Marco Rubio in India: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के दौरे पर हैं और शनिवार को उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास सेवा तीर्थ में मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे वक्त में हुई है, जब भारत और अमेरिका अपने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दें कि पिछले एक साल में टैरिफ, वीजा प्रतिबंध, निर्वासन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की ओर झुकाव के कारण दोनों देशों के संबंधों को करारा बड़ा झटका लगा है। इतना ही नहीं, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने भारत की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है, क्योंकि इससे ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है और इसका असर अन्य वस्तुओं पर भी पड़ा है।

अमेरिका की तरफ से क्या कहा गया?

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा, “विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक नहीं बनाने देगा और इस बात की पुष्टि की कि अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों में भारत की ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने की क्षमता है।”

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री ने शांति प्रयासों के लिए भारत के निरंतर समर्थन की पुष्टि की और संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के आह्वान को दोहराया।

क्वॉड की बैठक में होंगे शामिल

अमेरिकी विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में भारत की अपनी पहली यात्रा में 26 मई को नई दिल्ली में क्वॉड के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। वह सुबह करीब 7 बजे कोलकाता पहुंचे और दोपहर तक नई दिल्ली आ गए। कोलकाता में उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी का दौरा किया।

मार्को रुबियो ने पत्नी जेनेट डौसडेबेस रुबियो के साथ X पर पोस्ट किया, “मदर टेरेसा ने करुणा और सेवा की एक महान विरासत छोड़ी है। आज मिशनरीज ऑफ चैरिटी का दौरा करके उनकी विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करना और कैथोलिक धर्म के जीवंत उदाहरण को देखना मेरे लिए सम्मान की बात थी।”

भारत-अमेरिका साझेदारी का जिक्र

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ट्विटर पर लिखा, “कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी के दौरे के लिए मार्को रुबियो के साथ शामिल हुआ। ऐसे क्षण हमें याद दिलाते हैं कि अमेरिका-भारत साझेदारी न केवल मजबूत नीतियों पर आधारित है, बल्कि साझा मूल्यों और निस्वार्थ सेवा की भावना पर भी आधारित है जो सीमाओं से परे है।”

इससे पहले एयरपोर्ट पहुंचने पर सर्जियो गोर ने कहा था, “अपने मित्र मार्को रुबियो का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है! हमारे सामने एक महत्वाकांक्षी एजेंडा है, जिसमें क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक भी शामिल है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-अमेरिका साझेदारी को और भी मजबूत बनाने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है। बेहतरीन बातचीत और साथ मिलकर वास्तविक प्रगति करने के लिए उत्सुक हूं!”

कोलकाता में सबसे पुराना राजनयिक केंद्र

कोलकाता की उनकी यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास न केवल भारत में बल्कि पूरे एशिया में पहला अमेरिकी राजनयिक केंद्र था। यह विश्व का दूसरा सबसे पुराना अमेरिकी राजनयिक केंद्र भी है, जिसकी स्थापना 18वीं शताब्दी में हुई थी। इस वर्ष अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ है।

पीएम मोदी से की मुलाकात

नई दिल्ली में रुबियो ने दोपहर करीब 2 बजे मोदी से मुलाकात की और वह शाम को अमेरिकी दूतावास में एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रही हैं। इसके अलावा रविवार को वे विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे और शाम को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होंगे। सोमवार को उनके आगरा और जयपुर जाने की संभावना है।

शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “विदेश मंत्री एस जयशंकर के निमंत्रण पर ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी, और संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 26 मई 2026 को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली की आधिकारिक यात्रा करेंगे।”

पिछले साल की चर्चा आगे बढ़ेगी

विदेश मंत्रालय द्वारा किए गए ट्वीट में कहा गया, “स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए क्वॉड के दृष्टिकोण के अनुरूप, मंत्री 1 जुलाई 2025 को वाशिंगटन डीसी में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे। वे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्वाड सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। इसके अलावा क्वाड पहलों पर हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों और आपसी चिंता के अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।”

कई विदेश मंत्रियों से होगी बात

विदेश मंत्रालय ने बताया कि नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो कई देशों के विदेश मंत्रियों से द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता थॉमस ‘टॉमी’ पिगोट ने एक बयान में कहा, “विदेश मंत्री रूबियो 23 से 26 मई तक भारत की यात्रा पर रहेंगे, जहां वे कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली का दौरा करेंगे। विदेश मंत्री वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ बैठकों के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रक्षा सहयोग पर चर्चा करेंगे।”

इस यात्रा की शुरुआत से पहले मार्को रुबियों ने कहा कि अमेरिका उतनी ऊर्जा बेचने के लिए तैयार है जितनी भारत खरीदने को तैयार है। स्वीडन और भारत रवाना होने से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने भारत को एक महान भागीदार बताया और कहा कि उनकी यह यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें क्वाड देशों के मंत्रियों से मिलने का अवसर मिलेगा।

एनर्जी सिक्योरिटी पर दिया बयान

रुबियो ने कहा, “हम उन्हें उतनी ऊर्जा बेचना चाहते हैं जितनी वे खरीद सकें। और जाहिर है, आपने देखा ही होगा कि अमेरिका का उत्पादन और निर्यात ऐतिहासिक स्तर पर है।” उन्होंने कहा, “हम और अधिक समझौते करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि वे अपने पोर्टफोलियो में उनका बड़ा हिस्सा शामिल करें। हमें लगता है कि वेनेजुएला के तेल में भी अवसर मौजूद हैं।”

भारत को एक महान सहयोगी एक महान साझेदार बताते हुए रूबियो ने कहा, “हम उनके साथ बहुत अच्छा काम करते हैं। इसलिए यह एक महत्वपूर्ण यात्रा है। मुझे खुशी है कि हम यह यात्रा कर पा रहे हैं क्योंकि मुझे लगता है कि हमारे पास बात करने के लिए बहुत कुछ होगा।”

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