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रक्षामंत्री ने उठाए न्यायपालिका पर सवाल, कहा- दिए जा रहे हैं ‘निरर्थक’ आदेश

मनोहर पर्रिकर ने कहा, ‘बिना किसी वैज्ञानिक आधार के निरर्थक निर्देश दिए जा रहे हैं। विज्ञान को नहीं समझने वाले कुछ लोगों ने इसका मतलब निकालना शुरू कर दिया है।’

पणजी | Updated: May 30, 2016 9:41 PM
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर (पीटीआई फाइल फोटो)

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सोमवार (30 मई) को न्यायपालिका की आलोचना करते हुए दावा किया कि उसके द्वारा दिए गए कुछ निर्देश ‘निरर्थक’’ और ‘किसी वैज्ञानिक आधार से परे हैं।’ यहां एक सार्वजनिक समारोह में पर्रिकर ने कहा, ‘बिना किसी वैज्ञानिक आधार के निरर्थक निर्देश दिए जा रहे हैं। विज्ञान को नहीं समझने वाले कुछ लोगों ने इसका मतलब निकालना शुरू कर दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं मर्सिडिज बेंज कंपनी के बारे में रिपोर्ट पढ़ रहा था। उन्होंने भारत में निवेश बंद कर दिया है, क्योंकि उनका कहना है कि अदालत के फैसले उनकी समझ से परे हैं। (उनका कहना है) हम डीजल वाहनों को प्रतिबंधित करने का औचित्य समझ नहीं पा रहे हैं।’

पर्रिकर ने कहा, ‘हम समझ सकते हैं कि आप प्रदूषण फैलाने वाले डीजल वाहनों को प्रतिबंधित कर सकते हैं, लेकिन पेट्रोल वाहनों से कम या बिल्कुल प्रदूषण नहीं फैलाने वाले डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का क्या मतलब है।’ सालिगाव-कलंगुते में ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए पर्रिकर ने उपरोक्त बातें कहीं। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कचरा और सीवेज शोधन ‘बड़ा घोटाला’ क्षेत्र है क्योंकि केन्द्रीय योजनाओं के तौर पर हुए निर्माण को भी बिना हिसाब किताब के छोड़ दिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘कचरा और सीवेज शोधन बड़ा घोटाला क्षेत्र है। केन्द्र सरकार की योजनाओं के तहत बने शौचालयों में से 90 प्रतिशत तीन-चार साल के बाद प्रयोग में नहीं रह जाते हैं।’ उन्होंने सवाल किया, ‘कुछ लोग इन शौचालयों का प्रयोग लकड़ियां रखने के लिए करने लगते हैं। कुछ लोग उस उद्देश्य के लिए इसका उपयोग नहीं करते जिस उद्देश्य से इसका निर्माण हुआ है, लेकिन कोई इनका लेखा-जोखा नहीं रख सकता। कोई बिना इस्तेमाल किए कैसे लेखा-जोखा रख सकता है कि शौचालय काम कर रहा है या नहीं?’

मंत्री ने कहा कि कचरा प्रबंधन देश में बहुत बड़ा उद्योग बन गया है। उन्होंने कहा, ‘इस क्षेत्र में निहित स्वार्थ हैं… कैग सबका ऑडिट करता है लेकिन मैंने कभी भी कचरा प्रबंधन का ऑडिट होते नहीं देखा है। कौन कचरे के ढेर में जाने की हिम्मत करेगा?’ सोमवार (30 मई) को जिस ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र का उद्घाटन किया गया है, उसकी शोधन क्षमता 100 टन प्रतिदिन है।

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