ताज़ा खबर
 

बॉस से कमजोर कनेक्शन के चलते बीजेपी ने काटा राम माधव और इन दिग्गजों का टिकट?

माना जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष ने इन भारी-भरकम चेहरों की जगह हल्के-पुलके चेहरों को ज्यादा तवज्जो दी और उन्हें संसद का ऊपरी सदन तक पहुंचाया मगर इसके पीछे पार्टी अध्यक्ष की सियासी सोच और जातीय समीकरण है।

Author April 1, 2018 12:13 PM
पार्टी मुख्‍यालय में भाजपा के संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह। (Photo: PTI)

पिछले दिनों 16 राज्यों से कुल 58 राज्य सभा सांसदों का चुनाव हुआ। इनमें से कुछ दोबारा चुनकर आए मगर कहा जा रहा है कि इस चुनाव से बीजेपी के अंदर खलबली मची हुई है क्योंकि कई नेताओं को उल्लेखनीय काम करने के बावजूद उन्हें इसका इनाम नहीं मिल सका है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी के महासचिव राम माधव, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रवासी भारतीयों को एकजुट किया, उनसे फंड इकट्ठा किया और उनके बीच मोदीजी को लोकप्रिय बनाया। इसके अलावा उन्होंने पूर्वोत्तर की पहाड़ियों में कमल खिलाने में अहम भूमिका निभाई और पार्टी के लिए आधारभूत संरचना का विकास किया, उन्हें भी राज्यसभा का टिकट नहीं दिया गया। कहा जाता है कि जम्मू-कश्मीर में भी पी़डीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने में राम माधव ने सेतु का काम किया था।

राम माधव के अलावा और भी कई वरिष्ठ नेता हैं, जिन्हें मायूस समझा जा रहा है। इनमें पूर्व सांसद और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष बिजय सोनकर शास्त्री भी हैं। भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की अध्यक्ष विजया राहटकर, पार्टी महासचिव और दक्षिण से बीजेपी के बड़े चेहरे पी. मुरलीधर राव, उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले पार्टी महासचिव अरुण सिंह और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी को भी अंदरखाने नाराज बताया जा रहा है। इन लोगों को उम्मीद थी कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इन्हें इनके कामों का इनाम राज्यसभा भेजकर देंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ।

माना जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष ने इन भारी-भरकम चेहरों की जगह हल्के-पुलके चेहरों को ज्यादा तवज्जो दी और उन्हें संसद के ऊपरी सदन तक पहुंचाया मगर इसके पीछे पार्टी अध्यक्ष की सियासी सोच और जातीय समीकरण है। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि अमित शाह से इन नेताओं का कमजोर कनेक्शन भी राज्यसभा नहीं पहुंचने की एक वजह हो सकती है। वैसे अगले चुनावों को देखते हुए दलित-पिछड़े वोटरों का ध्रुवीकरण करने के मकसद से कई दलित-पिछड़े नेताओं को संसद के उपरी सदन तक पहुंचाया गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X