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दोस्त की ढाई साल की बेटी से रेप कर हत्या, तीन महीने में ही मिली मौत की सजा

जज ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि इस मामले में न्याय सिर्फ मौत की सजा से ही मिल सकता है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र गाजियाबाद | January 21, 2021 9:55 AM
पुलिस ने इस मामले में हत्या की धारा के तहत केस दर्ज किया था। सांकेतिक तस्वीर।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक ढाई साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसे मारने वाले 30 साल के युवक को स्पेशल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि कोर्ट ने महज तीन महीने की सुनवाई के बाद ही सजा का ऐलान कर दिया। स्पेशल जज (पॉक्सो ऐक्ट) महेंद्र श्रीवास्तव ने सजा सुनाते हुए कहा कि इस मामले में न्याय सिर्फ मौत की सजा से ही हो सकता है। इस मामले में आरोपी के लिए सुधार का कोई विकल्प ही नहीं है।

क्या थी घटना?: 19 अक्टूबर 2020 को गाजियाबाद के कवि नगर इलाके में रहने वाला आरोपी अपने दोस्त (बच्ची के पिता) से मिलने उसके घर पहुंचा था। उसने कुछ अन्य लोगों के साथ में शराब पी थी। इसके बाद वह घर के अंदर घुसा और दोस्त की ढाई साल की बच्ची के साथ खेलने के लिए कहने लगा। इस बीच बच्ची की मां की नजर हटते ही आरोपी बच्ची को लेकर निकल गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। एक सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में रात 8.50 से 8.55 के बीच आरोपी को दोस्त की बच्ची के साथ देखा गया।

पुलिस ने आरोपी को उसी रात को गिरफ्तार कर लिया। बच्ची का शव भी उसी रात को 12.30 बजे आरटीओ के पास सी ब्लॉक इंडस्ट्रियल एरिया में मिला था। पुलिस ने आरोपी पर आईपीसी की धारा 376 ए-बी (12 साल से छोटे बच्चे के साथ दुष्कर्म), 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाने) और पॉक्सो ऐक्ट की धारा 5 और 6 के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद दो महीने के अंदर ही पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए चार्जशीट दायर कर दी। एक महीने बाद ही कोर्ट ने इस मामले में सजा का ऐलान कर दिया।

जज ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि इस मामले में न्याय सिर्फ मौत की सजा से ही मिल सकता है, क्योंकि दोषी व्यक्ति के सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। यह केस दुर्लभतम श्रेणी का अपराध है। जज ने आगे कहा, “ढाई साल की बच्ची यह तक नहीं जानती कि उसका लिंग क्या है, वह ये तक नहीं जान पाई होगी कि उसके साथ हो क्या रहा है और क्यों?”

जज ने घटना की गंभीरता का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामले समाज को हिला देने वाले होते हैं। अगर ऐसे लोगों को मौत की सजा नहीं दी गई तो समाज में एक गलत संदेश जाएगा और लोग हैदराबाद एनकाउंटर जैसी घटनाओं को सही करार देते रहेंगे। इससे कोर्ट की मौजूदगी पर भी सवाल उठेंगे। जज ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी जिक्र किया, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने एक चार साल की बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के लिए नागपुर के शख्स को मौत की सजा दी थी।

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