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जिससे शादी करने के लिए इस्लाम छोड़ बन गया हिंदू, अब वही कह रही- मां, बाप के साथ रहना चाहती हूं

लड़की जब अदालत में पेश हुई तो कोर्ट ने कई सारी जानकारियां मांगी। मसलन, लड़की का नाम क्या है? क्या वाकई उनकी शादी हुई? लड़की अपने पति के साथ क्यों नहीं रहना चाहती?

Author August 28, 2018 11:12 AM
सुप्रीम कोर्ट ने महिला को माता-पिता के साथ जाने की दी इजाजत। (file pic)

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ की लड़की को पति के बजाए अपने माता-पिता के साथ रहने की इजाजत दे दी। लड़की ने अदालत के सामने ऐसी इच्छा जाहिर की थी। इस शख्स के पति ने उससे शादी करने के लिए कथित तौर पर इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने 23 वर्षीय लड़की से सोमवार को बातचीत की। इससे पहले, अदालत ने छत्तीसगढ़ पुलिस को निर्देश दिए थे कि वह लड़की की उपस्थिति सुनिश्चित कराए। दरअसल, अदालत पति इब्राहिम सिद्दीकी की ओर से दाखिल याचिका पर सुवाई कर रही थी। हिंदू धर्म अपनाने के बाद उसने अपना नाम आर्यन आर्य रख लिया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, वह रायपुर से 60 किमी दूर धमतरी की रहने वाली अंजलि जैन से शादी करने के लिए इस साल फरवरी में हिंदू धर्म अपना लिया था।

सिद्दीकी ने आरोप लगाया था कि लड़की का परिवार उसे लड़की से मिलने नहीं दे रहा था। लड़की जब अदालत में पेश हुई तो कोर्ट ने कई सारी जानकारियां मांगी। मसलन, लड़की का नाम क्या है? क्या वाकई उनकी शादी हुई? लड़की अपने पति के साथ क्यों नहीं रहना चाहती? लड़की ने जवाब दिया कि वह बालिग है और उसने आर्य से शादी की, लेकिन वह अपने घरवालों के साथ रहना चाहती है। उसने कहा कि यह उसकी इच्छा है और उसपर किसी ने दबाव नहीं बनाया है। बेंच ने लड़की के बयान पर विचार किया और हाई कोर्ट के आदेश में तब्दीली कर दी। हाई कोर्ट ने लड़की को आदेश दिया था कि या तो वह घरवालों के साथ रहे या फिर हॉस्टल में।

बेंच ने कहा, ‘उसने साफ तौर पर कहा कि वह अपने पति के साथ नहीं जाना चाहती और अपने घरवालों के पास वापस जाना चाहती है। उसके बयान के मद्देनजर हम उसे अपने घरवालों के साथ जाने की इजाजत देत हैं। हम शादी पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। वह बालिग है, वह अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है और वह जहां चाहे जा सकती है। ‘ अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मामले की कानूनी पेचीदगियों और शादी की वैधता आदि पर बात नहीं करना चाहती। इस मामले पर सक्षम अदालतें विचार करेंगी।

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