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सिंगूर का विरोध कर हुई थी ममता की ताजपोशी, अब टीएमसी के मंत्री टाटा के लिए बिछा रहे पलक पांवड़े

सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन ने 2011 में ममता बनर्जी को सत्ता में लाने में मदद की थी।

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के साथ मंत्री पार्थ चटर्जी। (एक्सप्रेस फोटो)।

सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन ने 2011 में ममता बनर्जी को सत्ता में लाने में मदद की थी। आंदोलन के बाद टाटा को पश्चिम बंगाल से अपनी नैनो कार परियोजना को बाहर ले जाना पड़ा था। अब 13 साल बाद टाटा समूह एक बार फिर राज्य निवेश के लिए आगे आ सकता है। राज्य के उद्योग और आईटी मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि टाटा के साथ बड़े निवेश के लिए बातचीत चल रही है।

उन्होंने रोजगार सृजन को टीएमसी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि रोजगार देने की क्षमता के आधार पर कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सरकार चाहती है कि किसी भी प्रमुख औद्योगिक घराने द्वारा जल्द से जल्द दो बड़ी विनिर्माण इकाइयां स्थापित की जाएं। चटर्जी ने कहा, ‘‘टाटा के साथ हमारी कभी कोई दुश्मनी नहीं थी, न ही हमने उनके खिलाफ लड़ाई लड़ी। वे इस देश के सबसे सम्मानित और सबसे बड़े व्यापारिक घरानों में से एक हैं। आप टाटा को (सिंगूर उपद्रव के लिए) दोष नहीं दे सकते।’’

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के महासचिव चटर्जी ने एक साक्षात्कार में बताया, ‘‘समस्या वाम मोर्चा सरकार और उसकी जबरन भूमि अधिग्रहण नीति के चलते थी। टाटा समूह का हमेशा बंगाल में आने और निवेश करने के लिए स्वागत है।’’चटर्जी ने कहा कि नमक से इस्पात तक बनाने वाले कारोबारी समूह ने कोलकाता में अपने कार्यालयों के लिए एक और टाटा सेंटर स्थापित करने में रुचि दिखाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे यहां पहले ही टाटा मेटालिक्स, टीसीएस के अलावा एक टाटा सेंटर है। लेकिन अगर वे विनिर्माण या अन्य क्षेत्रों में बड़े निवेश के साथ आने के इच्छुक हैं, तो कोई समस्या नहीं है। हमारे आईटी सचिव ने हाल में मुझे बताया था कि उन्होंने यहां टाटा सेंटर स्थापित करने में रुचि दिखाई है।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य सरकार टाटा से बात करने के लिए अतिरिक्त कोशिश करेगी, चटर्जी ने कहा कि वह निवेश आकर्षित करने के लिए पहले ही समूह के अधिकारियों के संपर्क में हैं।

क्या था सिंगूर मामला?: 2006 में सिंगूर में तत्कालीन पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग 2 के साथ 997.11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया और इसे टाटा मोटर्स को सौंप दिया। कंपनी इसे अपनी सबसे सस्ती कार नैनो बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहती थी। तब विपक्ष में रहीं ममता बनर्जी ने “जबरन” अधिग्रहित की गई 347 एकड़ कृषि भूमि को वापस करने की मांग करते हुए 26 दिनों की भूख हड़ताल का आह्वान किया था।

टीएमसी और वाम मोर्चा सरकार के बीच कई दौर की बैठकों के बावजूद, इस मुद्दे को हल नहीं किया जा सका था और कंपनी आखिर में 2008 में सिंगूर से गुजरात चली गई थी। परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि बाद में 2016 में किसानों को वापस कर दी गई थी।

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