जब मनमोहन सिंह को अचानक आया नरसिम्हा राव का फोन, बोले- वहां क्या कर रहे हो, घर जाओ और तैयार होकर राष्ट्रपति भवन आओ

Manmohan Singh Birthday: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का आज (26 सितंबर) जन्मदिन है, उन्हें भारत में आर्थिक सुधारों का सूत्रधार कहा जाता है।

manmohan singh narasimha rao
पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के साथ मनमोहन सिंह (Photo Source- Express Archive)

Manmohan Singh Birthday : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का आज (26 सितंबर) जन्मदिन है, उन्हें भारत में आर्थिक सुधारों का सूत्रधार कहा जाता है। 1990 के दशक में उदारीकरण की नीतियों के जरिए मनमोहन सिंह भारतीय अर्थव्यवस्था का संकट से उबारा था। डॉक्टर मनमोहन सिंह (Manmohan Singh), पीवी नरसिम्हाराव सरकार में वित्तमंत्री रहे थे। उनके वित्त मंत्री बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। इसका जिक्र पूर्व गृह सचिव सीजी सोमैया ने अपनी आत्मकथा ‘द ऑनेस्ट ऑलवेज स्टैंड अलोन’ में किया है। वह बताते हैं कि उन दिनों मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में काम करते थे।

22 जून 1991 में वह UGC के दफ्तर में बैठे हुए थे, अपने कुछ कर्मियों के साथ चर्चा कर रहे थे। उसी दिन पीवी नरसिम्हा राव शपथ लेने वाले थे। उसी समय फोन आया, लाइन पर दूसरी तरफ नरसिम्हा राव थे। उन्होंने मनमोहन सिंह से पूछा कि आप कहां हैं, तो उन्होंने बताया कि मैं बहादुर शाह जफर स्थित यूजीपी के दफ्तर में बैठा हूं। नरसिम्हा राव ने अधिकार भरी डांट के साथ कहा, तुम वहां क्या कर रहे हो, तुरंत घर जाओ और तैयार होकर राष्ट्रपति भवन आ जाओ। इसी के एक महीने और दो दिनों के बाद मनमोहन सिंह ने बतौर वित्त मंत्री, देश में आर्थिक सुधारों का ऐलान किया था।

मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) अपनी सादगी और साफगोई के लिए भी जाने जाते हैं, उनके इसी अंदाज के चलते राजीव गांधी नाराज हो गए थे। किताब के अनुसार 1985 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे तो उन्होंने मनमोहन सिंह की आर्थिक काबिलियत को देखते हुए उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष बना दिया और प्रधानमंत्री होने के नाते इसके अध्यक्ष बन गए। मनमोहन सिंह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ज्यादातर प्रोजेक्ट को खारिज कर दिया करते थे। जिससे ऊब कर राजीव गांधी ने योजना आयोग को ‘जोकरों का गिरोह’ करार दे दिया था। उन्होंने कहा था कि यह गिरोह, विकास से जुड़े किसी भी विचार को रद्द कर देता है।

मनमोहन सिंह, राजीव गांधी की इस टिप्पणी से बेहद आहत हुए थे और इस्तीफा देने की तैयारी करने लगे थे। सोमैया अपनी किताब में बताते हैं कि मनमोहन सिंह अपना इस्तीफा देना चाहते थे लेकिन मैंने उन्हें किसी तरह समझाया। पूर्व गृह सचिव की सलाह पर मनमोहन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा तो नहीं दिया लेकिन इसके बाद वह हाशिये पर रहने लगे। इसके बाद मनमोहन सिंह को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग भेज दिया गया था।

मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) का कद पार्टी में 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद तेजी से बढ़ा, 2004 में उनके प्रधानमंत्री बनाए जाने का जिक्र पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम अपनी किताब ‘टर्निंग पॉइंट्स’ में करते हैं। किताब में उन्होंने लिखा कि पीए की जीत के बाद राष्ट्रपति भवन ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने से संबंधित चिट्ठी भी तैयार कर ली थी। लेकिन जब सोनिया गांधी उनसे मिलीं और डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे किया तो वह चकित रह गए थे। बाद में दोबारा चिट्ठी तैयार करानी पड़ी थी।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट