महाराष्ट्र में टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य किए जाने को लेकर मचे घमासान के बीच मंगलवार को चार ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ड्राइवरों ने राज्य सरकार के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है, जिसमें ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की कामकाजी जानकारी को अनिवार्य किया गया है। चार उबर ड्राइवरों की ओर से हाईकोर्ट में वकील विवेक शुक्ला ने एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है।

इस याचिका में मांग की गई है कि राज्य सरकार का यह नोटिफिकेशन संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (व्यापार और पेशा करने की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन जीने का अधिकार) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। बता दें कि राज्य में मराठी भाषा को लेकर ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों पर कार्रवाई करनी शुरू कर दी है।

लाइसेंस के लिए तो नहीं है भाषा की अनिवार्यता

याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार का यह नोटिफिकेशन मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के प्रावधानों के भी अनुरूप नहीं है। याचिका में कहा गया है कि मोटर व्हीकल एक्ट एक केंद्रीय कानून है और इसमें किसी बैज या परमिट के लिए किसी विशेष भाषा के ज्ञान की शर्त नहीं रखी गई है। साफ शब्दों में समझें तो ड्राइवरों ने ये कहा है कि जब लाइसेंस दिया जाता है तो किसी भाषा की अनिवार्यता पर नहीं दिया जाता तो फिर ड्राइवरों पर यह नियम कैसे लागू किया जा सकता है?

ड्राइवरों ने नोटिफिकेशन को रद्द करने की उठाई मांग

याचिका में कहा गया है, “इस नोटिफिकेशन से एक नई अयोग्यता पैदा होती है, जिसे संसद ने कभी लागू नहीं किया।” याचिकाकर्ताओं ने अदालत से 12 अगस्त को जारी नोटिफिकेशन और उसके बाद 19 अगस्त को जारी सर्कुलर को “गैर-कानूनी और असंवैधानिक” करार देते हुए रद्द करने की मांग की है। साथ ही अंतिम फैसले तक इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।

डोमिसाइल सर्टिफिकेट के वेरिफिकेशन को दी गई चुनौती

जानकारी के मुताबिक, इस नोटिफिकेशन में महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 के नियम 4 (4), 24, 78 और 85 में संशोधन किया गया है, जिसके तहत कई तरह के ऑथराइजेशन प्राप्त करने के लिए मराठी की कामकाजी जानकारी अनिवार्य कर दी गई है। याचिका में डोमिसाइल सर्टिफिकेट के वेरिफिकेशन और पुलिस द्वारा इस बात की जांच को भी चुनौती दी गई है कि क्या ड्राइवर वास्तव में 15 साल से महाराष्ट्र में रह रहे हैं।

‘ड्राइवरों की रोजी-रोटी पड़ी खतरे में’

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह प्रक्रिया “माइग्रेंट वर्कर्स” को टारगेट करने के लिए की जा रही है और यह उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। याचिका में कहा गया, “भारत के जो नागरिक अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए महाराष्ट्र आते हैं, उनके साथ अपने ही देश में बाहरी लोगों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।”

याचिकाकर्ताओं के अनुसार इस नोटिफिकेशन का दायरा बहुत बड़ा है, जिससे लाखों गरीब ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। याचिका में दावा किया गया है कि करीब 9.6 लाख परमिट और बैज होल्डर्स को नोटिस, सस्पेंशन या बैज कैंसिल होने का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में यह भी बताया गया है कि 1.65 लाख गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों ने सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम और भाषा अभियान में हिस्सा लिया, वहीं लाखों अन्य ड्राइवरों को नोटिस और कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में कहा गया है, “एक रोज कमाने वाले के लिए बिना बैज के एक दिन का मतलब भी उसके परिवार के लिए भूखा मरने जैसा है। यह चोट तत्काल, निरंतर और अपूरणीय है, और यह समाज के सबसे गरीब तबके पर पड़ रही है।”

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महाराष्ट्र में खाद्य तेल की खुली बिक्री यानी लूज ऑयल पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने हस्तक्षेप किया है। FDA के आदेश के तहत खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक लगाई गई थी, लेकिन कारोबारियों के विरोध और कैबिनेट में उठी चिंताओं के बाद मुख्यमंत्री ने अब पहले एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर…