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PM मोदी की हत्या की साजिश: पुलिस ने पांच राज्यों में मारे छापे, पी वारवरा राव समेत कई गिरफ्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्‍या की माओवादी साजिश के मामले में पुलिस ने 5 राज्‍यों में एक साथ छापे मारे हैं। पी. वारावारा राव को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया है। रोना विल्‍सन के आवास पर मारे गए छापे में एक चिट्ठी बरामद हुई थी, जिसमें माओवादियों द्वारा पीएम मोदी की हत्‍या की साजिश रचने का खुलासा हुआ था। पुलिस को संदेह है कि इस पत्र में वारावारा राव का भी नाम है।

Author Updated: August 29, 2018 7:44 AM
पी. वारावारा राव को उनके हैदराबाद स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया है। (फोटो सोर्स: विकीमीडिया)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्‍या की साजिश रचने के मामले में नया मोड़ आ गया है। माओवादियों की साजिश की तह तक जाने के लिए पुलिस ने पांच राज्‍यों के 8 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे हैं। इस मामले में लेखक पी. वारावारा राव को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कई और लोगों की गिरफ्तारी हुई है। तकरीबन सात घंटे तक चली छानबीन के दौरान उनके घर से कई दस्‍तावेज बरामद किए गए हैं। वारावारा राव को गिरफ्तार करने के बाद उन्‍हें हेल्‍थ चेकअप के लिए गांधी अस्‍पताल ले जाया गया।

बता दें कि पुणे पुलिस ने जून में कथित तौर पर पांच लोगों में एक व्यक्ति के घर से मोदी की हत्या की साजिश के उल्लेख वाला एक पत्र बरामद किया था। इन पांचों लोगों को भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। बरामद पत्र में कथित तौर पर प्रधानमंत्री की हत्या पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तर्ज पर करने की बात कही गई है। इस पत्र को लिखने वाले व्यक्ति की पहचान सिर्फ ‘आर’ के रूप में की गई है।

इसमें साजिश को अंजाम देने के लिए एक एम-4 राइफल व चार लाख चक्र कारतूस खरीदने के लिए आठ करोड़ रुपये की जरूरत का जिक्र किया गया है। कहा जा रहा है कि इस पत्र में वरवर राव का नाम शामिल है। वरवर राव क्रांतिकारी लेखकों के एक संगठन ‘वीरसम’ के अध्यक्ष हैं। राव ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा किइस मामले में गिरफ्तार सभी पांच लोग वंचितों की भलाई के लिए काम रहे थे।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले साल 31 दिसंबर को पुणे में एल्गार परिषद नाम के एक कार्यक्रम के बाद महाराष्ट्र के कोरेगांव-भीमा गांव में हुई हिंसा की जांच के तहत ये छापे मारे गए हैं। अधिकारी ने बताया कि हैदराबाद में वामपंथी कार्यकर्ता और कवि वरवर राव, मुंबई में कार्यकर्ता वेरनन गोन्जाल्विस और अरूण फरेरा, फरीदाबाद और छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और दिल्ली में रहने वाले सिविल लिबर्टीज के कार्यकर्ता गौतम नवलखा के घरों की तलाशी ली गयी। उन्होंने बताया कि तलाशी के बाद राव और भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया गया।

वर्ष 1818 में हुई कोरेगांव – भीमा लड़ाई के 200 साल पूरे होने के मौके पर पिछले साल 31 दिसंबर को हुए एल्गार परिषद कार्यक्रम के सिलसिले में जून में गिरफ्तार पांच लोगों में एक के घर पुलिस की तलाशी के दौरान कथित तौर पर जब्त एक पत्र में राव के नाम का जिक्र था। विश्रामबाग थाना में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, कार्यक्रम में कथित तौर पर ‘‘भड़काऊ’’ टिप्पणी करने के बाद जिले के कोरेगांव भीमा गांव में हिंसा हुयी थी। इसके बाद माओवादियों से संपर्क रखने के आरोप में जून में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुयी थी।

जून में छापा मारे जाने के बाद दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले को मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार किया गया, जबकि वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राऊत और शोमा सेन को नागपुर से तथा रोना विल्सन को दिल्ली में मुनिरका स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘एल्गार कार्यक्रम के मामले में हमारी छानबीन के दौरान प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों के बारे में कुछ सबूत मिले थे जिसके बाद पुलिस ने छत्तीसगढ़, मुंबई और हैदराबाद में छापे मारे।’’ अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किये गए पांचों लोगों और उनके साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों के घरों में तलाशी ली गयी।

पुलिस ने बताया, ‘‘हम इन लोगों के वित्तीय लेन-देन, संवाद के उनके तरीके की भी छानबीन कर रहे हैं और तकनीकी साक्ष्य भी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।’’ पुणे पुलिस के निवर्तमान संयुक्त आयुक्त रवींद्र कदम ने दो अगस्त को कहा था कि भीमा कोरेगांव हिंसा से माओवादियों के तार जुड़े होने का पता नहीं चला है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि पुणे में एल्गार परिषद के आयोजन में ‘फासीवाद विरोधी मोर्चा’ की भूमिका थी। मौजूदा सरकार की नीतियों के विरोध में माओवादियों ने इस संगठन की स्थापना की थी। हाल ही में कदम का तबादला नागपुर कर दिया गया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा था कि गिरफ्तार लोगों के खिलाफ दस्तावेज और वीडियो फुटेज के रूप में पुलिस के पास पर्याप्त सबूत हैं। इससे पहले, पुलिस ने गिरफ्तार किये गए लोगों पर गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत मामला दर्ज किया था। आईपीसी की धाराओं, 153 ए (दो समुदायों के बीच वैमनस्य, रंजिश बढ़ाने), 505 (एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ भड़काने), 117 (सामान्य लोगों या दस से ज्यादा लोगों द्वारा किया गया अपराध) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत भी उन पर मामले दर्ज किये गए थे।

(एजेंसी इनपुट्स के साथ)

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