ताज़ा खबर
 

पूर्व फुटबॉलर एन बीरेन सिंह बने मणिपुर के पहले भाजपाई सीएम, चार महीने पहले ही छोड़ी थी कांग्रेस

मणिपुर भाजपा विधायक दल के नेता एन बीरेन सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं।

पूर्व कांग्रेसी नेता एन बीरेन सिंह ने 15 मार्च को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके नेतृत्व में राज्य में पहली बार भाजपा सरकार बन गई है। एन बीरेन सिंह पूर्व फुटबॉलर हैं। उन्होंने अपनी कैबिनेट में आठ मंत्रियों को जगह दी है। आठों ने भी बीरेन सिंह के साथ शपथ ली। गोवा की तरह ही मणिपुर में भी बीजेपी ने छोटी पार्टियों को साथ मिलाकर सरकार बनाई है।

सोमवार (13 मार्च) को उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था। लगातार 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे ओ इबोबी सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 60 सदस्यों वाली मणिपुर विधान सभा में कांग्रेस के 28, भाजपा के 21, एनपीएफ के 4 एवं अन्य दलों के सात विधायक चुनाव जीतकर सदन पहुंचे हैं। राज्य में बहुमत के लिए 31 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। भाजपा का दावा है कि 32 विधायक उसके साथ हैं।

राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर रहे 56 वर्षीय नॉन्गथोमबाम बीरेन सिंह ने अपना राजनीतिक करियर 2002 में डेोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी (डीआरपीपी) नामक नई पार्टी के टिकट पर विधायक का चुनाव जीतकर शुरू किया था। डीआरपीपी ने 2002 के राज्य विधान सभा चुनाव में 23 उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से केवल दो को जीत मिली थी। इन दो विधायकों में एक बीरेन सिंह थे। चुनाव जीतने के बाद बीरेन और उनकी पार्टी कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा बन गए। बीरेन इबोबी सिंह सरकार में मंत्री बनाए गए। साल 2004 के लोक सभा चुनाव से पहले डीआरपीपी  का कांग्रेस में विलय हो गया। 2007 में बीरेन पहली बार कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर विधान सभा चुनाव लड़े और जीते।

N Biren, Oinam Anand, Manipur, Congress, BJP मणिपुर चुनाव में बीजेपी का चेहरा बने एन बीरेन अपने दफ्तर में। (तस्वीर- ओनम आनंद)

नए काम में हाथ डालने और जोखिम लेने के मामले में बीरेन हमेशा से आगे रहे हैं। पेशेवर फुटबॉल से अलग होने के बाद बीरेन ने बिल्कुल अलग राह लेते हुए स्थानीय भाषा में एक दैनिक अखबार की शुरुआत की। अखबार चलाने के लिए उन्होंने अपने पिता से विरासत में मिली दो एकड़ जमीन बेचनी पड़ी थी। उनका अखबार जल्द ही स्थापित हो गया। लेकिन राजनीति में आने के लिए साल 2001 उन्होंने अपना अखबार दो लाख रुपये में बेच दिया। चुनाव लड़े और विधायक बन गए। पिछले साल अक्टूबर में बीरेन ने एक बार फिर जोखिम लिया और तमाम तरह के अंसतोष जाहिर करते हुए इबोबी सिंह सरकार और कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अक्टूबर 2016 में ही वो आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल हो गए।

मणिपुर में चुनावों की घोषणा के साथ ही वो राज्य में भाजपा का मुख्य चेहरा रहे। ये तय था कि अगर मणिपुर में भाजपा जीती तो सीएम बीरेन सिंह होंगे। राजनीति में आने के बाद भी जालंधर और दिल्ली के लिए पांच सालों तक फुटबॉल खेल चुके बीरेन के मन में फुटबॉल के लिए प्यार कम नहीं हुआ है। उनके घर के प्रवेशद्वार डुरंड कप 1991 की एक ग्रुप फोटो लगी है जिसमें वो भी हैं। उनके घर में पीएम नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की भी तस्वीरें हैं लेकिन उनका आकार डुरंड कप वाली ग्रुप फोटो से काफी कम है। उन्होंने अपने छोटे बेटे का नाम ब्राजील के फुटबॉलर जीको के नाम पर रखा है। वो उसे घर पर पेले बुलाते हैं।

चुनाव के नतीजे आने से पहले बीरेन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि वो कुछ शर्तों पर भाजपा में शामिल हुए हैं। बीरेन ने बताया था, “मैंने राम माधव से कहा था कि राज्य का बजट उसकी भौगोलिक जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। अगर पहाड़ी इलाके को ज्यादा पैसा चाहिए तो उसे मिलना चाहिए।” बीरेन की शिकायत रही है कि इबोबी सिंह ने राज्य में नगा और मैती समुदाय के बीच विभाजन को बढ़ावा दिया है और इसे रोका नहीं गया तो मणिपुर देश के हाथ से फिसल सकता है। अब जब ये साफ हो गया कि बीरेन सिंह राज्य के अगले सीएम होंगे ऐसे में वक्त ही बताएगा कि वो अपने वादों और इरादों पर कितने खरे उतरते हैं।

वीडियो: उत्तर प्रदेश में ये चेहरे हो सकते हैं बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App