100 ग्राम बादाम के लिए 82 रुपये अतिरिक्त चुकाने पर एक शख्स को 7 हजार रुपये का मुआवजा मिला। आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक खुदरा विक्रेता को ग्राहक से वसूली गयी अतिरिक्त राशि वापस करने और 7,000 रुपये का मुआवजा और मुकदमे की लागत का भुगतान करने का निर्देश दिया। आयोग ने पाया कि खुदरा विक्रेता ने 100 ग्राम बादाम एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचे थे।
अध्यक्ष डी श्रीदेवी और सदस्यों वाई सुंदर राव और डॉ एस ए समीरा की पीठ ने पाया कि शिकायतकर्ता के सबूतों से खुदरा विक्रेता के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। आयोग ने 30 मई के अपने आदेश में कहा, “एमआरपी से अधिक कीमत पर माल की बिक्री विपक्षी पक्ष 1 और 2 द्वारा अपनाई गई अनुचित व्यापार प्रथा को दर्शाती है। ऐसे में वे निश्चित रूप से शिकायतकर्ता को ब्याज और मुआवजे सहित अतिरिक्त राशि वापस करने के लिए उत्तरदायी हैं।”
विक्रेता ने एमआरपी से 82 रुपये अधिक वसूल किए
शिकायत में आरोप लगाया गया कि शिकायतकर्ता ने 7 फरवरी, 2025 को मोर रिटेल प्राइवेट लिमिटेड से कई किराने का सामान खरीदा था। उत्पाद के एमआरपी 190 रुपये होने के बावजूद उससे ‘मोर चॉइस आलमंड’ के 100 ग्राम के पाउच के लिए 272 रुपये का शुल्क लिया गया था। शिकायत के अनुसार, खुदरा विक्रेता ने मुद्रित एमआरपी से 82 रुपये अधिक वसूल किए। कंपनी को कानूनी नोटिस जारी करने के बाद उपभोक्ता ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग से संपर्क किया।
अपने बचाव में मोर रिटेल ने क्या तर्क दिया?
अपने बचाव में मोर रिटेल ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने 1,564 रुपये मूल्य की सात वस्तुएं खरीदी थीं और उसे कुल 440 रुपये की छूट के साथ-साथ लॉयल्टी पॉइंट्स भी मिले थे जिससे अंतिम देय राशि घटकर 1,124 रुपये हो गई थी। यह तर्क दिया गया कि कंपनी ने उपभोक्ता से बिल में निर्धारित राशि से अधिक शुल्क नहीं लिया था और शिकायत को खारिज करने की मांग की गई।
उपभोक्ता आयोग का फैसला
आयोग ने गौर किया कि उपभोक्ता के कानूनी नोटिस के जवाब में, खुदरा विक्रेता ने स्वीकार किया था कि उत्पाद की कीमत को स्कैन करने में त्रुटि हुई थी। साथ ही कहा था कि यह गलती न तो जानबूझकर की गई थी और न ही इरादे से। आयोग ने पाया कि खुदरा विक्रेता ने बाद में अपने लिखित बयान में इस बात को स्वीकार करने से इनकार नहीं किया। पीठ ने टिप्पणी की। पीठ ने टिप्पणी की, “शिकायतकर्ता ने ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं जो उनके मामले को साबित करने में बेहद सहायक हैं। इसलिए, आयोग ने पाया है कि विपक्षी पार्टियों द्वारा शिकायतकर्ता के आरोपों के अनुरूप अनुचित व्यापार व्यवहार किया जा रहा है।”
शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए, आयोग ने मोर रिटेल और उसके प्रबंध निदेशक को संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से, खरीद की तारीख से भुगतान होने तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 82 रुपये वापस करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, अनुचित व्यापार के कारण हुई मानसिक पीड़ा, शारीरिक कठिनाई और कष्ट के मुआवजे के रूप में 5,000 रुपये और मुकदमे की लागत के लिए 2,000 रुपये भी प्रदान किए गए।
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बीयर की बोतल पर 10 रुपये एक्स्ट्रा चुकाने के बदले एक शख्स को अदालत से 25,000 रुपये का मुआवजा मिला। केरल के उपभोक्ता आयोग ने केरल स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन (KSBC) को एक ग्राहक को मुआवजे के रूप में 25 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
