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मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र की धौंस से नहीं डरेगी आप सरकार

सत्ता में आने के सौ दिन पूरे करने वाली आप सरकार ने रविवार को केंद्र सरकार पर हल्ला बोला। उस पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मामले में पूरी तरह से अपने रुख से पलट जाने का आरोप लगाया। पार्टी ने संकेत दिया कि वह एक संकल्प पेश कर सकती है, जिसमें उपराज्यपाल को निर्बाध अधिकार दिए जाने वाली ‘अंसैवधानिक’ अधिसूचना को खारिज किया जाएगा।

Author May 25, 2015 8:49 AM
हम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने आए हैं, केंद्र हमारे साथ दादागीरी कर रहा है : मनीष सिसोदिया

सत्ता में आने के सौ दिन पूरे करने वाली आप सरकार ने रविवार को केंद्र सरकार पर हल्ला बोला। उस पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मामले में पूरी तरह से अपने रुख से पलट जाने का आरोप लगाया। पार्टी ने संकेत दिया कि वह एक संकल्प पेश कर सकती है, जिसमें उपराज्यपाल को निर्बाध अधिकार दिए जाने वाली ‘अंसैवधानिक’ अधिसूचना को खारिज किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आप सरकार समझौता नहीं करेगी। केंद्र दिल्ली पर शासन चलाने की चेष्टा कर रहा है और संघीय ढांचे का उल्लंघन कर रहा है। सिसोदिया ने यह भी कहा कि आप सरकार केंद्र की धौंस पर चुप नहीं बैठेगी।

दिल्ली विधानसभा के मंगलवार से शुरू होने जा रहे दो दिवसीय आपात सत्र से पहले रविवार को पार्टी विधायकों की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक हुई। विधायकों ने उनके अधिकारों में केंद्र के हस्तक्षेप की आलोचना की, जिससे विधानसभा सत्र का रुख स्पष्ट हो गया है। पार्टी के 70 सदस्यीय विधानसभा में 67 सदस्य हैं।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के खिलाफ संकल्प लाए जाने के मुद्दे पर भले ही विधायकों ने आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया हो लेकिन सूत्रों ने कहा कि इस तरह के कदम की बहुत अधिक संभावना है। सिसोदिया ने आरोप लगाया-मोदी ने खुद कहा है और उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात अपने घोषणापत्र में कही है। अब, जब यह मुद्दा उठा है, हमारा अधिकार मिलना चाहिए। इसके बारे में बात करने के बजाय वे दादागीरी दिखा रहे हैं। दिल्ली सरकार इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें आगामी सत्र से उम्मीदें हैं क्योंकि विधानसभा सरकार की जननी होती है और यह सर्वोच्च व सर्वाधिक अधिकारसंपन्न निकाय है। पिछले साल लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आई तो दिल्ली को पूर्ण राज्य घोषित करेगी और उसने ध्यान दिलाया था कि ऐसा होने पर विभिन्न एजंसियों के बीच समुचित तालमेल तय करने में मदद मिलेगी। भाजपा ने दिल्ली में लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ करते हुए भारी अंतर से सभी सातों सीटें जीती थीं।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य के अधिकार तब तक नहीं दिए जा सकते जब तक कि इस मुद्दे पर देश भर में आम सहमति नहीं बन जाती क्योंकि यह मामला राष्ट्रीय राजधानी से जुड़ा है।

सिसोदिया ने सवाल किया कि भाजपा केजरीवाल व मोदी के बीच मुकाबले को लेकर इतनी भयभीत क्यों है। उन्होंने कहा-हमें उम्मीद है कि हम अगले विधानसभा सत्र में जनलोकपाल विधेयक पेश कर देंगे। हमने किसी वरिष्ठ व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ जांच को रोका नहीं है। अंबानी (मुकेश) के खिलाफ मामले को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

आप सरकार ने अपने पहले शासनकाल में प्राकृतिक गैस मूल्य वृद्धि के लिए कथित सांठगांठ के कारण एम वीरप्पा मोइली, मुरली देवड़ा और आरआइएल प्रमुख मुकेश अंबानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। सिसोदिया ने कहा कि हम काम करने के साथ-साथ लड़ भी रहे हैं और दिल्लीवासी सरकार के काम से खुश हैं।

सिसौदिया ने आरोप लगाया-दिल्ली में तबादला तैनाती उद्योग चलाने वाले अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति कर रहे हैं। हम काम करने के साथ-साथ लड़ भी रहे हैं। लोगों ने हमें शतरंज खेलने या इन विश्वासघातियों की बांह में बांह डालकर घूमने के लिए नहीं चुना है।

वरिष्ठ नौकरशाह शकुंतला गैमलिन को उपराज्यपाल के कार्यवाहक मुख्य सचिव बनाने को लेकर आप सरकार व नजीब जंग के बीच अधिकारों की जंग शुरू हो गई। केंद्र ने दो दिन पहले एक अधिसूचना जारी कर नौकरशाहों की नियुक्ति में उपराज्यपाल को निर्बाध अधिकार दिए और स्पष्ट किया कि उन्हें पुलिस व जन व्यवस्था जैसे विषयों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री से सलाह लेने की जरूरत नहीं है।

आप सरकार ने कानूनी मार्ग के विकल्प को भी खुला रखा है। इसकी पुष्टि करते हुए विधायक अलका लांबा ने कहा-अगर विधानसभा अदालत जाने का फैसला करती है तो हम अदालत में जाएंगे। आप उपराज्यपाल का इस्तेमाल कर एक निर्वाचित सरकार को पर्दे के पीछे से नहीं चला सकते।

मुख्यमंत्री के आवास पर एक घंटे तक चली बैठक में विधायकों ने मांग की कि उन्हें गृह मंत्रालय की अधिसूचना के बारे में सार्वजनिक तौर पर बोलने की इजाजत दी जानी चाहिए। इस अधिसूचना में उपराज्यपाल को नौकरशाहों की नियुक्ति और पुलिस व जन व्यवस्था के मुद्दों पर निर्बाध अधिकार दिए गए हैं।

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