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13 साल बाद पाकिस्तानी जेल से स्वदेश लौटा शख्स, बताया- जबरदस्ती कबूल करवाना चाहते थे भारतीय जासूस होने की बात

कच्छ के नाना दिनारा गांव के इस्माइल समा 13 साल पहले अपने मवेशियों को चराने के दौरान गलती से पाकिस्तान में प्रवेश कर गए थे, हालांकि उनके परिवार को 2017 तक उनकी जानकारी नहीं मिली थी।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र अहमदाबाद | Updated: January 30, 2021 10:54 AM
प्रतीकात्मक फोटो।

गुजरात के कच्छ जिले के रहने वाले इस्माइल समा पिछले हफ्ते जब अपने घर लौटे, तो पूरे गांव में ही जश्न का माहौल हो गया। बड़ी संख्या में समा के रिश्तेदार उससे मिलने के लिए इकट्ठा हुए। यहां तक कि स्थानीय मस्जिद से भी लोगों ने समा के लौटने पर खुशी जाहिर की। दरअसल, 2008 में समा अनजाने में पाकिस्तान की सीमा में चला गया था और जिसे जासूसी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। पड़ोसी देश की जेलों में 13 साल तक बंद रहने के बाद आखिरकार भारत लौट आया। यहां आने के बाद समा ने बताया कि किस तरह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने उसे टॉर्चर किया और जबरन उससे जासूसी की बात कबूल करवाने की कोशिश की।

पाकिस्तान सीमा से करीब 60 किलोमीटर दूर कच्छ के नाना दिनारा गांव के इस्माइल समा 13 साल पहले अपने मवेशियों को चराने के दौरान गलती से पाकिस्तान में प्रवेश कर गए थे। तब उन्हें पाकिस्तान रेंजर्स ने गिरफ्तार कर लिया था और फिर उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। बाद में उन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हवाले कर दिया गया।

इस्माइल का कहना है कि उन्हें छह महीने तक आईएसआई ने टॉर्चर किया। इस दौरान एजेंसी ने उन्हें यही कबूल करवाने की कोशिश की कि वह भारतीय जासूस हैं। हालांकि, उन्होंने यह कभी नहीं कबूला। इस्माइल के मुताबिक, उन्हें पाकिस्तान के हैदराबाद की एक मिलिट्री फैसिलिटी में तीन साल तक रखा गया है। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 2008 में जासूसी के आरोपों में पांच साल की जेल की सजा सुना दी और उन्हें हैदराबाद की सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

इस्माइल ने बताया- “मुझे कुछ अन्य भारतीय और पाकिस्तानियों के साथ रखा गया, जिन पर जासूस होने का शक था। जेल का समय खत्म होने के बाद मुझे कराची सेंट्रल जेल भेजा गया।” 2014 में पहली बार पाकिस्तान ने उन्हें कॉन्स्यूलर एक्सेस की सुविधा मुहैया कराई। तब तक उनके परिवार को भी उनके पाकिस्तान में होने की जानकारी नहीं थी। इस्माइल के मुताबिक, उन्होंने जेल से अपने परिवार को 15 खत लिखे, लेकिन इनमें से कोई भी उनके घर तक नहीं पहुंचा। बाद में इस्माइल के साथ ही जेल में बंद एक व्यक्ति ने रिहा होने के बाद उनके घर तक यह सूचना पहुंचाई।

कच्छ के रहने वाले समा ने बताया कि अक्टूबर 2016 में मेरी सजा पूरी होने के बाद भी मुझे रिहा नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, “मैं 2018 तक सात साल तक हैदराबाद सेंट्रल जेल में रहा। इसके बाद मुझे दो अन्य भारतीयों के साथ कराची सेंट्रल जेल भेज दिया गया। पत्रकार और शांति कार्यकर्ता जतिन देसाई ने कहा कि समा के बारे में जानने के बाद, पाकिस्तान-इंडिया पीपुल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी (पीआईपीएफपीडी) और एक स्थानीय एनजीओ ने दोनों सरकारों से संपर्क करना शुरू किया और पाकिस्तान उच्चायुक्त को पत्र लिखकर उनकी रिहाई का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि उनकी रिहाई भारतीय उच्चायोग द्वारा चार भारतीय कैदियों की रिहाई के लिए याचिका दायर करने के बाद संभव हो पाई है। बताया गया है कि भारतीय अफसरों ने इस्माइल के मामले का जिक्र दिसंबर 2020 में कुलभूषण जाधव से जुड़े एक मामले में किया था। इसके बाद इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने उसे छोड़े जाने की अनुमति दे दी। कच्छ पुलिस उसे शुक्रवार को वापस लेकर आई है।

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