Manjhi to Nitish Kumar: Did not back-stab, work on my agenda for welfare of poor - Jansatta
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मांझी ने अभी भी अपने कमरे में लगा रखी है नीतीश की तस्वीर

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जीतन रात मांझी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार की पीठ में छुरा नहीं मारा लेकिन कुमार ने जरूर उन्हें कमीशनखोर बिचौलियों के प्रभाव में आकर समय से पहले हटा दिया। रविवार को चौथी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे नीतीश को […]

Author February 22, 2015 11:24 AM
मांझी की साफगोई: भाजपा में शामिल होने की बात से इनकार करते हुए मांझी ने गरीबों के लिए काम करने वाली नई पार्टी बनाने का संकेत दिया।

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जीतन रात मांझी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार की पीठ में छुरा नहीं मारा लेकिन कुमार ने जरूर उन्हें कमीशनखोर बिचौलियों के प्रभाव में आकर समय से पहले हटा दिया। रविवार को चौथी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे नीतीश को बधाई देते हुए कभी उनके विश्वासपात्र रहे मांझी ने कहा कि वह भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश जी की फोटो अभी भी मेरे कमरे में लगी हुई है। वह हमें वंचित और गरीबों की समस्याओं के लिए अभियान छेड़ने की याद दिलाती है।

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के फैसले को सही बताते हुए मांझी ने कहा, ‘मैंने नीतीश जी के खिलाफ बागी तेवर तभी अपनाए जब मुझे लगा कि उनकी मंशा गरीब और दबे-कुचले लोगों के लिए सिर्फ नारे देने की है।’ उन्होंने कहा, ‘नीतीश जी की फोटो अभी भी मेरे कमरे में लगी हुई है। वह हमें वंचित और गरीबों की समस्याओं के लिए अभियान छेड़ने की याद दिलाती है। लेकिन मेरे मन में उनके लिए अब आदरभाव तभी उत्पन्न होगा जब वे गरीबों और दबे-कुचलों के लिए बने एजंडों को मूर्त रूप देंगे।’ अनुसूचित जाति और जनजाति, पांच एकड़ तक भूमि रखने वाले किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त देने, साइकिल और पोशाक योजना का लाभ पाने के लिए छात्र-छात्राओं के लिए 75 फीसद अनिवार्य उपस्थिति को कम करने सहित मांझी ने अपने कार्यकाल में लिए गए अन्य फैसलों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘यदि नीतीश जी मेरे द्वारा तय किए गए एजंडों को पूरा करते हैं तो मैं उनका धन्यवाद करुंगा। ऐसा नहीं होने पर उन्हें बेनकाब करने के लिए जनता के बीच जाऊंगा।’ मांझी ने समय के गतिमान रहने को साश्वत सत्य बताते हुए कहा,‘कल मेरे पास पहनने के कपडेÞ नहीं थे लेकिन आज भरपूर कपड़ा है, आने वाले दिनों में हालात कुछ और होंगे। परिवर्तन होते रहते हैं। नदी की धारा बदलती रहती है।’

विश्वास मत से पहले मांझी ने दिया इस्तीफा

यह पूछने पर कि नीतीश ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी चुना और उन्होंने उनकी पीठ में छुरा मार दिया, जीतन राम मांझी ने इससे इनकार करते हुए कहा, ‘गरीब खुद मार खाता है। वह दूसरों की पीठ में छुरा क्या मारेगा।’ भाजपा में शामिल होने की बात से इनकार करते हुए मांझी ने गरीबों के लिए काम करने वाली नई पार्टी बनाने का संकेत जरूर दिया। मांझी ने कहा, ‘मैं स्वतंत्र विचार वाला व्यक्ति हूं। मैं अपने तय मार्ग पर चलूंगा। मदद सिर्फ उन दलों से लूंगा जो मेरे विचारों से सहमत हों, फिर चाहे वह भाजपा हो या नीतीश कुमार।’ उन्होंने आगे की रणनीति तय करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं की बैठक 28 फरवरी को पटना में बुलाई है। मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को उनका समर्थन करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने धार्मिक असहिष्णुता को लेकर बड़ी बात कही है जिससे लगता है कि वे भाजपा का चरित्र बदल रहे हैं।

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद तनावमुक्त दिख रहे मांझी के साथ उनके आवास पर आज जद (एकी)के बागी विधायक राजीव रंजन और रविंद्र राय, निर्दलीय विधायक पवन जायसवाल, राजद प्रमुख लालू प्रसाद की पत्नी के भाई साधु यादव और जद (एकी) के पूर्व बागी सांसद शिवानंद तिवारी उपस्थित थे। मांझी ने कहा कि उन्होंने जिनके लिए आवाज उठाई वे रोष में हैं। रविवार को वे विरोधस्वरूप भूख हड़ताल करेंगे। नीतीश रविवार को ही मुख्यमंत्री पद का शपथ लेने वाले हैं।

मांझी हुए रोमांटिक, कहा: दूसरे की पत्नी से अफेयर में बुराई क्या? 

घर वापसी के सवाल पर मांझी ने कहा कि भविष्य में क्या होगा वे नहीं जानते। उन्होंने राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर उंगली उठाते हुए कहा कि जब हमें मुख्यमंत्री बनाया गया था तो वे इसकी यह कहते हुए तारीफ करते थे कि एक दलित और गरीब को उच्च पद पर आसीन किया गया है। लेकिन नीतीश के उन्हें हटाने के अभियान में वे कैसे शामिल हो गए। नीतीश की लालू के प्रति कटुता जगजाहिर है। ऐसे में इन दिनों दोनों के बीच मधुर संबंध अनुसंधान का विषय है।

 

 

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