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आरक्षण नहीं लागू करने पर सांसद ने पीएम को दी थी सदन में धमकी, संसद गेट पर रोक लिया था रास्ता, जानें- मंडल आंदोलन की कहानी

बता दें कि 20 दिसंबर 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार ने देश में आरक्षण देने के लिए बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल की अगुवाई में मंडल आयोग का गठन कर दिया था। जिसने 2 साल बाद यानि कि 12 दिसंबर 1980 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी।

MANDAL COMMISSION Reservation vp singhवीपी सिंह की सरकार ने मंडल कमीशन की सिफारिश को लागू किया था। (फाइल फोटो)

देश की राजनीति में मंडल आयोग की सिफारिशे लागू करना एक ऐतिहासिक समय माना जाता है, जिसके बाद से देश की राजनीति ही बदल गई। मंडल आयोग की सिफारिशे लागू हुए 30 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। मंडल आयोग के गठन में जिन लोगों का अहम योगदान रहा, उनमें बिहार से सांसद रहे राम अवधेश सिंह का नाम प्रमुख है। एक कार्यक्रम के दौरान राम अवधेश सिंह ने मंडल आयोग से जुड़े किस्से साझा करते हुए बताया था कि किस तरह से उन्होंने साल 1977 में काका कालेकर आयोग की सिफारिशों को लागू करने के मुद्दे पर तत्कालीन पीएम मोरारजी देसाई को धमका दिया था।

दरअसल साल 1977 में जनता पार्टी की सरकार कांग्रेस की जगह सत्ता पर काबिज हुई थी। मोरारजी देसाई ने जनता पार्टी के घोषणा पत्र में आरक्षण को लेकर काका कालेलकर की रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था। राम अवधेश सिंह ने बताया था कि जब वह सांसद बनकर संसद पहुंचे तो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री से काका कालेलकर की रिपोर्ट लागू करने की मांग की। हालांकि मोरारजी देसाई ने काका कालेलकर की रिपोर्ट को 22 साल पुराना बताते हुए लागू करने की बात टाल दी थी।

राम अवधेश सिंह ने बताया था कि पीएम की इस बात पर उन्हें बेहद गुस्सा आया था। उन्होंने बताया कि मोरारजी देसाई ने कहा था कि क्या चुनावी घोषणा पत्र के सभी वादे पूरा करने के लिए होते हैं? देसाई के इस जवाब से राम अवधेश सिंह काफी नाराज हुए थे और उन्होंने कहा था कि ‘संसद में आप अपने ही चुनावी घोषणा पत्र के खिलाफ बोलकर सुरक्षित जा रहे हैं, यदि किसी अन्य देश की संसद में वहां का प्रधानमंत्री ऐसी बात करता तो उसके मुंह पर तुरंत 10-20 अंडे पड़ जाते।’ राम अवधेश सिंह यादव ने बताया था कि उनके इस बयान पर संसद में काफी हंगामा हुआ था।

एक अन्य इंटरव्यू में राम अवधेश सिंह ने बताया था कि काका कालेलकर आयोग की सिफारिशों को लागू कराने के मुद्दे पर एक बार उन्होंने अपने समर्थकों के साथ तत्कालीन पीएम मोरारजी देसाई को संसद के गेट पर रोक लिया था। पीएम की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से निकाला था। यादव ने बताया था कि इसके बाद वह बिहार में सड़कों पर उतरकर आरक्षण देने के पक्ष में माहौल बनाते रहे। जब साल 1978 में पटना के गांधी मैदान पर विशाल रैली हुई, तब केन्द्र सरकार ने बिहार में आरक्षण लागू करने का ऐलान किया था। राम अवधेश सिंह यादव का इसी साल जुलाई माह में निधन हो गया था।

बता दें कि 20 दिसंबर 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार ने देश में आरक्षण लागू करने के लिए बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल की अगुवाई में मंडल आयोग का गठन कर दिया था। जिसने 2 साल बाद यानि कि 12 दिसंबर 1980 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। हालांकि मोरारजी देसाई की सरकार के सत्ता से बाहर होने और कांग्रेस की इंदिरा गांधी सरकार के सत्ता में आने के बाद मंडल रिपोर्ट की सिफारिश लागू नहीं हो पायीं।

इंदिरा गांधी के बाद राजीव गांधी की सरकार रही, तब भी मंडल आयोग की सिफारिशें लागू नहीं की गई। राजीव गांधी के बाद जब वीपी सिंह की सरकार सत्ता में आयी तो 7 अगस्त, 1990 को सरकार ने देश में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने का ऐलान किया था।

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