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MANN KI BAAT में बोले मोदी-विकलांग को कहें दिव्‍यांग, गरीबों के लिए हो स्टार्टअप इंडिया

पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को आकाशवाणी पर प्रसारित 'मन की बात' कार्यक्रम में कई सुझाव दिए और मांगे।

Author नई दिल्‍ली | Updated: December 27, 2015 4:52 PM

पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कई सुझाव दिए और मांगे। उन्‍होंने योजनाओं को लेकर सरकार का नजरिया भी पेश किया। जानें पीएम मोदी की कही गई बातों के अहम बिंदु

विकलांग नहीं दिव्यांग हैं, कुछ शारीरिक कमी दिखने वाले व्यक्ति
शारीरिक रूप से कुछ कमी वाले व्यक्तियों में विशेष क्षमताएं होने और सरकार द्वारा ऐसे लोगों के लिए खास पहल करने को रेखांकित करते हुए मोदी ने इन लोगों के लिए ‘विकलांग’ की बजाए ‘दिव्यांग’ शब्द के प्रयोग का सुझाव दिया है। मोदी ने कहा, ”परमात्मा ने जिसको शरीर में कोई कमी दी है, कोई क्षति दी है, एक..आध अंग ठीक से काम नहीं कर रहा है… हम उसे विकलांग कहते हैं और विकलांग के रूप में जानते हैं। लेकिन उनके परिचय में आते हैं तो पता चलता है कि हमें अपनी आंखों से उनमें एक कमी दिखती है, लेकिन ईश्वर ने उनको कोई अतिरिक्त ताकत दी होती है। फिर मेरे मन में विचार आया कि आंखों से तो हमें लगता है कि शायद वो विकलांग है, लेकिन अनुभव से लगता है कि उसके पास कोई अतिरिक्त शक्ति है। और तब जाकर मेरे मन में विचार आया, क्यों न हम हमारे देश में विकलांग की जगह पर दिव्यांग शब्द का उपयोग करें।’’

गरीबोन्मुखी ‘स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया’ का खाका
गरीबों और नौजवानों के लिए ‘स्टार्टअप इंडिया’ योजना को बड़ा एवं नवोन्मेषी अवसर बताते हुए मोदी ने कहा कि सरकार अगले वर्ष 16 जनवरी को ‘स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया’ का खाका पेश करेगी। मोदी ने कहा, ‘‘16 जनवरी को भारत सरकार ‘स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया’ की पूरी कार्य योजना पेश करने वाली है। यह कैसे होगा? क्या होगा? क्यों होगा? उसका एक खाका आपके सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देशभर के आईआईटी, आईआईआईएम, सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय, एनआईटी, जहां जहां भी युवा पीढ़ी हैं, उन सबको सीधे सम्पर्क के द्वारा कार्यक्रम में जोड़ा जाएगा।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप के बारे में हमारे यहां एक सोच बंधी बंधाई बन गई है। जैसे डिजिटल दुनिया हो या आईटी पेशा हो, यह स्टार्टअप इन्हीं लोगों के लिए है, ऐसी बात नहीं है। हमें तो उसमें भारत की आवश्यकताओं के अनुसार बदलाव लाना है। गरीब व्यक्ति कहीं मजदूरी करता है, उसको शारीरिक श्रम करना पड़ता है, लेकिन कोई नौजवान एक ऐसी चीज बना दें कि गरीब को मजदूरी में थोड़ी सुविधा हो जाये। मैं इसको भी स्टार्टअप मानता हूं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि क्या भारत स्टार्टअप राजधानी बन सकता है? प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया कुछ शहरों में सीमित नहीं रहना चाहिए, हिन्दुस्तान के हर कोने में फैलना चाहिए।

गरीबों, हकदारों को योजनाओं का सरलता से लाभ सुनिश्चित करना लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि सरकारी योजनाओं को सामान्य व्यक्ति, गरीबों के उद्देश्यों को पूर्ति करने वाला होना चाहिए और उनकी सरकार का पूरा प्रयास है कि हकदार को सरलता से योजनाओं का लाभ मिले। मोदी ने सही, अच्छी और सामान्य लोगों के काम की बातें जनता तक पहुंचने पर जोर दिया। अपने संबोधन में मोदी ने कहा, ‘‘सरकार की योजनाएं तो निरंतर आती रहती हैं, चलती रहती हैं, लेकिन ये बहुत आवश्यक होता है कि योजनाएं हमेशा प्राणवान रहनी चाहिए, वो फाइलों में मृतप्राय नहीं होनी चाहिए। आखिर योजना बनती है सामान्य व्यक्ति के लिए, गरीब व्यक्ति के लिए। पिछले दिनों भारत सरकार ने एक प्रयास किया कि योजना के जो हकदार हैं उनके पास सरलता से लाभ कैसे पहुंचे।’’

