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ये हैं केरल के ‘दशरथ मांझी’, लकवाग्रस्त होने के बावजूद 3 साल में पहाड़ का सीना चीर बनाई सड़क

पंचायत के जवाब के बाद शशि ने सड़क बनवाने के लिए भी पंचायत और निगम को पत्र लिखा। जब काफी समय तक सुनवाई नहीं हुई तो शशि ने खुद ही ठाना की वो ही रास्ता बनाएंगे और तीन साल तक वह रोज लगातार छह घंटे तक कुदाल से सड़क को साफ करते रहे।

Author तिरुअंतपुरम | January 14, 2017 6:10 PM
केरल के शशि गंगाधरन ने हाथों से पहाड़ को चीर कर बनाई सड़क। (Videograb)

पहाड़ खोदकर सड़क बनाने वाले बिहार के दशरथ मांझी की तरह की एक शख्स हैं, जिन्होंने अकेले अपने दम पर एक सड़क बना डाली। अब इन्हें केरल का दशरथ मांझी कहा जा रहा है। इस शख्स का नाम शशि गंगाधरन है। 18 साल पहले शशि गंगाधरन केरल के तिरुअंतपुरम जिले में नारियल के पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ने का काम करते थे, लेकिन अचानक से एक नारियल के पेड़ से गिरने के कारण उनके शरीर का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। जिसके चलते वह कई सालों तक बेड पर लेटे रहे। उनके पास कमाई का कोई सहारा नहीं था। मजबूर शशि ने एक थ्री-व्हीलर के जरिए छोटा बिजनेस स्थापित करने चाहते हैं। इसके लिए गंगाधरन ने पंचायत से मदद की गुहार लगाई है, लेकिन पंचायत ने यह कहते हुए उनकी मदद करने से इनकार दिया कि उनके गांव से शहर तक ट्राइसाइकिल नहीं चल सकती है।

पंचायत के जवाब के बाद शशि ने सड़क बनवाने के लिए भी पंचायत और निगम को पत्र लिखा। जब काफी समय तक सुनवाई नहीं हुई तो शशि ने खुद ही ठाना की वो ही रास्ता बनाएंगे और तीन साल तक वह रोज लगातार छह घंटे तक कुदाल से सड़क को साफ करते रहे। इच्छा शक्तिसे ही शशि ने पहाड़ काटकर 200 मीटर का कच्चा रास्ता बना दिया।

शशि ने इंडिया टुडे को बताया कि उनके घर तक का पुराना रास्ता पठारी था, जिस पर फिसल जाते थे और गिर भी जाते तथा कपड़े भी फट जाते थे। इसके बाद मैंने पंचायत से अपील की वह मुझे एक थ्री-विलर दे दें ताकि मैं कोई छोटा-मोटा बिजनेस कर लूं। इसपर उन्होंने कहा कि वह गाड़ी क्यू दें जब वहां सड़क ही नहीं है तो। शशि की पत्नी ने बताया कि उनके पति ने जो भी किया सब खुद से किया, न तो पंचायत और न ही पड़ोसियों से किसी तरह की मदद ली। लेकिन कुछ लोगों ने उनके खिलाफ शिकायत भी की। गंगाधरन के पड़ोसी का कहना है कि पहले उन्हें लगा कि शशि केवल रास्ता बनाने के लिए खुदाई कर रहे हैं, लेकिन बाद में पता चला कि वह पूरी रोड का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि तीन साल में किसी ने भी शशि की मदद नहीं की।

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