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कोयला घोटाले में मनमोहन सिंह भी आरोपी

कोयला खदान आबंटन घोटाले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख को आरोपी के रूप में समन जारी किए। अदालत ने टिप्पणी की कि सिंह को वर्ष 2005 में तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक आबंटन में मेसर्स हिंडाल्को को ‘समायोजित’ करने […]

Author March 12, 2015 12:16 PM
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोयला घोटाले में अदालत से समन

कोयला खदान आबंटन घोटाले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख को आरोपी के रूप में समन जारी किए। अदालत ने टिप्पणी की कि सिंह को वर्ष 2005 में तालाबीरा-2 कोयला ब्लॉक आबंटन में मेसर्स हिंडाल्को को ‘समायोजित’ करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र में शामिल किया गया था। अदालत ने इस मामले को बंद करने की सीबीआइ की रपट अस्वीकार करते हुए मेसर्स हिंडाल्को और उसके दो शीर्ष अधिकारियों शुभेंदु अमिताभ और डी भट्टाचार्या को भी मामले में आरोपी के रूप में तलब किया।

विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पराशर ने अपने 73 पृष्ठ के आदेश में कहा, ‘प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आपराधिक षड्यंत्र की रूपरेखा शुभेंदु अमिताभ , डी भट्टाचार्य और कुमार मंगलम बिड़ला और मेसर्स हिंडाल्को ने तैयार की थी जिसे सचिव (कोयला) पीसी पारख और उसके बाद तत्कालीन कोयला मंत्री मनमोहन सिंह को संलिप्त करके आगे बढ़ाया गया।

अदालत ने कहा, यद्यपि उपरोक्त व्यक्तियों की कार्रवाई से यह भी प्रथमदृष्टया स्पष्ट है कि हालांकि सचिव कोयला (पारख) और कोयला मंत्री (सिंह) अलग अलग भूमिकाएं निभा रहे थे, लेकिन मेसर्स हिंडाल्को को किसी भी तरह से तालाबीरा-दो कोयला ब्लॉक में समायोजित करने का सामूहिक प्रयास किया गया। अदालत ने कहा, उस आपराधिक षड्यंत्र का केंद्रीय सामूहिक मकसद था, जिसकी सभी को जानकारी थी।

इस मामले में दोषी पाए जाने पर आरोपियों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है, क्योंकि अदालत ने आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी कर्मचारी, बैंकर, व्यापारी या एजंट द्वारा अमानत में खयानत अपराधों का भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत संज्ञान लिया है। अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा कि वे दुखी हैं, लेकिन साथ ही यह विश्वास जताया कि निष्पक्ष सुनवाई में सच्चाई सामने आएगी।

आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को ने कहा कि बिड़ला सहित उसके किसी भी अधिकारी ने कोयला ब्लाक का आबंटन हासिल करने के लिए कोई गैरकानूनी या अनुचित तरीका नहीं अपनाया। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वह अदालत के आदेश का विस्तार से अध्ययन करेगी और ‘अपने पक्ष का कानूनी तरीके से बचाव करेगी।’ पारख ने अदालत की ओर से उन्हें जारी समन पर आश्चर्य जताया और कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत या गैरकानूनी नहीं किया है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी पूर्व प्रधानमंत्री को किसी आपराधिक मामले में आरोपी के रूप में सम्मन किया गया है। दिवंगत प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव को भी एक आरोपी बनाया गया था और तीन अलग-अलग मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए थे जिसमें झामुमो सांसद रिश्वत मामला भी शामिल था। यद्यपि वे उन सभी में बरी हो गए थे।
विशेष अदालत ने सिंह और अन्य को आठ अपै्रल को तलब किया है। अदालत ने कहा कि सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय के दो अधिकारियों की चेतावनी को नजरंदाज करके पारख के रखे गए उस प्रस्ताव को मंजूर किया था, जिसमें हिंडाल्को को तालाबीरा दो और तीन कोयला ब्लाक में समायोजित किया गया था।

न्यायाधीश ने कहा, एक बार फिर पीसी पारख की ओर से आगे बढ़ाए गए 12 सितंबर 2005 की तिथि वाले नोट को पीएमओ के दो अधिकारियों के वी प्रताप और जावेद उस्मानी की पहले से ही स्वीकृत दिशानिर्देशों में ढील देने संबंधी चेतावनी को नजरंदाज करके मेसर्स हिंडाल्को को तालाबीरा- 2और तीन कोयला ब्लाक में समायोजित किया गया। उनकी (सिंह की) मंजूरी एक बार फिर प्रथमदृष्टया यह दिखाती है कि उनकी ओर से मेसर्स हिंडाल्को को तालाबीरा-दो कोयला ब्लाक में किसी तरह से समायोजित करने का यह सोच समझकर किया गया प्रयास था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उसने सिंह और पारख के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत अपराधों का संज्ञान लिया है। न्यायाधीश ने कहा कि सिंह और पारख के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला चलाने के लिए पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
न्यायाधीश ने कहा, यह भी उल्लेख करना उपयुक्त होगा कि जांच अधिकारी द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट के अनुसार डॉ मनमोहन सिंह यद्यपि वर्तमान समय में राज्यसभा के सदस्य हैं, लेकिन जिस समय वे कोयला मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे थे, उस समय उनका राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया था। न्यायाधीश ने कहा, तत्कालीन कोयला सचिव पीसी पारख के बारे में भी बताया गया है कि वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन परिस्थितियों में उनके खिलाफ अपराधों का भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत संज्ञान लेने के लिए कोई पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

अदालत ने कहा कि बिड़ला ने तालाबीरा-2 कोयला ब्लाक का आबंटन हिंडाल्को के पक्ष में सुनिश्चित करने के लिए एक ‘सक्रिय भूमिका’ निभाई और इसके लिए अपने नौकरशाह और राजनीतिक जरिए का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि प्रथमदृष्टया षड्यंत्र की रूपरेखा शुभेंदु अमिताभ और डी भट्टाचार्य ने बनाई जिसमें बाद में बिड़ला भी शामिल हो गया ताकि नौकरशाही और राजनीतिक जरिए का इस्तेमाल किया जा सके।

विशेष अदालत ने कहा: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा हिंडालको को कोयला ब्लॉक आबंटन की मंजूरी दिए जाने से इस निजी कंपनी को छप्परफाड़ फायदा हुआ, नतीजतन सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी नेवेली लिग्नाइट कोरेपोरेशन लिमिटेड (एनएलसी) को घाटा उठाना पड़ा। अदालत ने कहा कि सिंह ने जो मंजूरी दी वह स्थापित प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए दी। अदालत ने यह भी कहा कि सिंह ने कोयला मंत्रालय अपने पास रखा था और प्रथमदृष्टया वे यह दावा भी नहीं कर सकते हैं कि उनसे यह उम्मीद नहीं लगाई जा सकती कि हर मामले के पूरे ब्योरे की खबर रखें।

 

 

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