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5 सरकारी PSU बेचने पर ममता बनर्जी का सवाल- केंद्र सबकुछ बेच देगा, तो क्या बचेगा सरकार के पास?

गौरतलब है कि सरकार ने निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेट्रोलियम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड सहित कई कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है।

Author November 21, 2019 7:53 PM
mamta banerjeeपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

कई सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) में हिस्सेदारी बेचने या विनिवेश करने संबंधी केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आर्थिक संकट से निपटने के लिए विशेषज्ञों और सभी राजनीतिक दलों से बात करनी चाहिए। बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (सीपीएसयू) में सरकारी हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाना केवल अस्थायी राहत प्रदान कर सकता है।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘केन्द्र को छोटे-छोटे कदम उठाने की जगह स्थायी समाधान करना चाहिए। जब तक आर्थिक स्थिरता नहीं होगी, इस तरह के उपाय समाधान नहीं हो सकते हैं।’’ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा कि एक निर्वाचित सरकार को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए। देश को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ‘‘सभी अन्य दलों की भी राय ली जानी चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री को संकट से निपटने के लिए देश में विशेषज्ञों से बात करनी चाहिए और एक सर्वदलीय बैठक आयोजित करनी चाहिए।’’

गौरतलब है कि सरकार ने बुधवार को निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेट्रोलियम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल), पोत परिवहन कंपनी भारतीय जहाजरानी निगम (एससीआई) और माल ढुलाई से जुड़ी कंटेनर कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया (कॉनकॉर) में सरकारी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की चुंिनदा कंपनियों में हिस्सेदारी को 51 प्रतिशत से नीचे लाने को मंजूरी दी है। बनर्जी ने कहा कि पीपीपी मॉडल में निजी भागीदारी को अनुमति विशिष्ट क्षेत्रों में दी जा सकती है, जैसा कि उन्होंने रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान किया था।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों को बेचना एक सही फैसला नहीं था। बनर्जी ने पूछा, ‘‘अगर केंद्र सबकुछ बेच देता है, तो सरकार के पास क्या बचेगा?’’ कई पीएसयू बैंकों का विलय किए जाने संबंधी केंद्र के फैसले पर सवाल उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया (यूबीआई) का दो अन्य बैंकों के साथ विलय राज्य सरकार के लिए समस्याएं खड़ी करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार की कई योजनाएं बैंकों के माध्यम से चलती हैं, इसलिए यदि यूबीआई के मुख्यालय को राज्य से बाहर स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो इन योजनाओं के भविष्य पर सवाल खड़े हो सकते हैं।’’ बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रोजगार सृजन और लोगों के हित में रास्ता निकालने के लिए सभी राजनीतिक दलों से बात करनी चाहिए। वर्ष 2016 में 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण के केंद्र सरकार के फैसले की फिर से आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक ऐसा देश है जहां नकदी रहित समाज प्रभावी नहीं हो सकता।’’

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