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मणिपुर : कांग्रेस के चार विधायक भाजपा में शामिल, हिमंत विस्वा शर्मा ने कहा- पूर्वोत्तर हो रहा है कांग्रेस मुक्त

मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. भाबनंदा ने कांग्रेस के पाला बदलने वाले विधायकों का भाजपा दफ्तर में स्वागत किया।
भाजपा के रणनीतिकार माने जाने वाले असम के मंत्री हिमंत विस्वा शर्मा (File Photo)

मणिपुर में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या में शुक्रवार (28 अप्रैल) को इजाफा हो गया। कांग्रेस के चार और तृणमूल कांग्रेस के इकलौते विधायक ने पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया। तृणमूल कांग्रेस के रोबिंदफ्रो सिंह और कांग्रेस के वाई सुरचंद्र, एन हाओकिप, ओ लुखोई और एस बिरा को भाजपा में शामिल कराया गया। अतीत में कांग्रेस के टी. श्यामकुमार और जी. सुआनहाउ पाला बदलकर सत्ताधारी दल के साथ हो चुके हैं। पूर्वोत्तर में भाजपा के रणनीतिकार माने जाने वाले असम के मंत्री हिमंत विस्वा शर्मा ने कहा, ‘हम त्रिपुरा और मेघालय में भी भाजपा की सरकार बनाने की तैयारी में हैं।’

मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. भाबनंदा ने कांग्रेस के पाला बदलने वाले विधायकों का भाजपा दफ्तर में स्वागत किया। इस घटनाक्रम पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष टीएन हाओकिप ने कहा, ‘चुनाव के बाद चीजें बदली हैं। मित्र शत्रु बन गए हैं। यहां कोई सिद्धांत या विचार नहीं है। जो लोग दूसरी पाटिर्यों में शामिल हो रहे हैं, उन्हें अयोग्य ठहराए जाने का डर नहीं है।’

विधानसभा अध्यक्ष वाई. खेमचंद्र के पास विधायक श्मामकुमार और सुआनहाउ को अयोग्य ठहराए जाने की कांग्रेस की याचिकाएं पड़ी हुई है। जबकि, मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोगों का भरोसा बढ़ रहा है और लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं।’

पूर्वोत्तर में भाजपा के रणनीतिकार माने जाने वाले असम के वरिष्ठ मंत्री और पूर्व कांग्रेसी हिमंत विस्वा शर्मा ने कांग्रेसी विधायकों के भाजपा में शामिल होने को लेकर कहा, ‘कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक दिन पहले ही बैठक कर पूर्वोत्तर में कांग्रेस को मजबूत करने की जरूरत बताई थी। एक दिन बाद ही कांग्रेसी विधायकों के टूटने से स्पष्ट हो गया है कि लोगों ने पूर्वोत्तर को कांग्रेस मुक्त करना शुरू कर दिया है।’

हिमंत विस्वा शर्मा ने दो साल पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। तब उन्होंने राहुल गांधी पर तीखे आरोप लगाए थे। मणिपुर में बहुमत न होने के बावजूद वहां भाजपा की सरकार बनवाने के लिए हिमंत ने ही स्थानीय दलों से समर्थन के पत्र तैयार करा लिए थे। साथ ही कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने के लिए संपर्क साधे रहे।

विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा में शामिल होने वाले टी. श्यामकुमार पहले कांग्रेसी विधायक थे। उन्हें 15 मार्च को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। विधायक जी. सुआनहाउ उनके बाद भाजपा में शामिल हुए। मार्च में हुए चुनाव में 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस ने 28 सीटें हासिल की थी। वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। लेकिन 21 सीटें हासिल करने वाली भाजपा ने दूसरी पाटिर्यों के साथ मिलकर सरकार बना ली। बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान बिरेन सिंह सरकार को 32 वोट मिले थे।

दरअसल, मणिपुर में भाजपा ने विधानसभा की त्रिशंकु स्थिति का लाभ उठाया। उसने नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार-चार विधायकों, एक निदर्लीय और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा), तृणमूल कांग्रेस के एक-एक विधायकों के साथ मिलकर सरकार बना ली। तब साथ देने वाले तृणमूल के विधायक शुक्रवार को औपचारिक तौर पर भाजपा में शामिल हो गए।

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