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पठानकोट हमले में पाक सरकार से इतर लोग शामिल थे : पर्रीकर

पठानकोट हमले के बारे में सदस्यों के सवालों के जवाब में पर्रीकर ने कहा कि मामले की जांच के लिए एनआइए को निर्देश दिया गया है और वह जांच कर रही है।
Author नई दिल्ली | March 2, 2016 02:40 am
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर (पीटीआई फाइल फोटो)

पठानकोट हमले में पाकिस्तान का परोक्ष समर्थन होने का संकेत देते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने कहा कि हालांकि इसे सरकार से इतर लोगों ने अंजाम दिया, लेकिन वे राज्य के पूर्ण समर्थन के बिना काम नहीं कर सकते। पर्रीकर ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए पूरक सवालों के जवाब में कहा कि पूरा ब्योरा एनआइए जांच पूरी होने के बाद ही आएगा। लेकिन इसमें निश्चित रूप से पाकिस्तान के सरकार से इतर लोग शामिल थे। उन्होंने हालांकि कहा कि राज्य के पूर्ण समर्थन के बिना वे सुचारू रूप से काम नहीं कर सकते। उनसे सवाल किया गया था कि पठानकोट हमला क्या आतंकवादी हमला था या सेना की मदद से उस अभियान को अंजाम दिया गया था?

इस पर रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में सुरक्षा समीक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अन्य बातों के साथ साथ पूरे देश के विभिन्न रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कड़ी करने के लिए उपाय सुझाने की खातिर पूर्व उपसेना प्रमुख की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है।

पठानकोट हमले के बारे में सदस्यों के सवालों के जवाब में पर्रीकर ने कहा कि मामले की जांच के लिए एनआइए को निर्देश दिया गया है और वह जांच कर रही है। मोतीलाल वोरा के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पठानकोट हमले के संबंध में ही ऐसे कोई अभियानगत मुद्दे नहीं हैं जो सुरक्षा एजेंसियों में समन्वय की कमी दर्शाते हों। उन्होंने कहा कि पठानकोट आतंकवादी हमले को नाकाम करने के लिए सेना, वायुसेना और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड द्वारा एक संयुक्त अभियान संचालित किया गया।

पर्रीकर ने कहा कि आतंकवादियों को इस हवाई अड्डे के गैर आवासीय और गैर अभियानगत क्षेत्र तक ही सीमित रखा गया। इस प्रकार उनको भारतीय वायुसेना की सामरिक परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचाने से रोकने में कामयाबी मिली।

सियाचिन में 41 सैनिकों की मौत:

रक्षा मंत्री ने बताया कि साल 2013 से फरवरी 2016 तक सियाचिन ग्लेशियर में 41 सैनिकों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि इस साल 18 फरवरी तक सियाचिन में 14 सैनिकों की जान गई, जबकि 2015 में नौ, 2014 में आठ और 2013 में 10 सैनिक इस ग्लेशियर में मारे गए थे। पर्रीकर ने बताया कि सियाचिन में निगरानी के लिए सेना मानव रहित एरियल व्हीकल, विभिन्न प्रकार के रडार सहित अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करती है।

उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि युद्ध की आशंका, जमीनी हालात और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सियाचिन में केवल आवश्यक सेनाओं की तैनाती की जाती है। एक अन्य सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री ने बताया कि सियाचिन में तैनात सैनिकों को बेहद ठंडी जलवायु वाले वस्त्र सहित विशेष शीत वस्त्र मुहैया कराए जाते हैं ताकि वे अत्यधिक प्रतिकूल तापमान में रह सकें।

रक्षा मंत्री ने बताया कि सियाचिन में कई जगह भूभाग की संरचना और ऊंचाई के कारण एकीकृत आश्रय बनाना मुमकिन नहीं है। ऐसी जगहों को छोड़कर इस ग्लेशियर में तैनात सैनिकों को प्री फैब्रिकेटेड इंसुलेटेड आश्रय (फाइबर रीन्फोर्स्ड प्लास्टिक) मुहैया कराए गए हैं। पर्रीकर ने बताया कि सियाचिन ग्लेशियर में चौकियां विधिवत मानचित्र बनाने के बाद ही बनाई जाती हैं ताकि हिमस्खलनों के खतरे से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसकी नियमित आधार पर समीक्षा की जाती है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि हिमस्खलन की घटना होने पर घटना की निगरानी करने और घटना स्थल तक बचाव दल व उपकरणों को पहुंचाने में समन्वय करने में बेसकैंप सियाचिन पर स्थापित कमान एवं नियंत्रण तंत्र की मुख्य भूमिका होती है। ऐवेलॉन्च विक्टिम डिटेक्टर्स, विशेष पर्वतारोहण उपकरण, बर्फ काटने की मशीन लगाने जैसे बचाव उपकरण लगाने के साथ-साथ पीड़ितों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए ऐवेलॉन्च रेस्क्यू डॉग भी लगाए जाते हैं। हताहतों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाती है। रक्षा मंत्री ने बताया कि सियाचिन के बेस कैंप में एक युद्ध स्मारक है जिसमें राष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सियाचिन में प्राण देने वाले सैनिकों के नाम अंकित किए जाते हैं।

जासूसी के आरोप में गिरफ्तार:

पर्रीकर ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में सेना और वायुसेना के एक-एक कर्मी को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए गए वायुसेना कर्मी का बर्खास्त भी कर दिया गया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि सभी यूनिटों और प्रतिष्ठानों के लिए केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क से नियमित खुफिया कवरेज का रखरखाव किया जा रहा है ताकि विदेशी खुफिया एजेंटों के जासूसी संबंधी प्रयासों को नाकाम किया जा सके।

पर्रीकर ने बताया कि इसके अलावा सैन्य कर्मियों को सोशल मीडिया से पैदा खतरों पर जागरूकता अभियान सहित विदेशी खुफिया एजेंटों की कार्यप्रणाली के बारे में नियमित शिक्षित किया जाता है।

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