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कोटा केसः आखिर आरक्षण कितनी पीढ़ियों तक चलता रहेगा?- SC ने पूछा

पीठ ने कहा "देश की आजादी के 70 साल गुजर चुके हैं और राज्य सरकारें कई सारी कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। तो क्या मान लिया जाये कि इतने सालों में कोई विकास नहीं हुआ? कोई पिछड़ी जाति आगे नहीं बढ़ी है।"

Supreme Court,Reservation,Maratha quotaसुप्रीम कोर्ट ने पूछा कितनी पीढ़ियों तक नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण जारी रहेगा। (express file photo)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मराठा कोटा मामले की सुनवाई के दौरान पूछा कि कितनी पीढ़ियों तक नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण चलता रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 50 प्रतिशत की सीमा हटाए जाने की स्थिति में पैदा होने वाली असमानता को लेकर भी चिंता प्रकट की।

महाराष्ट्र पर मराठ आरक्षण लागू किये जाने के लिए राजनीतिक दबाव है। इसके लिए सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पैरवी कर रहे हैं। रोहतगी ने जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा कि कोटा की सीमा तय करने पर मंडल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बदली हुई परिस्थितियों में फिर से विचार करने की आवश्यकता है। रोहतगी ने मंडल मामले में फैसले के विभिन्न पहलुओं का हवाला दिया।

उन्होंने कहा कि कोर्ट को बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनजर आरक्षण कोटा तय करने की जिम्मेदारी राज्यों पर छोड़ देनी चाहिए और मंडल मामले से संबंधित फैसला 1931 की जनगणना पर आधारित था। रोहतगी ने कहा कि मंडल फैसले पर पुनर्विचार करने की कई वजह हैं, जो 1931 की जनगणना पर आधारित था, साथ ही, आबादी कई गुना बढ़ा कर 135 करोड़ पहुंच गई है।

इसपर पीठ ने कहा “देश की आजादी के 70 साल गुजर चुके हैं और राज्य सरकारें कई सारी कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। तो क्या मान लिया जाये कि इतने सालों में कोई विकास नहीं हुआ? कोई पिछड़ी जाति आगे नहीं बढ़ी है।” कोर्ट ने कहा कि मंडल से जुड़े फैसले की समीक्षा करने पर जो लोग पिछड़ेपन से जो बाहर निकल चुके हैं। उन्हें आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए।

मुकुल रोहतगी ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का केंद्र सरकार का फैसला भी 50 फीसदी की सीमा का उल्लंघन करता है। इस पर जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस रविंद्र भट की पीठ ने कहा “अगर 50 फीसदी की सीमा या कोई सीमा नहीं रहती है, जैसा कि आपने सुझाया है, तब समानता की क्या अवधारणा रह जाएगी।”

पीठ ने कहा “आखिरकार, हमें इससे निपटना होगा। इस पर आपका क्या कहना है, इससे पैदा होने वाली असमानता के बारे में क्या कहना चाहेंगे। आप कितनी पीढ़ियों तक इसे जारी रखेंगे।” बता दें कि शीर्ष न्यायालय बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले और सरकारी नौकरियों में मराठा समुदाय को आरक्षण देने को कायम रखा गया था।

 

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