Manipur News: मणिपुर के इंफाल में 2023 में हुई हिंसा में जोमी विधायक वुंगजागिन वाल्टे घायल हो गए थे। इस साल फरवरी में उनकी मौत हो गई। मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह शनिवार को विधायक के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि वे अपने सबसे करीबी दोस्तों में से एक के साथ उस वक्त मौजूद नहीं थे। सीएम ने कहा कि अक्सर सोचते हैं कि अगर वे वहां होते, तो यह दुखद घटना टल सकती थी।

खेमचंद सिंह हेलीकॉप्टर से चुराचांदपुर पहुंचे। मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से कुकी-जो बहुल इलाके में मुख्यमंत्री का यह पहला दौरा था। इसके बाद वे वाल्टे के घर गए। वाल्टे थानलोन से तीन बार विधायक रहे थे और 10 कुकी-जोमी विधायकों में से एक थे। हालांकि, कुकी इनपी मणिपुर और कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन जैसे कुछ कुकी-जो समूहों ने इस दौरे का विरोध किया था।

वाल्टे मेरे करीबी दोस्त थे- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाल्टे उनके करीबी दोस्त थे और जिस शाम भीड़ ने उन पर हमला किया, वह उनकी जिंदगी के सबसे बड़े पछतावे में से एक है। 4 मई 2023 को हिंसा भड़कने के एक दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के सलाहकार वाल्टे पर हमला हुआ। इसकी वजह से उनकी कई हड्डियां टूट गईं।

जबड़े को सहारा देने के लिए टाइटेनियम प्लेट लगाने के बाद बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था, लेकिन वे कभी ठीक नहीं हो पाए और 21 फरवरी को गुड़गांव के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया।

मुख्यमंत्री ने विधायक संग आखिरी मुलाकात याद की

खेमचंद ने गमगीन लोगों के बीच कहा, “आज केंद्रीय गृह मंत्री के साथ मेरी वीडियो कॉन्फ्रेंस है। वरना, मैं सड़क मार्ग से वाल्टे के अंतिम संस्कार में शामिल होने जाता। वाल्टे नेक दिल इंसान और मेरे करीबी दोस्त थे। जब मैं पहली बार चुना गया और स्पीकर बना, तो वे मेरे सबसे करीबी दोस्तों में से एक थे। मुझे आज भी 4 मई, 2023 को हुई हमारी आखिरी मुलाकात याद है। हम (विधायक) हालात को काबू में लाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए मिले थे। बैठक के बाद, मैं खाना खाने चला गया, क्योंकि मेरा घर मुख्यमंत्री के बंगले से दूर नहीं है। वाल्टे और कुछ अन्य लोग वहीं रुक गए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “वह शाम मेरी जिंदगी के सबसे बड़े पछतावों में से एक है। मुझे अक्सर लगता है कि अगर मैं उस समय उनके साथ होता, तो शायद वह दुर्भाग्यपूर्ण घटना न हुई होती। मुझे 3 मई, 2023 को हुई हमारी (विधायकों की) बैठक भी याद है। उस शाम बैठक के बाद, नेमचा किपजेन ने तुरंत निकलने की जिद की। मैंने उन्हें यात्रा न करने की सलाह दी क्योंकि बाहर हालात बहुत खतरनाक थे।”

सीएम ने आगे कहा, “वह रात भर रुकीं और अगली सुबह सुरक्षा घेरे में सुरक्षित निकल गईं। दुर्भाग्य से, 4 मई को मैं वाल्टे के साथ नहीं था कि उन्हें सलाह दे पाता या उनके साथ जा पाता। इस बात का मुझे हमेशा अफसोस रहेगा। मैं उन्हें और उनके परिवार को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि मैं हर तरह से हर संभव मदद और समर्थन देता रहूंगा।”

केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग

63 साल के वाल्टे का शव चुराचांदपुर लाए जाने के बाद उनके परिवार और जोमी काउंसिल ने अंतिम संस्कार को कुछ समय के लिए टालने और उनके शव को चुराचांदपुर मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में सुरक्षित रखने का फैसला किया। हमले के मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग की जा रही है।

जोमी काउंसिल के एक नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि शनिवार को वाल्टे का अंतिम संस्कार करने का फैसला परिवार की इच्छा के अनुसार लिया गया। नेता ने कहा, “यह निजी कारणों से है। उनकी पत्नी की तबीयत काफी खराब है और अगर शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया तो उन पर मानसिक रूप से बुरा असर पड़ेगा। यही मुख्य कारण है।”

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मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार को तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसकी वजह यह रही कि कुकी-जो प्रदर्शनकारियों ने कांगपोकपी और इम्फाल पश्चिम जिलों की सीमा पर प्रदर्शन किया और कांगपोकपी में राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के रास्ते आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने की मांग की। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…