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कैप्टन विक्रम बत्रा: ‘तू पीछे हट, तेरे बाल-बच्चे हैं’ कहकर सूबेदार की जगह खुद सीने पर खाई थी गोलियां

करगिल युद्ध में जाने से पहले लेफ्टिनेंट विक्रम बत्रा ने कहा था, ‘या तो मैं जीत का भारतीय तिरंगा लहराकर लौटूंगा या उसमें लिपटा हुआ आऊंगा, पर इतना तय है कि आऊंगा जरूर।’

कैप्टन विक्रम बत्रा के बलिदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च सम्मान परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

करगिल युद्ध में जाने से पहले लेफ्टिनेंट विक्रम बत्रा ने कहा था, ‘या तो मैं जीत का भारतीय तिरंगा लहराकर लौटूंगा या उसमें लिपटा हुआ आऊंगा, पर इतना तय है कि आऊंगा जरूर।’ 9 जुलाई, 1999 को वह घड़ी आ ही गई जब कैप्टन विक्रम बत्रा अपने कहे मुताबिक अपनी जन्मभूमि पर तिरंगे में लिपटे हुए लौटे। 7 जुलाई, 1999 को करगिल में करीब 16,000 फीट की ऊंचाई पर दुश्मन से लोहा लेते हुए विक्रम बत्रा शहीद हो गए थे। आज करगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है।

दुश्मनों के बीच शेर शाह नाम से मशहूर कैप्टन बत्रा उस रात बीमार थे, बावजूद अपने जूनियर के जख्मी होने पर उन्हें पीछे धकेलते हुए दुश्मनों से मोर्चा संभाला था। हालांकि, मिशन लगभग खत्म हो गया था लेकिन उनके जूनियर एक विस्फोट में घायल हो चुके थे। उनके पैर जख्मी थे। रेडिफ डॉट कॉम के मुताबिक विक्रम बत्रा के पिता जी एल बत्रा ने उस रात के बारे में बताया कि विक्रम बत्रा से सूबेदार ने आगे जाने को नहीं कहा था लेकिन विक्रम बत्रा ने ये कहकर उसे पीछे धकेल दिया कि ‘तू तो बाल बच्चेदार है, हट जा पीछे।’

इसके बाद विक्रम बत्रा युवा लेफ्टिनेंट को बचाने के लिए आगे बढ़े। उधर, पाकिस्तानी दुश्मनों को शेरशाह के आने की भनक लग चुकी थी। दुश्मनों ने आक्रमण करते हुए ऊपरी चोटी से नीचे बत्रा पर फायरिंग कर दी जो 80 डिग्री के ढलान पर चढ़ाई करते हुए आगे बढ़ रहे थे। तभी दुश्मनों की गोली बत्रा के सीने में जा लगी। हालांकि, सुबह तक भारत ने चोटी संख्या 4875 फतह कर लिया था लेकिन विक्रम बत्रा जिंदगी की जंग हार चुके थे। उनके सहयोगी लेफ्टिनेंट अनुज नैय्यर भी इस जंग में बत्रा के बाद शहीद हो गए। इन दोनों जवानों ने करगिल युद्ध में अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था। करगिल युद्ध के दौरान ही विक्रम बत्रा को कैप्टन में प्रमोशन मिला था।

कैप्टन बत्रा के बलिदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च सम्मान परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनके जूनियर अनुज नैय्यर को दूसरा सर्वोच्च सैनिक सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। जब कैप्टन बत्रा शहीद हुए तब उनकी उम्र मात्र 24 साल थी। विक्रम बत्रा का का जन्म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के मंडी में शिक्षक गिरधारी लाल बत्रा और माता कमला बत्रा के घर जुड़वां संतान के रूप में हुई थी। दो बेटियों के बाद जन्में दोनों भाइयों का मां-बाप ने तब नाम दिया था लव-कुश। बाद में लव का नाम विक्रम और कुश का नाम विशाल पड़ा। बाद में इनका परिवार मंडी से पालमपुर में आकर बस गया।

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