सब्‍सिडी सीधे हकदारों तक
उन्होंने कहा कि हमारे देश में गैस सिलेंडर में सब्सिडी दी जाती है, करोड़ों रुपए उसमें जाते हैं लेकिन पहले ये हिसाब-किताब नहीं था कि जो लाभार्थी हैं, यह लाभ उसी के पास पहुंच रहा है या नहीं। उन्हें यह सही समय पर पहुंच रहा है या नहीं। हमारी सरकार ने इसमें थोड़ा बदलाव किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक तरफ आधार कार्ड का अभियान, दूसरी तरफ जनधन एकाउंट खोलना, तीसरी तरफ राज्य सरकार और भारत सरकार का मिल कर के लाभार्थियों की सूची तैयार करना, उनको आधार से और एकाउंट से जोड़ना। ये सिलसिला चल रहा है। मोदी ने कहा कि मनरेगा के पैसों के भुगतान के बारे में बहुत शिकायतें आती थीं। कई स्थानों पर अब वो पैसा सीधा उस मजदूरी करने वाले व्यक्ति के खाते में जमा होने लगे हैं। छात्रों को छात्रवृत्ति में भी कई कठिनाइयां होती थीं, शिकायतें भी आती थीं, उनमें भी अब यह व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है, धीरे-धीरे आगे बढाएंगे।

अधिकारों के साथ कर्तव्यों पर भी उतनी ही चर्चा हो: मोदी
मोदी ने कहा कि संविधान में अधिकारों के साथ कर्तव्य पर भी बल दिये जाने के बावजूद कर्तव्य पर बहुत कम चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि सहज जीवन में भी कर्तव्य पर चर्चा होनी चाहिए और इसे दिनचर्या में शामिल किया जाना चाहिए । प्रधानमंत्री ने लोगों से कर्तव्य विषय पर अपने विचारों को निबंध, कविताएं एवं अभिव्यक्ति के अन्य माध्यमों से भेजने का आग्रह किया। उन्होंने स्कूलों, कालेजों के छात्रों को शैक्षणिक परिसर में महापुरूषों की प्रतिमाओं की साफ सफाई करने का भी सुझाव दिया। मोदी ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा जब चुनाव होते हैं तब चारों तरफ जिक्र होते हैं, दीवारों पर लिखा जाता है और पोस्टर लगा दिए जाते हैं कि मतदान करना हमारा पवित्र कर्तव्य है। मतदान के समय तो कर्तव्य की बात बहुत होती है, लेकिन क्यों न सहज जीवन में भी कर्तव्य की बातें हों।

स्वामी विवेकानंद को समर्पित कार्यक्रम पर सुझाव मांगे
मोदी ने अगले साल जनवरी में छत्तीगढ़ में स्वामी विवेकानंद को समर्पित राष्ट्रीय युवा महोत्सव पर लोगों खासकर युवाओं से सुझाव मांगे। मोदी ने कहा, ”12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जी की जयंती है। मेरे जैसे इस देश के कोटि-कोटि लोग हैं, जिनको स्वामी विवेकानंद जी से प्रेरणा मिलती रही है। साल 1995 से 12 जनवरी को एक राष्ट्रीय युवा महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष ये 12 जनवरी से 16 जनवरी तक छत्तीसगढ के रायपुर मे होने वाला है। इसमें विषय आधारित कार्यक्रम होता है और मुझे जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक, इस बार उनका विषय ‘कौशल विकास एवं सौहार्द पर भारतीय युवा’ है और यह बहुत बढिया विषय है। मुझे बताया गया है कि सभी राज्यों से, हिंदुस्तान के कोने-कोने से, 10 हजार से ज्यादा युवा इकट्ठे होने वाले हैं। इस कार्यक्रम में एक प्रकार से सपनों की बाढ़ नजर आने वाली है, संकल्प का एहसास होने वाला है। इस युवा महोत्सव के संबंध में क्या आप मुझे अपने सुझाव दे सकते हैं?’’

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