commons)

आज से ठीक 73 साल पहले यानी 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी। गांधी उस समय 78 साल के थे जब दिल्ली स्थित बिरला हाउस (अब गांधी स्मृति) में उन्हें गोली मार दी गई। तब उनके मुंह से निकले आखिरी शब्द थे- हे राम! इस दिन यानी 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। शायद आपको मालूम ना हो कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सबसे प्रसिद्ध हस्ती महात्मा गांधी को इससे पहले भी पांच बार मारने की कोशिश हुई थी। मगर हत्या का जोखिम होने के बावजूद उन्होंने इसकी चिंता नहीं की और हमेशा दूसरों की सुरक्षा के बारे में चिंतित रहे।

मशूहर पत्रकार और सिविल राइट्स एक्टिविस्ट्स तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा संपादित ‘Beyond Doubt: A Dossier on Gandhi’s Assassination’ में सभी पांच हत्या के प्रयासों का दस्तावेजीकरण हैं। ये किताब साल 2015 में प्रकाशित हुई थी।

25 जून, 1934 को पहली बार महात्मा गांधी की हत्या का प्रयास हुआ:
आर्काइव सबूतों के अनुसार पुणे में पहली बार गांधी जी की हत्या का प्रयास हुआ। यहां वो भाषण देने के लिए पहुंचे थे कि तभी षड्यंत्रकारियों ने एक कार में बम धमाका किया जिसमें बापू थे। उनके सचिव प्लारेलाल ने अपनी किताब ‘महात्मा गांधी: द लास्ट फेज’ में लिखा है कि इस साजिश के चलते निर्दोष लोगों की मौत होने पर बापू को कितना दुख हुआ।

जुलाई, 1944 में दूसरी बार हत्या की कोशिश:
महात्मा गांधी की हत्या के पांच प्रयासों में से तीन में गोडसे शामिल था। दूसरी बार हत्या की कोशिश महाराष्ट्र के पंचगनी में हुई जब गांधी जी को आराम करने की सलाह दी गई क्योंकि प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उनके विरोध में नारेबाजी करते हुए हंगामा किया। जवाब में गांधी ने प्रदर्शनकारियों के लीडर नाथूराम गोडसे को चर्चा के लिए बुलाया जिसे खारिज कर दिया गया। बाद में प्रार्थना सभा के दौरान गोडसे को खंजर के साथ राष्ट्रपिता की तरफ भागते हुए देखा गया। सौभाग्य से मणिशंकर पुरोहित और सतारा के भिलारे गुरुजी ने उसे पकड़ लिया। दोनों ने कपूर आयोग के समक्ष इस हमले के बारे में गवाही भी दी थी।

सितंबर, 1944 को तीसरी बार हत्या की कोशिश:
हिंदू महासभा गांधी और जिन्ना की मुलाकात के खिलाफ थी। गोडसे और एलजी थट्टे ने गांधी जी को मुंबई सभा में जाने से रोकने के लिए आश्रम को चुना। यहां आश्रम के लोगों ने गोडसे को पकड़ लिया जब उसने गांधी जी पर हमला करने की कोशिश की थी।

जून, 1946 को चौथा प्रयास:
महात्मा गांधी की हत्या का एक और प्रयास तब हुआ जब वो ट्रेन से पुणे की यात्रा कर रहे थे। ट्रेन पटरियों पर रखे पत्थर की चलते दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी हालांकि ड्राइवर के कौशल के चलते ज्यादा हानि नहीं हुई। इसमें गांधी सुरक्षित बच गए थे।

20 जनवरी, 1948 को गांधी जी की हत्या की पांचवीं कोशिश:
इस दिन बिड़ला भवन में एक बैठक के दौरान महात्मा गांधी की हत्या की फिर साजिश रची गई। मदनलाल पाहवा, नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे, विष्णु करकरे, दिगंबर बैज, गोपाल गोडसे और शंकर किस्तैया ने हत्या को अंजाम देने के लिए बैठक में भाग लेने की योजना बनाई थी। वो मंच पर बम और फिर गोली चलाने वाले थे। मगर सौभाग्य से इस योजना को अमल में नहीं लाया जा सका क्योंकि मदनलाल को पकड़ लिया गया।

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