scorecardresearch

संस्कृत से रोजगार की अनेक संभावनाएं

संस्कृत की सहजता, आधुनिकता और वैज्ञानिकता को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।

संस्कृत से रोजगार की अनेक संभावनाएं

सस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषा है। भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का अटूट संबंध है। संस्कृत मात्र भाषा न होकर एक संपूर्ण जीवन दर्शन है। इसमें भारतीय संस्कृति के उच्चादर्श, सांस्कृतिक विचार और नैतिक मूल्य समाहित है। संस्कृत की सहजता, आधुनिकता और वैज्ञानिकता को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, यह एक भावना है। हमारा ज्ञान और हमारी बुद्धि ही हमारा धन है सदियों से हमारी सभ्यता को आगे ले जाने और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के आदर्शों को प्राप्त करने की जिम्मेदारी हम सभी पर हैं। संस्कृत भाषा न केवल भारतीय संस्कृति के आदर्शों का ज्ञान करवाती है अपितु संस्कृत का अध्येता रोजगार के क्षेत्र में भी अपार सम्भावनाएं प्राप्त कर सकता है। ये रोजगार के अवसर सरकारी, निजी और सामाजिक सभी क्षेत्रों में उपलब्ध है।

प्रशासनिक क्षेत्र

प्रति वर्ष संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग के विभिन्न पदों के लिए संस्कृत स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं।

प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक (टीजीटी) संस्कृत से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण और अध्यापन में प्रशिक्षण (बीएड) प्राप्त विद्यार्थी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इनका चयन माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य/ ऐच्छिक विषय के रूप संस्कृत अध्यापन के लिए किया जाता है।
स्नातकोत्तर अध्यापक (पीजीटी)
संस्कृत से स्नातकोत्तर (एमए) परीक्षा उत्तीर्ण और अध्यापन में प्रशिक्षण (बीएड) प्राप्त विद्यार्थी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इनका चयन उच्च माध्यमिक विद्यालयों में संस्कृत अध्यापन के लिए किया जाता है।
सेना में धर्म शिक्षक
भारतीय सेना के भर्ती बोर्ड द्वारा समय समय पर अधिकारी स्तर (जेसीओ)धर्म शिक्षक का पद विज्ञापित किया जाता है। संस्कृत से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण और शारीरिक मानदंड को पूर्ण करने वाले अभ्यर्थी इसके पात्र होते हैं।
अनुसंधान सहायक (रिसर्च एसोसिएट)
सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र के विभिन्न शोध-संस्थान शोध कार्य के लिए इनकी नियुक्ति करते हैं। इसके लिए अनिवार्य योग्यता संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर (एमए)/ पीएचडी है।
सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर)
देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालयों में संस्कृत अध्यापन के लिए सहायक आचार्य की नियुक्ति की जाती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा और जेआरएफ उत्तीर्ण अभ्यर्थी इसके लिए पात्र होते हैं।
ज्योतिष एवं वास्तु
संस्कृत के वैकल्पिक विषय के रूप में ज्योतिष एवं वास्तु का विशिष्ट स्थान है दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के अनेक विश्वविद्यालयों में इसका अध्यापन कार्य होता है । गृहवास्तु एवं औद्योगिक वास्तु के रूप में अध्ययन कर इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं।
पौरोहित्य एवं कर्मकांड
वेदों की रचना यज्ञों के लिए हुई और अमुक यज्ञ किस समय संपादित करना है यानी मुहूर्त्त के लिए ज्योतिषशास्त्र की जरूरत होती है। संस्कृत की पौरोहित्य एवं कर्मकांड विधा का अध्ययन कर रोजगार के अवसर सरलता से प्राप्त किए जा सकते हैं।
अभिलेखशास्त्र एवं पुरातत्व विज्ञान
संस्कृत के वैकल्पिक विषय के रूप में अभिलेखशास्त्र एवं पुरातत्वविज्ञान का अध्ययन कर इतिहास के क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर प्राप्त किए जा सकते हैं।
अनुवादक
सामाजिक क्षेत्रों और विभिन्न सरकारी प्रतिष्ठानों में साहित्य एवं विभिन्न भाषा के पत्रों के अनुवाद के लिए इनकी नियुक्ति की जाती है। संस्कृत से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण और अनुवाद में डिप्लोमा करने वाले अभ्यर्थी इसके पात्र होते हैं।
योग शिक्षक
योग के माध्यम से किस प्रकार से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है, इसके लिए सभी निजी और सरकारी संस्थानों में योग शिक्षक की नियुक्ति की जाने लगी है। योग शिक्षा में डिप्लोमा या अन्य उपाधि प्राप्त कर सरलता से देश या विदेश में रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।
पत्रकार एवं समाचार वाचक
संस्कृत से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण व पत्रकारिता में प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थी इसके पात्र होते हैं। डीडी न्यूज चैनल पर प्रसारित संस्कृत वार्ता और वार्तावली की लोकप्रियता से युवाओं का इस ओर आकर्षण बढ़ा है।
दार्शनिक एवं समाज-सुधारक
संस्कृत भाषा चूंकि जीवन दर्शन है और इसमें निहित संस्कारों की अनुपालना कर एक अच्छे समाज का निर्माण किया जा सकता है। ऐसे दार्शनिक और समाज सुधारक के रूप में भी संस्कृत का विशिष्ट महत्त्व है।
संगणक भाषा विज्ञान
चूंकि संस्कृत भाषा कंप्यूटर के लिए आदर्श भाषा है और विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसलिए संस्कृत की इस विधा का भी अध्ययन कर रोजगार के अवसर प्राप्त किए जा सकते हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है संस्कृत न केवल संस्कृत अध्येता को सुसंस्कृत बनाती है अपितु रोजगार के भी अनेक अवसर प्रदान करती है।

  • उमाशंकर (शिक्षक, संस्कृत-विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय)

पढें राष्ट्रीय (National News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट