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शहादत के 19 साल: दो घंटे में ढेर किए थे 15 पाकिस्तानी सैन‍िक, जान‍िए कारग‍िल के शहीद की कहानी

राजस्थान के झुंझुनू के रहने वाले सूबेदार हरफूल सिंह कुलहरी ने सिर्फ दो घंटे में 2 बंकर तबाह करके 15 पाकिस्तानी सैनिकों को मौत की नींद सुला दिया था। उनका शौर्य देखकर दुश्मन पोस्ट छोड़कर भाग गए ​थे। शहीद हरफूल सिंह ने 30 मई 1999 को ही वीरगति हासिल की थी।

अमर शहीद हरफूल सिंह कुलहरी। फोटो- Facebook/RameshDadhich

कारगिल के युद्ध में देश के कई बहादुर जवानों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर देश का मान बचाया था। देश के इन शूरवीरों ने विपरीत मौसम और परिस्थितियों में भी अपने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था। ऐसे ही शहीद राजस्थान के शेखावाटी अंचल के झुंझुनू जिले के रहने वाले सूबेदार हरफूल सिंह कुलहरी थे। जिन्होंने सिर्फ दो घंटे में 2 बंकर तबाह करके 15 पाकिस्तानी सैनिकों को मौत की नींद सुला दिया था। उनका शौर्य देखकर दुश्मन सैनिक पोस्ट छोड़कर भाग खड़े हुए ​थे। शहीद हरफूल सिंह ने 30 मई 1999 को ही वीरगति हासिल की थी।

दो घंटे में ढेर किए 15 सैनिक: शहीद सूबेदार हरफूल सिंह कुलहरी झुंझुनूं जिले के गांव तिलोका का बास के रहने वाले थे। वह 17 जाट रेजिमेंट में तैनात थे। आॅपरेशन विजय में उनकी रेजिमेंट को द्रास सेक्टर से दुश्मन को मार भगाने का जिम्मा मिला था। उन्हें 29 मई 1999 की रात 38 सैनिकों को लेकर मश्कोह घाटी के प्वाइंट 4590 पर हमला करने की जिम्मेदारी दी गई। टुकड़ी ने दो घंटे तक आमने-सामने की लड़ाई लड़कर 15 पाक सैनिकों को ढेर कर दिया। सेना ने बिना किसी नुकसान के प्वाइंट पर कब्जा जमा लिया।

गोली लगने पर भी रहे बेफिक्र: इसके बाद सूबेदार हरफूल सिंह और उनकी टुकड़ी ने दुश्मन की दूसरी चौकी की तरफ अंधेरे में रेंगकर बढ़ना शुरू कर दिया। सुबह चार बजे जब रोशनी हुई तो उन्हें पता चला कि वह दुश्मन के बंकर से सिर्फ 100 मीटर दूर थे। पाकिस्तानी सिपाहियों ने रोशनी होते ही मूवमेंट भांप लिया और अंधाधुंध गोलियां चलाने लगे। इसके बाद भारतीय टुकड़ी ने भी हमला बोल दिया। सीधा फायर होने से भारतीय सैनिकों को नुकसान हुआ। हरफूल सिंह का साथी शहीद हुआ, जबकि उनकी अपनी बांह पर गोली लग गई। लेकिन जोश में उन्होंने परवाह नहीं की।

भारत सरकार ने शहीद के परिजनों को चुरू जिले के राजगढ़ रोड पर पेट्रोल पंप भी आवंटित किया है। फोटो- Facebook/RameshDadhich

घायल होकर भी मारे 22 सैनिक: इसी बीच उनके बगल में गोलियां चला रहे साथी रणवीर सिंह को वीरगति मिली तो हरफूल सिंह क्रोध में धधक उठे। उन्होंने ग्रेनेड से बंकर पर हमला बोल दिया। देखते ही देखते दो बंकर उनके ग्रेनेड हमलों के कारण तबाह हो गए। उनकी टुकड़ी ने इस चौकी पर कुल 22 सैनिकों को मार गिराया। लेकिन लगातार दो मोर्चे होने के कारण गोलियां खत्म हो गईं थीं। जबकि बैकअप पार्टी अभी तक मदद लेकर नहीं आ सकी थी। पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें घेरकर गोलियां चलाना शुरू कर दिया। अमर शहीद हरफूल सिंह को पांच साथियों के साथ वीरगति प्राप्त हुई। उनके सिर पर दो गोलियां लगी थीं जबकि तीन सीने में धंसी हुईं थीं।

वीरगति के 46 दिन बाद मिला शव: शहीद हरफूल सिंह का शव खराब मौसम के कारण तुरंत नहीं मिल सका। 30 मई को शहादत मिलने के 46 दिन बाद 14 जुलाई 1999 को अन्य भारतीय सैनिकों के साथ उनका शव 15 फीट गहरी बर्फ में दबा हुआ मिला था।  शहीद हरफूल सिंह ने 1971 के भारत—पाक युद्ध में भी वीरता का परिचय दिया था। सिपाही से सूबेदार बने हरफूल सिंह ने भारतीय सेना की 28 सालों तक सेवा की। शहीद हरफूल सिंह के गांव में आज भी उनकी मूर्ति लगी है। जबकि भारत सरकार ने चुरू जिले के राजगढ़ रोड पर उनके परिवार को पेट्रोल पंप दिया ​है।

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